कांग्रेस विधायक रमेश चेन्निथला ने गुरुवार को केरल में नेतृत्व को लेकर चल रहे विवाद को खत्म करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों का फैसला चुनाव नतीजों के बाद पार्टी आलाकमान पर छोड़ देना चाहिए।
एएनआई से बात करते हुए उन्होंने कहा कि केरल के मुख्यमंत्री पद को लेकर किसी भी तरह के विवाद की कोई ज़रूरत नहीं है। 4 मई को वोटों की गिनती शुरू होगी। गिनती पूरी होने के बाद, अगर हमें बहुमत मिलता है, तो कांग्रेस आलाकमान ही इन सभी बातों का फैसला करेगा। उन्होंने आगे कहा कि पार्टी के अंदरूनी मामलों पर सार्वजनिक रूप से बहस नहीं होनी चाहिए। चेन्निथला ने कहा कि कांग्रेस पार्टी की हमेशा से यही परंपरा रही है। सोशल मीडिया पर बेवजह के विवाद और एक-दूसरे पर कीचड़ उछालने की कोई ज़रूरत नहीं है।
पार्टी कार्यकर्ताओं से एकता बनाए रखने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि मैं हमेशा इस तरह की गतिविधियों से दूर रहता हूँ, लेकिन मुझे लगता है कि हर कोई इसे रोक देगा और यही पार्टी तथा पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए बेहतर है। उन्होंने आगे कहा कि समर्थकों को अंदरूनी चर्चाओं से भ्रमित नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं और जिन लोगों ने कांग्रेस पार्टी को वोट दिया है, उन्हें किसी दुविधा में नहीं डाला जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि समर्थकों को अंदरूनी चर्चाओं से भ्रमित नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं और जिन लोगों ने कांग्रेस पार्टी को वोट दिया है, उन्हें किसी दुविधा में नहीं डाला जाना चाहिए। पार्टी नेतृत्व की भूमिका को दोहराते हुए उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि इन सभी मामलों पर फ़ैसला लेने का अंतिम अधिकार कांग्रेस हाई कमान के पास है।
एक हफ़्ता पहले, चेन्निथला ने 9 अप्रैल को संपन्न हुए केरल विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) की निर्णायक जीत पर भरोसा जताया था। उन्होंने कहा कि एलडीएफ का शासन अब खत्म होने वाला है और राज्य के मतदाता राजनीतिक बदलाव के लिए तैयार हैं। अलाप्पुझा में एएनआई से बात करते हुए चेन्निथला ने कहा कि हमें इस विधानसभा चुनाव में शानदार जीत की उम्मीद है। कांग्रेस के नेतृत्व वाला UDF बहुमत हासिल करने और केरल में अगली सरकार बनाने को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है। एलडीएफ का शासन अब खत्म होने वाला है और एक नए युग की शुरुआत होगी। केरल की जनता LDF से ऊब चुकी है और अब आगे बढ़ने के लिए तैयार है। नेतृत्व से जुड़े फ़ैसले कांग्रेस हाई कमान द्वारा लिए जाएँगे।
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महिला आरक्षण विधेयक पर लोकसभा में कहा कि हम सब भाग्यवान हैं कि ऐसे महत्वपूर्ण और देश की आधी आबादी को नीति निर्धारण प्रक्रिया में हिस्सेदार बनाने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक राजनीतिक स्वरूप के साथ देश की दशा और दिशा तय करने वाला है। मोदी ने कहा कि महिला आरक्षण को राजनीतिक रंग देने की जरूरत नहीं है; अतीत में जिन्होंने विरोध किया, महिलाओं ने उन्हें माफ नहीं किया।
मोदी ने कहा कि राष्ट्र के जीवन में कुछ महत्वपूर्ण पल आते हैं, और उस समय की समाज की मन स्थिति एवं नेतृत्व की क्षमता उस पल को कैप्चर कर एक राष्ट्र की अमानत बना देती हैं, एक मजबूत धरोहर तैयार करती हैं। भारत के संसदीय इतिहास में ये वैसा ही पल है। आवश्यकता तो ये थी कि 25—30 साल पहले, जब ये विचार सामने आया तभी इसे लागू कर देते। आज हम इसे काफी परिपक्वता तक पहुंचा देते। आवश्यकतानुसार उसमें समय समय पर सुधार होते और यही तो लोकतंत्र की खूबसूरती होती है। उन्होंने कहा कि हम सभी सांसद इस महत्वपूर्ण अवसर को जाने न दें। हम भारतीय मिलकर देश को नई दिशा देने जा रहे हैं। हमारी शासन व्यवस्था को एक संवेदनशीलता से भरने का एक सार्थक प्रयास करने जा रहे हैं। मुझे विश्वास है कि इस मंथन से जो अमृत निकलेगा, वह देश की राजनीति के रूप-स्वरूप को तय करने के साथ देश की दिशा और दशा भी तय करेगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं मानता हूं कि विकसित भारत का मतलब, सिर्फ उत्तम प्रकार की रेल, कुछ इंफ्रास्ट्रक्चर, रास्ते या कुछ आर्थिक प्रगति के आंकड़े... सिर्फ इतने से विकसित भारत की सीमित कल्पना वाले हम नहीं हैं। हम चाहते हैं कि विकसित भारत के नीति निर्धारण में सबका साथ—सबका विकास का मंत्र समाहित हो। देश की 50 प्रतिशत जनसंख्या देश की नीति निर्धारण का हिस्सा बने, ये समय की मांग है। हम पहले ही देरी कर चुके हैं, कारण कुछ भी हो, जिम्मेदार कोई भी हो। इसे हमें स्वीकार करना होगा। उन्होंने कहा कि हमारे देश में जब से महिला आरक्षण को लेकर चर्चा हुई और उसके बाद जब-जब चुनाव आया है, महिलाओं को मिलने वाले इस अधिकार का जिस-जिसने विरोध किया है, महिलाओं ने उसे माफ नहीं किया है। 2024 के चुनाव में ऐसा नहीं हुआ, ऐसा इसलिए नहीं हुआ क्योंकि तब सबने सर्वसम्मति से इसे पारित किया तो यह विषय ही नहीं रहा।
मोदी ने कहा कि अगर हम सब साथ आ जाते हैं, तो इतिहास गवाह है, ये किसी एक के राजनीतिक पक्ष में नहीं जाएगा। ये देश के लोकतंत्र के पक्ष में जाएगा, देश की सामूहिक निर्णय शक्ति के पक्ष में जाएगा और हम सब उस यश के हकदार होंगे। न ट्रेजरी बैंक उसका हकदार होगा और न ही मोदी उसका हकदार होगा। इसलिए जिन किसी को भी इससे राजनीति की बू आ रही है, वो पिछले 30 साल के खुद के परिणामों को देख लें। फायदा उनका भी इसी में है। जो नुकसान हो रहा है उससे बच जाआगे। इसलिए इसे राजनीतिक रंग देने की जरूरत नहीं है।
उन्होंने कहा कि आज से 25—30 साल पहले, जिन्होंने महिला आरक्षण का विरोध किया वो विरोध राजनीतिक सतह से नीचे नहीं गया था। आज ऐसा समझने की गलती मत करना। पिछले 25—30 साल में ग्रास रूट लेवल पर पंचायती चुनाव व्यवस्थाओं में जीत कर आईं बहनों में एक पॉलिटिकल कॉन्शियसनेस है। पहले वो शांत रहती थीं, समझती थीं लेकिन बोलती नहीं थीं। आज वो वोकल हैं। इसलिए आज जो भी पक्ष विपक्ष होगा, वो लाखों बहनें जो पंचायत में प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं, लोगों के सुख-दुख को गहराई से देखा है, वो आंदोलित हैं। वो कहती हैं कि झाड़ू कचरा वाले काम में तो हमें जोड़ देते हो, अब हमें निर्णय प्रक्रिया में जोड़ों और निर्णय प्रक्रियाएं विधानसभा और लोकसभा में होती हैं। इसलिए राजनीतिक जीवन में जो लोग प्रगति चाहते हैं, उनको ये मानकर चलना पड़ेगा कि पिछले 25—30 साल में ग्रास रूट लेवल पर लीडर बन चुकी हैं। वो सिर्फ यहां नहीं, वहां भी आपके फैसलों को प्रभावित करने वाली हैं। जो आज विरोध करेंगे, उन्हें लंबे समय तक कीमत चुकानी पड़ेगी।
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