भारत-सिंगापुर सेमीकंडक्टर सहयोग को मिला जोर, नए निवेश पर उद्योग की नजर
नई दिल्ली, 17 अप्रैल (आईएएनएस)। सेमीकंडक्टर क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से इंडिया सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (आईसीईए) ने सिंगापुर सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री एसोसिएशन (एसएसआईए) के साथ मिलकर शुक्रवार को सिंगापुर में एक उच्च स्तरीय उद्योग बैठक आयोजित की।
इस बैठक में भारत और सिंगापुर के प्रमुख हितधारकों ने हिस्सा लिया और सेमीकंडक्टर तथा इलेक्ट्रॉनिक्स वैल्यू चेन में सहयोग को और गहरा करने पर चर्चा की।
बैठक में दोनों देशों की पूरक ताकतों पर जोर दिया गया। जहां सिंगापुर सेमीकंडक्टर निर्माण, उपकरण और वैश्विक सप्लाई चेन में अग्रणी है, वहीं भारत अपनी बढ़ती मैन्युफैक्चरिंग क्षमता, नीतिगत समर्थन और बड़े बाजार के कारण एक मजबूत साझेदार के रूप में उभर रहा है।
यह पहल आईसीईए और एसएसआईए के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) के बाद आगे बढ़ी है, जिसका उद्देश्य दीर्घकालिक औद्योगिक सहयोग के लिए एक संरचित ढांचा तैयार करना है।
बैठक में दोनों देशों की कंपनियों के बीच साझेदारी, निवेश के अवसर और तकनीकी सहयोग पर सीधी बातचीत हुई। इस दौरान भारत-सिंगापुर के बीच एक भरोसेमंद सेमीकंडक्टर कॉरिडोर विकसित करने पर भी जोर दिया गया।
चर्चा में सप्लाई चेन को मजबूत करने, तकनीकी सह-विकास, संयुक्त उपक्रम (जॉइंट वेंचर), निवेश प्रवाह और फैब्रिकेशन, उपकरण, सामग्री तथा प्रिसिजन इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में अवसरों पर फोकस किया गया।
उद्योग जगत के नेताओं ने नीतिगत समर्थन, कौशल विकास और पूरे इकोसिस्टम की तैयारी पर भी विचार-विमर्श किया।
आईसीईए के चेयरमैन पंकज मोहिंद्रू ने कहा कि यह साझेदारी दोनों देशों के बीच मजबूत तालमेल को दर्शाती है। उन्होंने बताया कि जहां सिंगापुर उन्नत मैन्युफैक्चरिंग और वैश्विक सप्लाई चेन विशेषज्ञता लाता है, वहीं भारत पैमाना, मांग और नीतिगत गति प्रदान करता है, जो एक मजबूत और विविध सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम बनाने के लिए महत्वपूर्ण है।
वहीं, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के सीईओ अमितेश कुमार सिन्हा ने कहा कि भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा को पहले ही गति मिल चुकी है।
--आईएएनएस
डीएससी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
निर्यातकों के लिए व्यापार सुगम बनाने के लिए सरकार ने सुधारों की शुरुआत की
नई दिल्ली, 17 अप्रैल (आईएएनएस)। व्यापार सुगमता और निर्यातकों के लिए व्यापार सुविधा प्रदान करने की सरकार ने एक बार फिर प्रतिबद्धता दिखाई है। इस क्रम में वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) के अंतर्गत आने वाली मानक समितियों के कामकाज को सुदृढ़ करने हेतु लक्षित सुधारों की एक श्रृंखला शुरू की है। इसका उद्देश्य अग्रिम प्राधिकरण योजना के तहत प्रक्रिया में लगने वाले समय को कम करना, शीघ्र अनुमोदन सुनिश्चित करना और पारदर्शिता एवं पूर्वानुमानशीलता को बढ़ाना है। यह जानकारी शुक्रवार को जारी एक आधिकारिक बयान में दी गई है।
लागू किए गए सुधारों की श्रृंखला में मानदंड समितियों (एनसी) के कामकाज में एकरूपता और निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत दिशानिर्देश जारी करना शामिल है। इनमें निश्चित पाक्षिक चक्र पर बैठकों का संस्थागत निर्धारण, लंबे समय से लंबित मामलों को प्राथमिकता देना, समयबद्ध तरीके से बैठक के कार्यवृत्त को अंतिम रूप देना और लंबित मामलों और उनकी अवधि की व्यवस्थित निगरानी करना शामिल है। बयान में कहा गया है कि बार-बार होने वाली स्वीकृतियों को कम करने के लिए, बार-बार आने वाले मामलों की पहचान करके उन्हें मानक इनपुट-आउटपुट मानदंडों (एसआईओएन) में परिवर्तित करने के प्रयास भी किए गए हैं।
संबंधित मंत्रालयों से समितियों में अतिरिक्त तकनीकी अधिकारियों को मनोनीत करने का अनुरोध किया गया है ताकि क्षेत्रीय विशेषज्ञता को बढ़ाया जा सके और सदस्यों के सीमित समूह पर निर्भरता कम की जा सके। इसके अलावा, लंबित आवेदनों के शीघ्र निपटान के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया गया है, जिसके तहत बैठकें नियमित समय पर आयोजित की जा रही हैं और पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए मामलों को कालानुक्रमिक क्रम में निपटाया जा रहा है।
क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से, विभिन्न मंत्रालयों से दस अतिरिक्त तकनीकी सदस्यों को मनोनीत किया गया है, जिससे तकनीकी प्राधिकारियों की कुल संख्या 12 से बढ़कर 22 हो गई है। इससे समितियों की अधिक संख्या में मामलों को बेहतर दक्षता के साथ संभालने की क्षमता मजबूत हुई है।
सुधारों के परिणामस्वरूप बेहतर परिणाम प्राप्त हुए हैं। जनवरी 2026 से 7 अप्रैल 2026 के बीच, मानक समितियों की कुल 38 बैठकें आयोजित की गईं, जिनमें 3,925 मामलों पर विचार किया गया और 1,770 मामलों का निपटारा किया गया, बयान में कहा गया है।
ये उपाय सरकार के सुगम और पूर्वानुमानित व्यापार वातावरण बनाने के एजेंडे के अनुरूप हैं, विशेष रूप से लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए। मानक निर्धारण की सुव्यवस्थित प्रक्रिया से लेनदेन लागत में कमी, प्राधिकरण की समय सीमा में कमी और भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि होने की उम्मीद है।
--आईएएनएस
एमएस/
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