'महिला आरक्षण पर विपक्ष ने की नारी शक्ति की भ्रूण हत्या', पीएम मोदी का कड़ा प्रहार; भाषण की 5 बड़ी बातें
PM Modi Address 5 big points: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने विशेष संबोधन में एक बहुत ही भावुक और कड़ा संदेश दिया है. संसद में महिला आरक्षण बिल यानी नारी शक्ति वंदन अधिनियम के पारित न हो पाने पर पीएम मोदी ने देश की करोड़ों माताओं और बहनों से सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगी. उन्होंने कहा कि एक बेटे और एक भाई के रूप में वह बेटियों के अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिए पूरी ईमानदारी से आगे बढ़े थे, लेकिन कुछ राजनीतिक दलों के निजी स्वार्थों ने इस नेक राह में बड़े रोड़े अटका दिए.
पीएम मोदी के भाषण की 5 बड़ी बातें -
1.विपक्ष पर नारी शक्ति की भ्रूण हत्या का आरोप
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कांग्रेस, सपा, टीएमसी और डीएमके जैसी पार्टियों पर सीधा निशाना साधा. उन्होंने कहा कि इन दलों के लिए देश का हित नहीं, बल्कि अपने परिवार और पार्टी का हित सर्वोपरि है. मोदी ने कड़े शब्दों में आरोप लगाया कि इन परिवारवादी पार्टियों ने संसद के भीतर महिला अधिकारों की भ्रूण हत्या कर दी है. उन्होंने कहा कि कल जब पूरा देश उम्मीद भरी नजरों से संसद की ओर देख रहा था, तब इन दलों ने एकजुट होकर नारी शक्ति के सपनों को कुचलने का काम किया. पीएम ने जनता को आगाह किया कि जो लोग महिलाओं के अपमान पर जश्न मनाते हैं, उन्हें आने वाले समय में देश की आधी आबादी कभी माफ नहीं करेगी.
2. नारी शक्ति वंदन अधिनियम का महत्व
पीएम मोदी ने बताया कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम केवल एक कानून नहीं था, बल्कि यह पिछले 40 साल से लटके हुए महिलाओं के हक को दिलाने का एक पवित्र प्रयास था. यह संशोधन 21वीं सदी की भारतीय नारी को नई उड़ान देने और उनके रास्ते की हर बाधा को हटाने के लिए लाया गया था. सरकार का लक्ष्य था कि 2029 के लोकसभा चुनाव तक महिलाओं को उनका पूरा अधिकार मिले ताकि वे भारत की विकास यात्रा में बराबर की हिस्सेदार बन सकें. यह बदलाव उत्तर से लेकर दक्षिण तक हर राज्य की महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए अनिवार्य था, लेकिन विपक्षी दलों ने तकनीकी पेचों और झूठ का सहारा लेकर इसे रोकने की कोशिश की.
3. परिवारवाद और अंग्रेजों की नीति का आरोप
प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर हमला तेज करते हुए कहा कि यह पार्टी आज भी अंग्रेजों की 'बांटो और राज करो' की नीति पर चल रही है. उन्होंने कहा कि विपक्ष ने परिसीमन को लेकर भ्रम फैलाया और राज्यों के बीच दरार पैदा करने की कोशिश की. मोदी ने दावा किया कि इन परिवारवादी पार्टियों को असल में डर है कि अगर सामान्य परिवारों की महिलाएं सशक्त होकर राजनीति में आ गईं, तो उनका खानदानी नेतृत्व खतरे में पड़ जाएगा. वे चाहते हैं कि सत्ता केवल उनके ही परिवारों तक सीमित रहे. यही कारण है कि वे हर उस सुधार का विरोध करते हैं जो आम नागरिक को ताकतवर बनाता है.
4. सुधारों के प्रति कांग्रेस का पुराना रवैया
अपने भाषण के अंत में पीएम मोदी ने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस हमेशा से ही सुधार विरोधी रही है. उन्होंने याद दिलाया कि कैसे पूर्व में जनधन योजना, आधार, डिजिटल इंडिया और ट्रिपल तलाक जैसे कानूनों का भी इन्हीं लोगों ने विरोध किया था. कांग्रेस की कार्यशैली हमेशा से 'लटकाना, अटकाना और भटकाना' रही है, जिसकी वजह से भारत विकास की दौड़ में पीछे रहा.
5. पीएम ने लिया संकल्प
मोदी ने संकल्प लिया कि भले ही आज इस राह में बाधा आई है, लेकिन वह हार नहीं मानेंगे. उन्होंने विश्वास जताया कि देश की नारी शक्ति अब जाग चुकी है और वह अपने अधिकारों को रोकने वालों को कड़ा सबक जरूर सिखाएगी.
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पाकिस्तान की अफगान निर्वासन नीति पर वैश्विक आलोचना तेज: रिपोर्ट
लंदन, 18 अप्रैल (आईएएनएस)। पाकिस्तान की ‘इलीगल फॉरेनर्स रिपैट्रिएशन प्लान’ (आईएफआरपी) को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना तेज हो गई है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि यह नीति बड़े पैमाने पर जबरन निर्वासन का उदाहरण बन गई है, जिसमें राजनीतिक हितों को मानव जीवन से ऊपर रखा गया है।
यूके आधारित अखबार एशियन लाइट की रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर 2023 में शुरू हुई इस योजना के तहत 2026 की शुरुआत तक 20 लाख से अधिक अफगान शरणार्थियों को पाकिस्तान से वापस भेजा जा चुका है। इनमें कई ऐसे लोग भी शामिल हैं जिनके पास वैध दस्तावेज थे।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस अभियान के दौरान मनमानी गिरफ्तारियां, वसूली और दबाव डालकर लोगों को देश छोड़ने के लिए मजबूर करने जैसे कई आरोप सामने आए हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और संयुक्त राष्ट्र ने इस नीति को अपारदर्शी और भेदभावपूर्ण बताते हुए इसकी आलोचना की है।
रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी 2026 तक किए गए एक साल के आकलन में सामने आया कि 10 लाख से अधिक अफगानों को वापस भेजा गया, जबकि उनके पास बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी थी।
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी आईएफआरपी की कड़ी निंदा करते हुए इसे “अवैध और अमानवीय” बताया है। मार्च 2025 में संगठन ने इस योजना को वापस लेने की मांग की थी और कहा था कि यह नीति अफगानों को “अपराधी और आतंकवादी” के रूप में पेश करती है, जबकि वे शरणार्थी हैं और अफगानिस्तान में तालिबान शासन के तहत गंभीर खतरे का सामना कर सकते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह नीति ‘नॉन-रिफाउलमेंट’ के सिद्धांत का उल्लंघन करती है, जिसके तहत किसी भी शरणार्थी को ऐसे स्थान पर वापस नहीं भेजा जा सकता जहां उसे उत्पीड़न, हिंसा या यातना का खतरा हो। यह 1951 शरणार्थी कन्वेंशन और अंतरराष्ट्रीय नागरिक एवं राजनीतिक अधिकारों के समझौते का भी उल्लंघन है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि पाकिस्तान में कई अफगान शरणार्थियों ने पुलिस द्वारा वसूली, मारपीट और रात के समय छापेमारी के दौरान मनमानी गिरफ्तारियों के आरोप लगाए हैं। कई परिवारों को हिरासत से बचने के लिए रिश्वत तक देनी पड़ी।
अप्रैल 2025 से शुरू हुए दूसरे चरण में 2,30,500 अफगान लौटे, जिनमें 42,800 लोगों को निर्वासित किया गया। इनमें 70 प्रतिशत बिना दस्तावेज वाले, 19 प्रतिशत अफगान सिटीजन कार्ड धारक और 11 प्रतिशत प्रूफ ऑफ रजिस्ट्रेशन कार्ड धारक थे।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस संकट का सबसे ज्यादा असर महिलाओं और बच्चों पर पड़ा है, जिन्हें परिवार से अलग होना पड़ा, लौटने पर रहने की जगह नहीं मिली और तालिबान के प्रतिशोध का भी खतरा बना हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस मुद्दे पर चिंता तो जताई है, लेकिन ठोस कार्रवाई सीमित रही है। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (यूएनएचसीआर) ने सीमा पर निगरानी और राहत कार्य बढ़ाए हैं तथा पाकिस्तान से जबरन निर्वासन रोकने और करीब 14 लाख शरणार्थियों के पंजीकरण को नवीनीकृत करने की अपील की है।
--आईएएनएस
डीएससी
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