America Iran War Update: अमेरिकी कार कंपनियों को हथियार बनाने बनाने के दिए निर्देश, लंबी लड़ाई के मूड में ट्रंप
ईरान ने सीज फायर की अवधि तक यानी 22 अप्रैल तक के लिए हॉर्मोस से शिफिंग नेविगेशन को खोल दिया है. लेकिन सवाल यह है कि 22 अप्रैल के बाद क्या होगा? क्या फिर आईआरजीसी हॉर्मोस को ब्लॉक कर देगा? दरअसल विवाद के मामले को लेकर दोनों पक्षों में अभी तक कई कंफ्यूजन शेष है. इस बीच सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि पेंटांगन गोला बारूद उत्पादन में तेजी लाने और रक्षा औद्योगिक आधार को व्यापक बनाने के लिए अमेरिका की प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनियों के साथ बातचीत कर रहा है. मतलब अमेरिकी की ऑटो कंपनियों में अब कार की जगह मिसाइलें बनेंगी.
क्या ट्रंप लंबी जंग की तैयारी कर रहे हैं?
फाइटर जेट्स के पार्ट्स बनेंगे तो क्या ट्रंप लंबी जंग की तैयारी कर रहे हैं? इस बात का पहला संकेत पेंटांगन के उस निर्देश से मिल रहा है, जिसमें उसने अमेरिकी कार कंपनियों को हथियार बनाने की तैयारी करने के लिए कहा है. अमेरिकी कार कंपनियों की वर्क फैसिलिटीज को वेपन प्रोडक्शन सेंटर में बदलने की सलाह दी गई है. अब सवाल है कि पेंटागन के इस तरह के निर्देश देने की जरूरत आखिर क्यों पड़ी? रक्षा विशेषज्ञ का दावा है कि ईरान के साथ हुए 40 दिन के युद्ध के दौरान अमेरिकी आर्मी ने रोजाना करीब 28 टॉम हॉक मिसाइलें फायर की. जबकि अमेरिकी रक्षा कंपनी रेथन को एक टॉबहॉक मिसाइल तैयार करने में 4 दिन का वक्त लगता है. ईरान युद्ध में अब तक 500 पेट्रिएट मिसाइलें खर्च हो चुकी है जो अमेरिका का साल भर का स्टॉक है. तो साफ है कि अमेरिका युद्ध स्तर पर अपने सैन्य संसाधन जमा कर रहा है ताकि ईरान के खिलाफ किसी भी ऑपरेशन में असले और गोला बारूद की कमी ना पड़े. तो क्या अमेरिका ने ईरान पर भीषण हमले की योजना बना ली है? आखिर क्यों अमेरिकी डिफेंस फैसिलिटीज में दिन रात 24 वें घंटे प्रोडक्शन जारी है?
मैराथन बैठकों का दौर लगातार जारी
क्या ट्रंप ईरान पर फाइनल एक्शन की तैयारी कर रहे हैं? ईरान पर बारूदी असाल्ट का दूसरा फेज कितना विध्वंसक होगा? ईरान पर किस तरह के हमले होंगे? सैन्य अभियान के दौरान क्या-क्या टारगेट पर होगा? इसके लिए पेंटागन से लेकर वाइट हाउस के वार रूम में मैराथन बैठकों का दौर लगातार जारी है. अमेरिका एक तरफ ईरान के साथ नेक्स्ट फेज की भी स्टॉक को लेकर संजीदगी दिखाने की कोशिश कर रहा है और दूसरी तरफ उसका प्लान एग्रेसिव स्ट्राइक का है. डील होगी या नहीं इसे लेकर लगाई गई अटकलों के बीच ट्रंप ने अपना रुख साफ कर दिया है. बैक डोर से बातचीत के बीच ट्रंप ईरान को धमकाने से बस नहीं आ रहे हैं. यानी डील फाइनल होने से पहले ही अमेरिका बता चुका है कि उसके दिमाग में आखिर क्या चल रहा है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक फीस फायर, पीस टॉक और डील की चर्चा ये सब अमेरिका के एक प्लान का हिस्सा हो सकते हैं जिसके जरिए वो ईरान को उलझाए रखें और अपनी जंगी तैयारी को धार देने का वक्त निकाल लें.
ट्रंप ने तरणजीत सिंह संधू को दिल्ली के उपराज्यपाल बनने पर दी बधाई
वॉशिंगटन, 17 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तरणजीत सिंह संधू को दिल्ली के उपराज्यपाल नियुक्त किए जाने पर बधाई दी है और उनके कूटनीतिक अनुभव की सराहना की है।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा, “दिल्ली के नए उपराज्यपाल बनने पर तरणजीत संधू को बधाई!”
उन्होंने अमेरिका में भारत के राजदूत के रूप में संधू के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
ट्रंप ने कहा, “एक अनुभवी राजनयिक और अमेरिका में भारत के पूर्व राजदूत के रूप में उन्होंने हमेशा भारत-अमेरिका संबंधों को सशक्त बनाने के प्रति गहरी प्रतिबद्धता दिखाई है।”
अमेरिकी राष्ट्रपति ने दिल्ली में उनके नेतृत्व को लेकर भी भरोसा जताया और कहा, “दिल्ली के विकास का नेतृत्व करने और वैश्विक संबंधों को आगे बढ़ाने में उन्हें सफलता की शुभकामनाएं।”
वरिष्ठ भारतीय विदेश सेवा अधिकारी संधू का वॉशिंगटन में कार्यकाल ऐसे समय में रहा, जब भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक संबंध तेजी से मजबूत हो रहे थे। इस दौरान उन्होंने अमेरिकी सांसदों, अधिकारियों और भारतीय प्रवासी समुदाय के साथ सक्रिय संवाद बनाए रखा।
ट्रंप का यह संदेश संधू की वॉशिंगटन में मजबूत पहचान और द्विपक्षीय संबंधों को गहरा करने में उनकी भूमिका को रेखांकित करता है।
हाल के वर्षों में भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच रक्षा, व्यापार और उभरती तकनीकों जैसे क्षेत्रों में सहयोग तेजी से बढ़ा है। दोनों देशों के अधिकारी इस साझेदारी को हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता और वैश्विक आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं।
उच्चस्तरीय दौरे, संयुक्त सैन्य अभ्यास और बहुपक्षीय मंचों पर समन्वय अब इस साझेदारी की सामान्य विशेषताएं बन चुकी हैं।
संधू की दिल्ली के उपराज्यपाल के रूप में नियुक्ति उस व्यापक रुझान को भी दर्शाती है, जिसमें अनुभवी राजनयिकों को प्रशासनिक जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं, खासकर ऐसे समय में जब भारत की वैश्विक भागीदारी तेजी से बढ़ रही है।
दिल्ली के उपराज्यपाल की भूमिका राष्ट्रीय राजधानी के प्रशासन की निगरानी में महत्वपूर्ण होती है, जहां वे निर्वाचित सरकार के साथ मिलकर नीतिगत और प्रशासनिक फैसलों में भूमिका निभाते हैं।
भारत और अमेरिका के बीच संबंध विभिन्न सरकारों के दौरान मजबूत बने रहे हैं और वॉशिंगटन में नई दिल्ली के साथ सहयोग बढ़ाने को लेकर व्यापक समर्थन देखा जाता है।
--आईएएनएस
डीएससी
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