महिला आरक्षण पर पीएम मोदी की हुंकार: कहा- 'विरोध किया तो खैर नहीं', पढ़ें प्रधानमंत्री के भाषण की बड़ी बातें
नई दिल्ली: संसद के विशेष सत्र के दौरान महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पर चर्चा की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे भारत के विधायी इतिहास का 'ऐतिहासिक मोड़' बताया। लोकसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश आज एक नई दिशा लेने जा रहा है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि वह एक बहुत ही पिछड़े समुदाय से आते हैं और समाज के हर वर्ग को आगे ले जाना उनकी जिम्मेदारी है। मोदी ने स्पष्ट किया कि अब भारत की नारी केवल पंचायत तक सीमित नहीं रहना चाहती, वह संसद में अपनी आवाज उठाने के लिए तैयार है।
विपक्ष पर पीएम मोदी का हमला
प्रधानमंत्री ने विपक्षी दलों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि महिला आरक्षण का विरोध करना राजनीतिक रूप से आत्मघाती साबित होगा। उन्होंने कहा, "अगर आप इस बिल का विरोध करेंगे, तो देश आपको माफ नहीं करेगा। जो लोग इस मुद्दे पर राजनीति करना चाहते हैं, उन्हें मेरी सलाह है कि समर्थन करें, वरना चुनाव में नुकसान झेलना होगा।" प्रधानमंत्री ने सभी दलों से एकजुट होकर इस बिल को पारित कराने का आग्रह किया ताकि इसे राष्ट्रीय विरासत बनाया जा सके।
विकसित भारत के लिए महिलाओं की भागीदारी अनिवार्य
प्रधानमंत्री ने अपने विजन को स्पष्ट करते हुए कहा कि 'विकसित भारत' का मतलब केवल अच्छी रेलवे या बुनियादी ढांचा नहीं है, बल्कि नीति निर्धारण में 50 प्रतिशत आबादी यानी महिलाओं की सक्रिय भागीदारी है। उन्होंने स्वीकार किया कि इस बिल में पहले ही 25-30 साल की देरी हो चुकी है, जिसके लिए जो भी जिम्मेदार रहा हो, लेकिन अब और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मोदी ने कहा कि पिछले तीन दशकों में पंचायत स्तर पर चुनी गई महिलाओं ने जबरदस्त राजनीतिक चेतना विकसित की है और अब वे 'मूक दर्शक' नहीं हैं।
Speaking in the Lok Sabha. https://t.co/AsiBPaaoEg
— Narendra Modi (@narendramodi) April 16, 2026
क्रेडिट की होड़ नहीं, नीयत साफ होनी चाहिए
पीएम मोदी ने विपक्ष के उन आरोपों का भी जवाब दिया जिसमें श्रेय लेने की बात कही जा रही थी। उन्होंने कहा, "मैं विपक्ष को क्रेडिट का ब्लैंक चेक देने को तैयार हूं। अगर आप श्रेय लेना चाहते हैं, तो ले लीजिए, लेकिन इस बिल को मत रोकिए।" उन्होंने आगे कहा कि संसद को टुकड़ों में नहीं सोचना चाहिए और न ही परिसीमन (Delimitation) को लेकर किसी राज्य के साथ भेदभाव किया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि किसी भी राज्य की आनुपातिक हिस्सेदारी को नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा।
815 सीटों वाली लोकसभा में 273 महिलाएं
नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत प्रस्तावित बदलावों के अनुसार, लोकसभा की कुल सदस्य संख्या बढ़ाकर 815 की जाएगी, जिनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह आरक्षण 'विकसित भारत' की यात्रा में सबसे बड़ा स्तंभ साबित होगा। उन्होंने समाजवादी पार्टी सहित अन्य दलों से भी अपील की कि वे इसे राजनीतिक तराजू पर न तौलें, क्योंकि गलत इरादे रखने वालों को देश की नारी शक्ति कभी माफ नहीं करेगी।
850 सांसदों वाली लोकसभा में हंगामा: पीएम बोले- क्रेडिट का 'ब्लैंक चेक' ले लो, पर बिल पास होने दो
संसद के विशेष सत्र के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में परिसीमन और महिला आरक्षण बिल पर अपनी बात रखी। सदन में जारी भारी हंगामे और दक्षिण भारतीय राज्यों की चिंताओं के बीच पीएम मोदी ने एक बड़ा और स्पष्ट संदेश दिया।
उन्होंने देश को भरोसा दिलाया कि प्रस्तावित परिसीमन की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होगी और इससे किसी भी राज्य के हितों को नुकसान नहीं पहुँचेगा। पीएम ने विपक्ष के 'सियासी डर' को खारिज करते हुए इसे 'नारी शक्ति' के उदय का महाकुंभ बताया।
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— Narendra Modi (@narendramodi) April 16, 2026
"ये मेरी गारंटी, मेरा वादा": पीएम मोदी की दोटूक
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में 'गारंटी' शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा, "मैं यहाँ बैठकर देश के हर नागरिक और हर राज्य को यह विश्वास दिलाता हूँ कि परिसीमन की प्रक्रिया में किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं होगा। यह मेरी गारंटी और मेरा वादा है।"
उन्होंने दक्षिण भारत के राज्यों की ओर इशारा करते हुए कहा कि हमें देश के टुकड़ों के रूप में सोचने का अधिकार संविधान ने नहीं दिया है। हम कश्मीर से कन्याकुमारी तक एक हैं और सीटों के नए बंटवारे में न्याय के सिद्धांत का पूरी तरह पालन किया जाएगा।
विपक्ष पर प्रहार: "जिन्होंने विरोध किया, उनका हाल बुरा हुआ"
पीएम मोदी ने उन विपक्षी दलों को भी आईना दिखाया जो महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने कहा, "हमारे देश में जब-जब चुनाव आया है, महिलाओं को मिलने वाले इस अधिकार का जिस-जिस ने विरोध किया है, उनका हाल बुरा हुआ है।
उन्हें जनता ने कभी माफ नहीं किया।" उन्होंने विपक्ष को चेतावनी देते हुए कहा कि आज पूरा देश न केवल हमारे निर्णय को देख रहा है, बल्कि हमारी नियत को भी देख रहा है। नियत की खोट को देश की नारी शक्ति कभी माफ नहीं करेगी।
क्रेडिट का 'ब्लैंक चेक': राजनीति से ऊपर उठने की अपील
सदन में चर्चा के दौरान पीएम मोदी ने एक दिलचस्प टिप्पणी की। उन्होंने कहा, "कुछ लोगों को लगता है कि इसमें सियासी स्वार्थ है। मैं आज सबको क्रेडिट का ब्लैंक चेक देने को तैयार हूँ।
जैसे ही यह बिल पारित हो जाए, आप सब विज्ञापन देकर श्रेय ले लीजिए, मैं सबकी फोटो छपवा दूंगा, लेकिन विकसित भारत के निर्माण में इस ऐतिहासिक कदम को राजनीति के तराजू में मत तौलिए।" उन्होंने सभी सांसदों से खुले मन से इस बदलाव को स्वीकार करने का आह्वान किया।
अखिलेश यादव के तीखे सवाल: "भाजपा की मंशा संदिग्ध है"
प्रधानमंत्री के भाषण से पहले सपा मुखिया अखिलेश यादव ने सरकार को बुरी तरह घेरा। अखिलेश ने आरोप लगाया कि परिसीमन और महिला आरक्षण के पीछे भाजपा की कोई 'गुप्त योजना' है।
उन्होंने पूछा कि आखिर सरकार को इतनी जल्दबाजी क्यों है? अखिलेश ने 'SIR' डेटा और 'फॉर्म 7' का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा की चुनावी रणनीति हमेशा से संदिग्ध रही है और परिसीमन के जरिए वे विपक्षी क्षेत्रों में हेरफेर करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने साफ कहा कि भाजपा साजिश के तहत पिछड़ों और दलितों के प्रतिनिधित्व को कम करना चाहती है।
अमित शाह का जवाब: "समाजवादी पार्टी दे दे मुस्लिम महिलाओं को टिकट"
सदन में चर्चा के दौरान जब विपक्ष ने मुस्लिम महिलाओं के प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाया, तो गृह मंत्री अमित शाह ने अखिलेश यादव को चुनौती दी। शाह ने कहा, "समाजवादी पार्टी अगर मुस्लिम महिलाओं के हक की इतनी चिंता करती है, तो वह अपनी पूरी टिकटें उन्हें क्यों नहीं दे देती?
हमें इसमें कोई आपत्ति नहीं है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का बिल 'नारी शक्ति' के व्यापक हित में है और इसमें किसी को भी मजहब के नाम पर राजनीति नहीं करनी चाहिए।
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