EV की बैटरी जल्दी खराब नहीं होगी! बस आज से फॉलो करें ये 5 आसान टिप्स
EV खरीदना जितना आसान है, उसकी बैटरी को लंबे समय तक स्वस्थ रखना उतना ही जरूरी है, क्योंकि यही सबसे महंगा पार्ट होता है. कई लोग रोजमर्रा की छोटी-छोटी गलतियों से बैटरी की उम्र कम कर देते हैं. अगर आप चाहते हैं कि आपकी EV की बैटरी 10-15 साल तक बेहतर परफॉर्म करे और लाखों रुपये के रिप्लेसमेंट खर्च से बचें, तो ये 5 जरूरी टिप्स जरूर जानिए.
हाथ में क्यों बांधा जाता है कलावा? जानें इसे बांधने का सही नियम और धार्मिक महत्व
Kalava bandhne ka mahatva: हिंदू धर्म में किसी भी पूजा-अनुष्ठान, हवन या मांगलिक कार्य की शुरुआत से पहले हाथ में कलावा यानी मौली बांधने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इसे रक्षा सूत्र भी कहा जाता है और मान्यता है कि यह धागा व्यक्ति की नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करता है और उसे संकल्प के प्रति सजग रखता है। यही कारण है कि पंडित जी किसी भी शुभ कार्य से पहले सबसे पहले यजमान के हाथ में कलावा बांधते हैं।
कलावा बांधने से जुड़ी पौराणिक मान्यता
धार्मिक कथाओं के अनुसार, कलावा बांधने की परंपरा का संबंध रक्षाबंधन और असुरों पर देवताओं की विजय से भी जोड़ा जाता है। एक कथा के अनुसार, जब देवराज इंद्र असुरों से युद्ध करने जा रहे थे, तब इंद्राणी ने उनकी विजय और सुरक्षा की कामना से उनकी कलाई पर एक पवित्र धागा बांधा था। मान्यता है कि इसी परंपरा से आगे चलकर कलावा बांधने की रीति की शुरुआत हुई, जो आज भी हर शुभ कार्य में निभाई जाती है।
इसके अलावा यह भी माना जाता है कि कलावा बांधते समय व्यक्ति के मन में जो भी संकल्प होता है, वह इस धागे के माध्यम से मजबूत होता है और कार्य में सफलता मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
किस हाथ में बांधना चाहिए कलावा?
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, कलावा बांधने को लेकर भी एक निश्चित नियम बताया गया है। मान्यता है कि विवाहित पुरुषों और अविवाहित लड़के-लड़कियों को दाहिने हाथ में कलावा बांधना चाहिए, जबकि विवाहित महिलाओं को बाएं हाथ में कलावा बांधने की परंपरा है। इसके पीछे यह मान्यता है कि दायां हाथ कर्म और शक्ति का प्रतीक माना जाता है, जबकि बायां हाथ भावनाओं और घर-परिवार की सुरक्षा से जुड़ा माना जाता है।
कलावा बांधते समय रखें इन बातों का ध्यान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलावा बांधते समय व्यक्ति को मुट्ठी बंद रखनी चाहिए और दूसरा हाथ सिर पर रखना चाहिए, साथ ही मन में भगवान का ध्यान करना भी शुभ माना जाता है। इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि कलावा बांधने से पहले इसे कम से कम तीन या पांच बार हाथ में लपेटना चाहिए, क्योंकि इसे शुभ संख्या माना जाता है।
एक अन्य मान्यता के अनुसार, पुराना कलावा जब खराब या मैला हो जाए, तो उसे कहीं भी फेंकने के बजाय किसी पवित्र नदी में प्रवाहित करना चाहिए या पीपल के पेड़ के नीचे रख देना चाहिए।
आधुनिक जीवन में भी बरकरार है यह परंपरा
समय के साथ भले ही जीवनशैली में कई बदलाव आए हों, लेकिन कलावा बांधने की यह परंपरा आज भी हिंदू घरों में उतनी ही श्रद्धा से निभाई जाती है। चाहे घर में कोई छोटी पूजा हो या बड़ा धार्मिक अनुष्ठान, कलावा बांधे बिना कार्य की शुरुआत अधूरी मानी जाती है। यही वजह है कि आज भी यह परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती जा रही है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक ग्रंथों और लोक-परंपराओं पर आधारित है। Haribhoomi.com इनकी किसी भी तरह की सटीकता या तथ्य की पुष्टि नहीं करता है। इन्हें केवल सामान्य जानकारी के तौर पर प्रस्तुत किया जा रहा है। किसी भी उपाय, व्रत या धार्मिक कर्मकांड को अपनाने से पहले संबंधित विषय के विद्वान या पंडित से सलाह अवश्य लें।
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