ट्रंप के अनुरोध पर लेबनान में अस्थायी युद्धविराम को मंजूरी: नेतन्याहू
यरुशलम, 17 अप्रैल (आईएएनएस)। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शुक्रवार को कहा कि डोनाल्ड ट्रंप के अनुरोध पर लेबनान में अस्थायी युद्धविराम पर सहमति बनी है, ताकि वहां की सरकार के साथ एक संयुक्त कूटनीतिक और सैन्य समाधान को आगे बढ़ाने का मौका मिल सके।
नेतन्याहू ने कहा कि उत्तरी मोर्चे पर इज़रायल ने “ऐतिहासिक उपलब्धियां” हासिल की हैं। उन्होंने बताया कि लेबनान की ओर से दो तरह के खतरे थेज एक नजदीकी और दूसरा दूर का।
नजदीकी खतरे में आतंकियों की घुसपैठ और सीमावर्ती इलाकों पर एंटी-टैंक हमले शामिल थे, जबकि दूर का खतरा हिजबुल्लाह द्वारा वर्षों में तैयार किए गए करीब 1.5 लाख मिसाइल और रॉकेट थे, जिनका लक्ष्य इज़राइल के शहरों को निशाना बनाना था।
नेतन्याहू ने दावा किया कि इज़राइल ने इन दोनों खतरों को काफी हद तक समाप्त कर दिया है। उन्होंने कहा कि पहली बार पूरे उत्तरी सीमा क्षेत्र में एक गहरी सुरक्षा बफर ज़ोन बनाई गई है, जो माउंट हर्मोन, गोलान हाइट्स और यरमूक तक फैली हुई है।
उन्होंने बताया कि इस बफर ज़ोन के जरिए घुसपैठ और एंटी-टैंक हमलों जैसे नजदीकी खतरों को पूरी तरह नियंत्रित किया गया है और इज़राइली सेना ‘येलो लाइन’ पर तैनात रहकर सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है।
दूर के खतरे पर बोलते हुए नेतन्याहू ने कहा कि हिजबुल्लाह के 90 प्रतिशत मिसाइल और रॉकेट भंडार को नष्ट कर दिया गया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि संगठन के शीर्ष नेता हसन नसरल्लाह को मार गिराया गया है और हजारों आतंकियों को खत्म किया गया है।
हालांकि उन्होंने माना कि अभियान अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और शेष रॉकेट व ड्रोन खतरे से निपटने के लिए आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।
नेतन्याहू ने कहा कि हिजबुल्लाह को पूरी तरह खत्म करना एक दीर्घकालिक लक्ष्य है, जिसके लिए धैर्य, निरंतर प्रयास और कूटनीतिक संतुलन की जरूरत होगी।
उन्होंने यह भी बताया कि 43 वर्षों में पहली बार इज़रायल और लेबनान के प्रतिनिधि सीधे बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने इसे शांति की दिशा में एक शुरुआती कदम बताया, हालांकि कहा कि शांति का रास्ता अभी लंबा है।
नेतन्याहू ने कहा, “हमारा एक हाथ हथियार पकड़े हुए है, जबकि दूसरा हाथ शांति के लिए बढ़ा हुआ है। किसी भी तरह हम अपने उत्तरी क्षेत्रों के नागरिकों की सुरक्षा बहाल करेंगे।”
--आईएएनएस
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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
मिसाइल रक्षा को लेकर अमेरिका की नई रणनीति, चीन पर खास फोकस
वॉशिंगटन, 17 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिका में मिसाइल रक्षा को लेकर हुई एक अहम संसदीय सुनवाई में चीन को मुख्य रणनीतिक चुनौती के रूप में चिन्हित किया गया। रक्षा अधिकारियों ने चेतावनी दी कि बीजिंग की तेजी से बढ़ती सैन्य क्षमताएं अमेरिका की घरेलू सुरक्षा ढांचे में बड़े बदलाव को मजबूर कर रही हैं।
पेंटागन के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रस्तावित “गोल्डन डोम” मिसाइल शील्ड को लेकर कहा कि इसकी रूपरेखा तैयार करने में चीन सबसे बड़ी दीर्घकालिक चुनौती के रूप में सामने आया है। हालांकि, इस परियोजना की लागत, व्यवहार्यता और रणनीतिक प्रभाव को लेकर सांसदों के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली।
अंतरिक्ष नीति के सहायक रक्षा सचिव मार्क बर्कोविट्ज़ ने कहा, “चीन हमारा प्रमुख प्रतिस्पर्धी है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका का लक्ष्य टकराव नहीं, बल्कि “मजबूती की स्थिति से चीन को रोकना” है।
प्रस्तावित “गोल्डन डोम” प्रणाली को बहु-स्तरीय और बहु-क्षेत्रीय रक्षा ढांचे के रूप में विकसित किया जा रहा है, जो बैलिस्टिक, हाइपरसोनिक और उन्नत क्रूज मिसाइल खतरों से निपटने में सक्षम होगी। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इन क्षेत्रों में चीन ने तेजी से प्रगति की है।
बर्कोविट्ज़ ने चेतावनी दी कि अमेरिका के प्रतिद्वंद्वी देश अपने हथियारों के भंडार को लगातार बढ़ा रहे हैं और उन्हें अधिक उन्नत बना रहे हैं। वे मिसाइल और हवाई प्रणालियों को एकीकृत कर संयुक्त अभियानों के जरिए अमेरिकी ताकत को चुनौती दे रहे हैं।
अमेरिकी नॉर्दर्न कमांड और नोराड के कमांडर जनरल ग्रेगरी गिलोट ने कहा कि विरोधी देश लगातार नई क्षमताएं हासिल करने में जुटे हैं और आपसी सहयोग के जरिए अमेरिकी रक्षा प्रणाली की कमजोरियों का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं।
“गोल्डन डोम” पहल का नेतृत्व कर रहे जनरल माइकल गुएटलिन ने चेतावनी दी कि “एक पीढ़ी में पहली बार अमेरिका की सुरक्षा की बढ़त कम हो गई है” और देश अब उन्नत मिसाइल खतरों के प्रति ज्यादा संवेदनशील हो गया है।
उन्होंने बताया कि नई प्रणाली में अंतरिक्ष आधारित और जमीनी रक्षा तंत्र को एकीकृत कर एक ऐसा नेटवर्क बनाया जाएगा, जो जमीन, समुद्र, हवा और अंतरिक्ष से आने वाले खतरों का मुकाबला कर सके।
हालांकि, कई सांसदों ने इस योजना पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि चीन जैसे देश नई रणनीतियों और तकनीकों के जरिए इस तरह की रक्षा प्रणाली को पीछे छोड़ सकते हैं।
सांसद सेथ मोल्टन ने कहा कि हाल की अमेरिकी नीतियों ने “चीन की स्थिति को और मजबूत किया है” और मिसाइल रक्षा प्रणाली सभी खतरों के खिलाफ “अभेद्य ढाल” नहीं बन सकती।
मिसाइल डिफेंस एजेंसी के जनरल हीथ कॉलिन्स ने भी माना कि इतिहास में हर नई रक्षा तकनीक के जवाब में विरोधी देश तुरंत नई रणनीतियां विकसित कर लेते हैं।
इसके बावजूद पेंटागन का मानना है कि “गोल्डन डोम” परियोजना चीन जैसे प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए जरूरी है, क्योंकि इससे हमले की योजना बनाना मुश्किल होगा और उन्हें रोकने के अधिक अवसर मिलेंगे।
यह सुनवाई ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और चीन के बीच सैन्य, तकनीकी और भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज होती जा रही है। मिसाइल रक्षा अब इस रणनीतिक मुकाबले का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनती जा रही है।
--आईएएनएस
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