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Aaj ka Vrishchik Rashifal: धैर्य और सटीक निर्णय से चमकेगा भाग्य, अचानक धन लाभ का योग

Aaj ka Vrishchik Rashifal 10 August 2026: 10 अगस्त 2026 का दिन वृश्चिक राशि के जातकों के लिए धैर्य, सटीक निर्णय और एक नई दिशा का शुभ संकेत लेकर आया है। ज्योतिषाचार्य रूपेश चौबे के अनुसार, टीम वर्क और सामूहिक प्रयास से कार्यक्षेत्र में सफलता मिलेगी, वहीं अचानक धन लाभ और बचत की नई योजनाएं बनेंगी।

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300Ft के फ्री-फॉल पर मचा बवाल, सच में नशे में थे एयर इंडिया के पायलट या एयर टर्बुलेंस ही बना प्‍लेन का विलेन?

Air India Phuket-Delhi flight: फुकेट के दिल्‍ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट एआई-2379 को सीवियर एयर टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा था. टर्बुलेंस के दौरान, प्‍लेन की ऊंचाई में करीब 300 फीट का फ्री फॉल हुआ था. इस घटना में प्‍लेन में सवार 13 पैसेंजर और 4 क्रू मेंबर चुटहिल हुए थे. अब इस घटना को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे है. साथ ही, पायलट्स के नशे में होने को लेकर अलग अलग तरह की चर्चाएं हो रही हैं. ऐसे में असलियत क्‍या है, जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर.

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  Sports

Bumrah और Hardik Pandya की चोट पर बोले VVS Laxman, कहा- खिलाड़ी मशीन नहीं, COE और Team India के बीच है शानदार तालमेल

भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) का पुरजोर तरीके से बचाव करते हुए इसके प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण ने रविवार को कहा कि खिलाड़ियों की चोट से उबरने की धीमी प्रक्रिया के लिए केंद्र को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि क्रिकेटर कोई ‘मशीन’ नहीं हैं, जिनकी फिटनेस हर बार तय समयसीमा के भीतर लौट आए। लक्ष्मण ने यह भी स्पष्ट किया कि सीओई और टीम प्रबंधन के बीच बेहतरीन और निर्बाध समन्वय है।

फिलहाल तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह, हरफनमौला हर्षित राणा, हार्दिक पांड्या, वॉशिंगटन सुंदर और शीर्ष क्रम के बल्लेबाज बी. साई सुदर्शन अपनी-अपनी चोटों से उबरने के लिए सीओई में हैं। लक्ष्मण ने सीओई में चुनिंदा मीडिया से बातचीत में कहा, ‘‘सीओई सिर्फ चोट से उबरने और फिटनेस हासिल करने का केंद्र नहीं है। क्रिकेटरों को उत्कृष्टता हासिल करने में मदद करने के लिए इसकी भूमिका इससे कहीं बड़ी है। इसलिए हम चोटों के मामले में ‘दोष’ शब्द का इस्तेमाल करना पसंद नहीं करते। ऐसा करने पर किसी एक व्यक्ति को बलि का बकरा बनाया जाता है।”

उन्होंने कहा, ‘‘पुरुष और महिला, दोनों टीमों के सीओई, टीम प्रबंधन और ‘एसएसएम स्टाफ’ के बीच शानदार तालमेल है। इसलिए बिना रूकावट के संवाद लगातार होता रहता है।” लक्ष्मण ने कहा कि कड़े फिटनेस मानकों और मानव शरीर की प्रकृति को देखते हुए किसी खिलाड़ी का एक निश्चित समयसीमा में पूरी तरह फिट हो जाना हमेशा संभव नहीं होता। उन्होंने कहा, ‘‘यह समझना बहुत जरूरी है कि दिशानिर्देश और समयसीमा हमारी अपेक्षाओं के आधार पर तय की जाती हैं। लेकिन यह मानव शरीर है, मशीन नहीं कि हर बार तय समयसीमा के भीतर ही रिकवरी हो जाए।’’

उन्होंने बताया, ‘‘ खिलाड़ी की प्रगति की लगातार निगरानी की जाती है और उसके अनुसार प्रशिक्षण का भार बढ़ाया जाता है। चोट के उबरने से लेकर फिट घोषित होने और खिलाड़ी के सीओई छोड़ने तक यही प्रक्रिया जारी रहती है।’’ लक्ष्मण ने अपनी बात समझाने के लिए जसप्रीत बुमराह और साई सुदर्शन का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि चयनकर्ता सीओई से खिलाड़ियों की फिटनेस स्थिति की रिपोर्ट मांगते हैं।

इसके बाद रिपोर्ट चयन समिति के अध्यक्ष और दोनों टीमों के मुख्य कोच और बीसीसीआई को भेजी जाती है। उन्होंने कहा, ‘‘बुमराह और सुदर्शन के नाम के आगे हमेशा एक तारांकित निशान रहता है, जिसका अर्थ है ‘फिटनेस के अधीन’। इसलिए श्रीलंका के खिलाफ टीम के लिए उनका चयन फिटनेस क्लीयरेंस मिलने की शर्त पर होना था।’’ लक्ष्मण के मुताबिक, ‘‘सीओई में खिलाड़ियों का आकलन कर उन्हें एक चरण से दूसरे चरण में आगे बढ़ाया जाता है। उनकी प्रगति धीमी होती है तो चयन समिति के अध्यक्ष और मुख्य कोच को इसकी जानकारी दी जाती है।

उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया लगातार चलती रहती है और सभी संबंधित लोग समझते हैं कि खिलाड़ी अभी अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला में हिस्सा लेने के लिए तैयार नहीं है।’’ जब लक्ष्मण से पूछा गया कि बड़ी संख्या में खिलाड़ियों के लगातार चोटिल होने को लेकर क्या यह चिंता का विषय है, तो पूर्व भारतीय क्रिकेटर ने इसे ज्यादा तवज्जो नहीं दी। उन्होंने कहा कि चोट खेल करियर का हिस्सा है। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे नहीं लगता कि यह चिंता का कारण है। लेकिन जब कोई खिलाड़ी शीर्ष स्तर पर खेलता है तो उससे अपना सर्वश्रेष्ठ देने की उम्मीद होती है।

चोट किसी भी खिलाड़ी के करियर का हिस्सा है। अगर आप चोट से बचने के बारे में सोचते रहेंगे तो अपनी पूरी क्षमता के साथ नहीं खेल पाएंगे।’’ उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि खिलाड़ियों की चोट को देखने का नजरिया बदलना चाहिए। उनके अनुसार, चोट को हमेशा नकारात्मक चीज के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे खेल का स्वाभाविक हिस्सा समझना चाहिए। बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने भी श्रृंखला से पहले टीम चयन की प्रक्रिया को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि आम तौर पर टीम के रवाना होने से कम से कम तीन से चार सप्ताह पहले चयन बैठक होती है।

सैकिया ने कहा, ‘‘उस समय हमें खिलाड़ी की फिटनेस की वास्तविक स्थिति का पता नहीं होता। इसलिए उसके नाम के आगे ‘फिटनेस के अधीन’ का उल्लेख किया जाता है, क्योंकि वह खिलाड़ी उस समयचोट की उबरने की प्रक्रिया से जुड़े कार्यक्रम से गुजर रहा होता है।’’

उन्होंने कहा कि अगर खिलाड़ी 21 या 28 दिनों की उस अवधि में फिट हो जाता है, तो उसे टीम में शामिल किया जा सकता है। इसीलिए ऐसे खिलाड़ी को सीधे तौर पर चयन से बाहर नहीं किया जाता है। सैकिया के अनुसार, ‘‘टीम के यात्रा पर रवाना होने या मैच खेलने तक जरूरी फिटनेस हासिल करने के लिए खिलाड़ी के पास पर्याप्त समय रहता है। इस तरह अंतिम फैसला खिलाड़ी की वास्तविक फिटनेस स्थिति को ध्यान में रखकर किया जाता है।

Sun, 09 Aug 2026 17:50:33 +0530

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