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West Bengal की सियासत से दूर, Muslim Couple की 'Patachitra Art' बनी गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसाल

पश्चिम बंगाल में चल रही राजनीतिक गहमागहमी की परवाह किए बिना—जहाँ ध्रुवीकरण, जनसांख्यिकीय बदलाव, घुसपैठ और धर्म जैसे मुद्दे छाए हुए हैं—राज्य के पूर्वी मेदिनीपुर ज़िले का एक मुस्लिम जोड़ा सदियों पुरानी कला 'पटाचित्र' को सहेजने में जुटा है। यह कला चित्रकारी और गीतों की एक अनोखी शैली के माध्यम से कृष्ण लीला, रामायण की घटनाओं और सामाजिक मुद्दों को बयां करती है। यह कहते हुए कि इंसानियत धर्म से ऊपर है, राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित कल्पना चित्रकार और उनके पति, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता नूरदीन चित्रकार, 'अनेकता में एकता' का एक बेहतरीन उदाहरण पेश करते हैं। इसके अलावा, यह जोड़ा हिंदू पौराणिक कथाओं पर आधारित चित्रों को प्रदर्शित करते समय, पूरी श्रद्धा के साथ कृष्ण लीला, रामायण की घटनाओं और देवी दुर्गा से जुड़े गीत भी गाता है।
खास बात यह है कि इन कलाकारों द्वारा गाए जाने वाले गीत को 'पाटेर गान' के नाम से जाना जाता है—यह एक पारंपरिक लोकगीत है जिसे कलाकार पटाचित्र प्रदर्शित करते समय गाते हैं।

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नूरदीन ने कहा हम कलाकार हैं, और एक कलाकार का कोई धर्म नहीं होता। एक इंसान के तौर पर, व्यक्ति को इंसानियत के लिए काम करना चाहिए। हमें एकता के साथ काम करना चाहिए। किसी भी व्यक्ति का पहला धर्म इंसानियत के लिए काम करना है।" उन्होंने आगे कहा कि वह चाहते हैं कि भारत में हर कोई खुशी और समृद्धि के साथ रहे।

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उन्होंने विस्तार से बताया कि उनके दादा, पिता और माँ भी इस कला का अभ्यास करते थे; इस कला में चित्रकारी के साथ-साथ कृष्ण लीला, रामायण, देवी दुर्गा और अन्य विषयों पर आधारित गीत भी शामिल होते हैं। नूरदीन ने आगे कहा, "इस कला के माध्यम से हम बाल विवाह, वृक्षारोपण, 'सुरक्षित ड्राइव-जीवन बचाएं', महिला सशक्तिकरण, सुनामी और अन्य सामाजिक मुद्दों के बारे में भी जागरूकता फैलाते हैं।

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Vanakkam Poorvottar: Tamil Nadu Elections में सभी दलों ने किये बढ़-चढ़कर लुभावने वादे, Welfare को लेकर हो रहा है Warfare?

तमिलनाडु की राजनीति इस समय बेहद रोचक मोड़ पर खड़ी है, जहां एक ओर परंपरागत द्रविड दलों की मजबूत पकड़ है, वहीं दूसरी ओर नए दल और चेहरे इस समीकरण को बदलने की कोशिश में जुटे हैं। चेन्नई के कोलाथुर विधानसभा क्षेत्र में यह टकराव सबसे ज्यादा स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, जहां मुख्यमंत्री एमके स्टालिन चौथी बार जीत हासिल करने के लक्ष्य के साथ मैदान में हैं। उनके सामने अन्नाद्रमुक के आर. संथानकृष्णन और नवगठित दल टीवीके के वीएस बाबू कड़ी चुनौती पेश कर रहे हैं।

कोलाथुर सीट को स्टालिन का गढ़ माना जाता है। उन्होंने वर्ष 2011, 2016 और 2021 के चुनावों में यहां से जीत दर्ज की थी। इस बार भी उन्होंने अपनी जीत को लेकर पूरा भरोसा जताया है। हालांकि इस बार मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है, जिससे चुनाव और दिलचस्प बन गया है। हम आपको बता दें कि संथानकृष्णन और वीएस बाबू दोनों ही चुनावी राजनीति में नए नहीं हैं। बाबू पहले अन्नाद्रमुक से जुड़े रहे हैं और अब अभिनेता विजय के दल तमिलगा वेत्रि कझगम के संयुक्त महासचिव हैं। वहीं संथानकृष्णन चेन्नई निगम के पूर्व पार्षद रह चुके हैं। दोनों उम्मीदवार लगातार क्षेत्र में प्रचार कर रहे हैं और स्थानीय मुद्दों को उठाकर मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।

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वहीं स्टालिन ने कोलाथुर को एक आदर्श क्षेत्र बनाने के उद्देश्य से कई योजनाएं लागू की हैं। इनमें आधारभूत ढांचा, शिक्षा और कल्याण योजनाएं प्रमुख हैं। उन्होंने गौतमपुरम में 840 आवासीय इकाइयों का निर्माण कराया, जिसकी लागत 111 करोड़ से अधिक रही। इसके अलावा सीवेज पंपिंग स्टेशनों में आधुनिक तकनीक आधारित निगरानी और दुर्गंध नियंत्रण प्रणाली लागू की गई, जिससे स्वच्छता में सुधार हुआ है।

उनकी एक महत्वपूर्ण पहल मुख्यमंत्री पडैप्पगम है, जो देश का पहला सरकारी सहकार्य कार्यस्थल माना जाता है। यहां कम शुल्क पर काम करने की सुविधा दी जाती है। छात्रों के लिए पुस्तकालय, तेज गति का इंटरनेट और वातानुकूलित वातावरण जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। यह पहल अन्य क्षेत्रों में भी लागू की गई है।

स्टालिन का चुनाव प्रचार भी अलग अंदाज में देखने को मिल रहा है। वह रोड शो के साथ-साथ आम लोगों के बीच चाय पीते हुए, सुबह की सैर के दौरान बातचीत करते हुए और मेट्रो में सफर कर यात्रियों से संवाद करते हुए नजर आते हैं। इससे उनका जनसंपर्क मजबूत हुआ है।

हालांकि विपक्षी उम्मीदवारों का कहना है कि क्षेत्र में अभी भी बेरोजगारी जैसी समस्याएं मौजूद हैं। वीएस बाबू का आरोप है कि कोलाथुर भले ही चर्चित क्षेत्र हो, लेकिन यहां अपेक्षित विकास नहीं हुआ है। हम आपको बता दें कि इस सीट पर कुल पैंतीस उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें नाम तमिलर कच्चि के सौंदरा पांडियन भी शामिल हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला तीन प्रमुख चेहरों के बीच ही माना जा रहा है। यहां कुल मतदाता संख्या दो लाख सात हजार से अधिक है। मतदान 23 अप्रैल को होगा और परिणाम चार मई को घोषित किए जाएंगे।

देखा जाये तो कोलाथुर की यह लड़ाई केवल स्थानीय स्तर की नहीं है, बल्कि पूरे तमिलनाडु की राजनीति के बदलते स्वरूप को भी दर्शाती है। राज्य में चुनावी राजनीति का केंद्र अब वैचारिक बहस से हटकर कल्याण योजनाओं और प्रत्यक्ष लाभ पर आ गया है।

यदि हम इतिहास पर नजर डालें तो प्रारंभिक चुनावों में आर्थिक नीतियां और सिद्धांत प्रमुख मुद्दे हुआ करते थे। लेकिन 1960 के दशक में चावल की कमी ने राजनीति की दिशा बदल दी। भोजन और जीवनयापन के मुद्दे चुनाव का केंद्र बन गए। इसी दौर में द्रविड आंदोलन ने पहचान और भाषा को भी महत्वपूर्ण मुद्दा बनाया।

इसके बाद कल्याणकारी योजनाओं का दायरा लगातार बढ़ता गया। मुफ्त चश्मा, मोतियाबिंद ऑपरेशन, सस्ती दरों पर चावल और मध्यान्ह भोजन योजना जैसी पहलों ने राज्य में सामाजिक सुरक्षा को मजबूत किया। इन योजनाओं ने जनता में यह धारणा बनाई कि सरकार उनकी रोजमर्रा की जरूरतों की जिम्मेदारी उठाएगी।

समय के साथ यह राजनीति उपभोक्तावादी रूप लेने लगी। 2006 में मुफ्त रंगीन टीवी देने का वादा एक बड़ा बदलाव साबित हुआ। इसके बाद मिक्सर, ग्राइंडर, पंखा, साइकिल और अन्य घरेलू उपकरण चुनावी वादों का हिस्सा बन गए। महिलाओं को विशेष रूप से लक्षित योजनाओं ने चुनावी समीकरणों को प्रभावित किया।

2021 के बाद नकद सहायता की प्रवृत्ति और तेज हो गई। महिलाओं को मासिक आर्थिक सहायता और मुफ्त बस यात्रा जैसी योजनाएं शुरू हुईं। अब यह मॉडल देश के अन्य राज्यों में भी अपनाया जा रहा है। वर्तमान चुनाव में भी यही प्रवृत्ति साफ नजर आती है। विभिन्न दल मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए नए नए वादे कर रहे हैं। किसी ने आठ हजार रुपये के घरेलू कूपन का वादा किया है, तो कोई रेफ्रिजरेटर और ईंधन सहायता देने की बात कर रहा है। वहीं टीवीके ने विवाह के समय सोना देने जैसी बड़ी घोषणा की है।

इन वादों का आर्थिक प्रभाव भी चर्चा का विषय बना हुआ है। अनुमान है कि विभिन्न दलों की योजनाएं राज्य के खजाने पर भारी बोझ डाल सकती हैं। इससे आने वाले वर्षों में राज्य का कर्ज काफी बढ़ने की आशंका है। इसके बावजूद तमिलनाडु की राजनीति में एक बात स्पष्ट है कि यदि कोई दल मतदाताओं के जीवन में ठोस बदलाव लाने का वादा नहीं करता, तो उसके लिए चुनावी दौड़ में बने रहना कठिन हो जाता है।

बहरहाल, यह चुनाव केवल जीत हार का नहीं, बल्कि इस बात का भी संकेत होगा कि तमिलनाडु की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी। देखना होगा कि तमिलनाडु की राजनीति क्या कल्याणकारी योजनाओं के विस्तार पर केंद्रित रहेगी या नए मुद्दे उभरेंगे। फिलहाल तो सभी दल मतदाताओं को लुभाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं और चुनावी माहौल अपने चरम पर पहुंच चुका है।

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  Sports

T20 World Cup के लिए Team India का 'मास्टरप्लान', South Africa सीरीज में होगा बड़ा एक्सपेरिमेंट

आने वाले बड़े टूर्नामेंट से पहले भारतीय महिला क्रिकेट टीम अब पूरी तरह तैयारी के मोड में नजर आ रही है। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ होने वाली आगामी श्रृंखला को टीम सिर्फ एक सामान्य मुकाबला नहीं बल्कि बड़े लक्ष्य की तैयारी के तौर पर देख रही है।

बता दें कि महिला टी20 विश्व कप नजदीक है और ऐसे में यह श्रृंखला दोनों टीमों के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। मौजूद जानकारी के अनुसार, इस मुकाबले में टीम संयोजन, खिलाड़ियों की फॉर्म और बेंच स्ट्रेंथ पर खास ध्यान दिया जाएगा।

भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर ने टीम के आत्मविश्वास को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि एकदिवसीय विश्व कप में मिली ऐतिहासिक जीत के बाद टीम का मनोबल काफी ऊंचा है और लगातार अच्छी क्रिकेट खेलने का प्रयास जारी है।

गौरतलब है कि भारत ने हाल ही में दक्षिण अफ्रीका को हराकर अपना पहला महिला एकदिवसीय विश्व कप खिताब जीता था, जिससे टीम को नई ऊर्जा मिली है। इसके बाद टीम ने अन्य श्रृंखलाओं में भी अच्छा प्रदर्शन किया, जिससे खिलाड़ियों का आत्मविश्वास और मजबूत हुआ है।

हरमनप्रीत ने साफ तौर पर कहा कि यह श्रृंखला टीम के लिए काफी महत्वपूर्ण है और खिलाड़ी इसे पूरी गंभीरता से ले रहे हैं। उनका मानना है कि विश्व कप से पहले हर खिलाड़ी को मौका देना जरूरी है, ताकि अंतिम टीम पूरी तरह तैयार हो सके।

मौजूद जानकारी के अनुसार, इस श्रृंखला में पांच मुकाबले खेले जाएंगे और टीम प्रबंधन का फोकस सिर्फ जीत पर नहीं बल्कि सही संतुलन बनाने पर भी रहेगा। कप्तान ने यह भी कहा कि खेल में हार-जीत चलती रहती है, लेकिन सबसे जरूरी है आने वाले बड़े टूर्नामेंट के लिए सही दिशा में तैयारी करना।
Thu, 16 Apr 2026 22:40:48 +0530

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