Sore Throat In Summer: गर्मियों में भी लंबे समय तक गले की खराश से हैं परेशान? एक्सपर्ट से जानिए ये घरेलू उपाय, तुरंत मिलेगी राहत
Sore Throat In Summer: गर्मियों का मौसम शुरू हो गया है. इस मौसम में लोग शरीर को ठंडा रखने के लिए ठंडे पानी, कोल्ड ड्रिंक्स और आइसक्रीम जैसी चीजों का सेवन करते हैं. ये चीजें गले को तुरंत राहत तो देती हैं लेकिन अंदर ही अंदर यह गले को नुकसान भी पहुंचा सकती है. इसके अलावा, गर्मी से बचने के लिए हम अक्सर एसी या कूलर के सामने ज्यादा समय बिताते हैं जिससे गले में ड्राइनेस की समस्या को और गंभीर बना देते हैं जिससे गले में इरिटेशन और इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है.
ऐसे में जरूरी है कि हम इस समस्या को नजरअंदाज करने के बजाय सही समय पर ध्यान दें. वैसै तो मार्केट में इसके लिए कई दवाई मिल जाएंगी. लेकिन आप घर पर ही कुछ घरेलू चीजों से गले की खरास, खांसी और जुकाम जैसी समस्याओं से राहत पा सकते हैं. चलिए इस आर्टिकल में एक्सपर्ट से जानते हैं ऐसे ही कुछ घरेलू उपाय के बारे में.
एक्सपर्ट से जानिए घरेलू उपाय
शहद और गुनगुना पानी
आयुर्वेद एक्सपर्ट बताते हैं कि गले में खराश को कम करने के लिए गुनगुने पानी में शहद डालकर पीना फायदेमंद हो सकता है. दरअसल, शहद में एंटी-बैक्टीरियल गुण पाएं जाते हैं जो गले की जलन और दर्द को कम करने में मदद करते हैं. एक गिलास गुनगुने पानी में 1 चम्मच शहद मिलाकर धीरे-धीरे पीएं. यह गले की ड्राईनस को दूर करता है और अंदर से नमी बनाए रखता है.
नमक वाले पानी से गरारा करें
एक्सपर्ट के मुताबिक, नमक वाले पानी का गरारा करने से भी राहत मिलती है. यह सबसे पुराना और असरदार उपाय है. बस गुनगुने पानी में आधा चम्मच नमक मिलाकर दिन में 2 से 3 बार गरारा करें. इससे गले की सूजन कम होती है, बेक्टीरिया खत्म होते हैं और दर्द में तुरंत राहत मिलती है.
अदरक और तुलसी की चाय
इसके अलावा एक्सपर्ट बताते हैं कि अदरक और तुलसी की चाय पीने से भी काफी राहत मिलती है. अदरक में एंटी इंफ्लामेट्री गुण होते हैं और तुलसी इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करती है. इसे बनाने के लिए सबसे पहले अदरक के टुकड़े और 4 से 5 तुलसी के पत्ते उबालकर चाय बना लें और गुनगुना पानी पीएं. इससे गले का दर्द, खराश और सूखापन तीनों कम होते हैं.
हल्दी वाला दूध
हल्दी एक प्राकृतिक एंटीसेप्टिक है जो गले की खराश को कम करने में मदद करता है. रात में सोने से पहले एक गिलास गर्म दूध में आधा चम्मच हल्दी मिलाकर पिएं. यह गले के इंफेक्शन को कम करने में मदद करता है और अंदर से हीलिंग में भी मदद करता है.
मुलेठी मुंह में रखकर चूसें
एक्सपर्ट के मुताबिक, मुलेठी का टुकड़ा भी गले की खराश के लिए काफी फायदेमंद होता है. खासतौर पर गले की खराश क कम करने के लिए इसका छोटा टुकड़ा मुंह में रखकर धीरे-धीरे चूसें. यह गले को ल्यूब्रिकेट करता है और सूखापन और खराश को कम करता है.
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Disclaimer: इस खबर को सामान्य जानकारी के आधार पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए एक्सपर्ट की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यज नेशन इसकी पुष्टि नहीं करता है.
पढ़ाई के नाम पर थका-थका और चिड़चिड़ा महसूस करता है बच्चा, ये हो सकते हैं कारण
नई दिल्ली, 17 अप्रैल (आईएएनएस)। आज के समय में माता-पिता के लिए सबसे बड़ा टास्क है बच्चों को पढ़ाना। छोटे बच्चों को पढ़ाते समय बहुत धैर्य और समझदारी से काम लेना होता है क्योंकि बच्चे बहुत संवेदनशील होते हैं।
कई बार बच्चे अचानक ही बहुत चिड़चिड़े हो जाते हैं और पढ़ने के नाम पर सुस्त पड़ जाते हैं। इसके पीछे बहुत सारे कारण हो सकते हैं, लेकिन सबसे बड़ा कारण है पढ़ाई का दबाव महसूस करना।
छोटे बच्चे अपनी भावनाओं को ठीक से बयां नहीं कर पाते हैं और इसी कारण है कि उनके व्यवहार में परिवर्तन देखने को मिलता है। बच्चे पढ़ते समय चिड़चिड़े हो जाते हैं, बहुत ज्यादा गुस्सा करने लगते हैं, पढ़ते वक्त बहाने करते हैं, बार-बार थका हुआ महसूस करते हैं। बहुत से माता-पिता इसे आलस मानते हैं लेकिन यह आलस नहीं बल्कि पढ़ाई का अत्याधिक दबाव है। इसके पीछे बहुत सारे कारण हो सकते हैं, जैसे माता-पिता की बहुत ज्यादा उम्मीदें, बार-बार दूसरे से बच्चे की तुलना करना, बिना ब्रेक लिए पढ़ाई करना, या छोटी गलती पर ज्यादा डांट पड़ना। ऐसे में बच्चा पढ़ाई से भागता नहीं है, बल्कि पढ़ाई के नाम से डरने लगता है।
अब सवाल है कि ऐसे में बच्चे को कैसे समझे। इसके लिए माता-पिता को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना होगा, जैसे बच्चे के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताना। बच्चे से खुलकर बात करें और ये जानें कि बच्चे के मन में क्या चल रहा है और वह किस चीज से परेशान हैं। दूसरा पढ़ाई के वक्त बच्चे के साथ सख्ती न बरतें। ज्यादा सख्ती बरतने से बच्चा मन से कमजोर और डरा हुआ महसूस करने लगता है। इसलिए बच्चों को प्यार से पढ़ाने और समझाने की कोशिश करें। ऐसा करने से बच्चे का आधा स्ट्रेस अपने-आप ही खत्म हो जाता है।
इसके साथ ही बच्चे की जीवनशैली में थोड़ा बदलाव करना भी जरूरी है। बच्चों को रोज सुबह कुछ बादाम और अखरोट खाने के लिए जरूर दें। इससे बच्चे का दिमाग तेज होगा और पढ़ाई में मन भी लगेगा। बच्चों को प्रकृति के साथ भी जोड़े और उनकी शारीरिक गतिविधि को भी बढ़ाए। उन्हें वह खेल खेलने दें जिससे बच्चे का शारीरिक विकास तेजी से हो।
--आईएएनएस
पीएस/एएस
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