Explained: परिसीमन, कोटा और सीटों का फार्मूला... महिला आरक्षण पर टकराव के 5 प्वाइंट, आखिर क्या चाहता है विपक्ष
Women Reservation Nari Shakti Vandan Adhiniyam Amendment: महिला आरक्षण बिल
कमलनाथ ने महिला आरक्षण को लेकर केंद्र सरकार पर उठाए सवाल, कहा “नई जनगणना और निष्पक्ष परिसीमन के बाद लागू हो आरक्षण”
कमलनाथ ने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर केंद्र सरकार की योजना पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि अब यह बहस सिर्फ इस बात तक सीमित नहीं रह गई है कि आरक्षण कब लागू होगा, बल्कि यह अधिक महत्वपूर्ण हो गया है कि इसे किस आधार और किस तरीके से लागू किया जाएगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि महिलाओं को उनका अधिकार जरूर मिलना चाहिए, इसमें कोई दो राय नहीं। लेकिन यह अधिकार सही, अद्यतन और निष्पक्ष आंकड़ों के आधार पर मिलना चाहिए ताकि हर वर्ग की महिलाओं को वास्तविक न्याय मिल सके।
महिला आरक्षण के मुद्दे पर कमलनाथ ने किए सवाल
वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमलनाथ ने कहा है कि सरकार महिला सशक्तिकरण का ऐतिहासिक कदम दिखाने की कोशिश कर रही है, लेकिन इसके क्रियान्वयन के तरीके पर गंभीर आपत्तियां हैं। सबसे प्रमुख समस्या 2011 की जनगणना को आधार बनाने की है। उन्होंने कहा कि यह डेटा एक दशक से ज्यादा पुराना है और आज के भारत की वास्तविक जनसंख्या, सामाजिक संरचना तथा क्षेत्रीय बदलावों को सही ढंग से नहीं दर्शाता है। इन वर्षों में कई क्षेत्रों में जनसंख्या वृद्धि हुई है, सामाजिक समीकरण बदले हैं, ऐसे में पुराने आंकड़ों पर आरक्षण तय करना न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।
जनगणना के बाद आरक्षण लागू करने की मांग
उन्होंने जोर दिया कि अगर सरकार की मंशा वाकई निष्पक्ष है, तो उसे सबसे पहले नई जनगणना पूरी करानी चाहिए। देश के हर वर्ग, क्षेत्र और समुदाय की सही संख्या सामने लाकर उसी अनुपात में प्रतिनिधित्व तय करना चाहिए। यही लोकतंत्र का बुनियादी सिद्धांत है कि जिसकी जितनी भागीदारी, उतनी हिस्सेदारी होनी चाहिए।
मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने सवाल किया कि जब सरकार खुद आरक्षण को 2029 से लागू करने की बात कर रही है, तो फिर 2011 के पुराने आंकड़ों पर इतनी जल्दबाजी क्यों? क्या यह ऐसा ढांचा तैयार करने की कोशिश है जिसमें वास्तविक प्रतिनिधित्व की बजाय राजनीतिक लाभ को प्राथमिकता दी जाए? उन्होंने कहा कि परिसीमन और जनगणना दोनों अत्यंत संवेदनशील प्रक्रियाएं हैं। इन्हें पूर्ण पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ करना चाहिए। अगर इनमें संदेह की गुंजाइश बनी रही, तो इससे निकलने वाला आरक्षण भी विवादों में घिरा रहेगा।
राहुल गांधी का समर्थन किया
कमलनाथ ने राहुल गांधी द्वारा उठाए गए सवालों से पूरी तरह सहमति जताई और इस मुद्दे पर कांग्रेस की लड़ाई में उनके साथ खड़े होने की बात कही। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ राजनीतिक बहस नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी के अधिकारों का सवाल है..जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि पहले वर्तमान जनगणना पूरी कराई जाए, फिर निष्पक्ष परिसीमन किया जाए और उसके बाद महिला आरक्षण लागू किया जाए।
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