केंद्र सरकार ने विपक्ष के कड़े विरोध के बीच लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन से संबंधित तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए हैं। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संविधान संशोधन और परिसीमन विधेयक पेश किया, जबकि गृह मंत्री अमित शाह ने केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़ा संशोधन विधेयक पेश किया। संविधान संशोधन विधेयक को पेश करने के पक्ष में 251 वोट पड़े, जबकि 185 सदस्यों ने इसके खिलाफ मतदान किया। सरकार का कहना है कि महिला आरक्षण को सही तरीके से लागू करने के लिए ये तीनों विधेयक एक साथ लाना जरूरी है।
विपक्ष की आपत्तियां और आरोप
कांग्रेस, सपा और द्रमुक समेत कई विपक्षी दलों ने इन विधेयकों को 'असंवैधानिक' बताया है। कांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपाल ने सवाल उठाया कि जब 2023 में ही महिला आरक्षण बिल पास हो गया था, तो उसे तभी लागू क्यों नहीं किया गया? उन्होंने सरकार पर 2029 के चुनावों से डरने का आरोप लगाया। वहीं, अखिलेश यादव और अन्य नेताओं ने कहा कि जनगणना के बिना परिसीमन करना संविधान की भावना के खिलाफ है। विपक्षी नेताओं का मानना है कि इन बदलावों से देश के संघीय ढांचे को नुकसान पहुँच सकता है।
सरकार का पक्ष और चर्चा की तैयारी
विपक्ष के हमलों का जवाब देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि अभी केवल तकनीकी आधार पर बात होनी चाहिए, विधेयकों की अच्छाइयों या बुराइयों पर चर्चा बाद में की जाएगी। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से अनुरोध किया कि चर्चा के दौरान विपक्ष को बोलने का पूरा मौका दिया जाए, ताकि सरकार भी मजबूती से अपना पक्ष रख सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये तीनों विधेयक एक-दूसरे से जुड़े हैं। दूसरी ओर, असदुद्दीन ओवैसी जैसे नेताओं ने चिंता जताई कि इससे दक्षिण भारतीय राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो सकता है और हिंदी भाषी क्षेत्रों का दबदबा बढ़ जाएगा।
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असदुद्दीन ओवैसी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के कार्यान्वयन से जुड़े प्रस्तावित संवैधानिक संशोधनों को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि इससे भारत की संघीय संरचना कमजोर हो सकती है। लोकसभा के विशेष सत्र में बोलते हुए एआईएमआईएम प्रमुख ने कहा कि ये विधेयक देश के संघीय ढांचे को नष्ट कर देंगे। मैं इन विधेयकों के प्रस्तुत किए जाने का कड़ा विरोध करता हूं। उन्होंने साहिर लुधियानवी का एक शेर भी उद्धृत किया, जिसमें उन्होंने कहा, "एक शहंशाह ने बनवा कर हसीन ताजमहल, हम गरीबों की मोहब्बत का उड़ाया है मजाक।"
संसद के विस्तारित बजट सत्र का तीन दिवसीय विशेष सत्र 2023 में पारित कानून को लागू करने के उद्देश्य से तीन संशोधन विधेयकों पर चर्चा के साथ शुरू हुआ, जो लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण प्रदान करता है। इस सप्ताह के आरंभ में, केंद्र ने संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 का मसौदा प्रसारित किया, जिसमें महिला आरक्षण ढांचे में बदलाव प्रस्तावित हैं। इस विधेयक के तहत लोकसभा की संख्या बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान है, जिसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।
इस प्रस्ताव के तहत, राज्यों के निर्वाचन क्षेत्रों से अधिकतम 815 सदस्य सीधे निर्वाचित होंगे, जबकि केंद्र शासित प्रदेशों से अधिकतम 35 सदस्य ही संसद द्वारा निर्धारित तरीके से चुने जाएंगे। सरकार ने बृहस्पतिवार को लोकसभा में विपक्ष के विरोध के बीच महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन और परिसीमन से संबंधित तीन विधेयकों को पेश किया। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’ और ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ पेश किए, वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’ पेश किया।
‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’ पेश करने के प्रस्ताव के पक्ष में 251 वोट और विरोध में 185 वोट पड़े। इससे पहले कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, द्रमुक और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने विधेयकों को ‘असंवैधानिक’ करार देते हुए इन्हें पेश करने के समय पर सवाल खड़े किए। कांग्रेस के के.सी. वेणुगोपाल ने तीनों विधेयकों को भारत के संघीय ढांचे पर हमला बताते हुए कहा कि वास्तव में विधेयक इस समय लाने का क्या मकसद है।
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