RCB vs LSG: विराट कोहली को लगी चोट, क्या लखनऊ के खिलाफ खेल पाएंगे?
Virat kohli injury: आईपीएल 2026 में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और लखनऊ सुपर जायंट्स के बीच बुधवार को बड़ा मुकाबला खेला जाएगा लेकिन मैच से पहले चर्चा विराट कोहली की फिटनेस को लेकर है। कोहली के पैर में पट्टी बंधी नजर आई थी, उनके खेलने पर अभी भी सस्पेंस बना हुआ है। अगर वो नहीं खेलते हैं तो इससे आरसीबी की रणनीति प्रभावित हो सकती है।
कोहली को मुंबई इंडियंस के खिलाफ वानखेड़े में खेले गए मैच के दौरान एंकल इंजरी हुई थी। हालांकि अच्छी बात यह है कि वे बेंगलुरु पहुंच चुके हैं और नेट्स में अभ्यास भी किया है। बल्लेबाजी के दौरान उन्हें कोई खास दिक्कत नहीं दिखी लेकिन टीम मैनेजमेंट ने अभी तक उन्हें पूरी तरह फिट घोषित नहीं किया।
विराट की चोट ने बढ़ाई आरसीबी की चिंता
आरसीबी के लिए कोहली का खेलना बेहद अहम है, क्योंकि वे फिल सॉल्ट के साथ मिलकर टीम को मजबूत शुरुआत दे रहे। अगर वे नहीं खेलते हैं तो टीम संतुलन बिगड़ सकता है। ऐसे में विकल्प के तौर पर वेंकटेश अय्यर को ओपनिंग में आजमाया जा सकता है, जिन्होंने इस सीजन में एक ही मैच खेला है और 15 गेंद में 29 रन बनाए थे।
एलएसजी का प्रदर्शन मिला-जुला रहा
पॉइंट्स टेबल की बात करें तो RCB ने शानदार शुरुआत की है और अपने पहले चार में से तीन मैच जीतकर मजबूत स्थिति में है। वहीं ऋषभ पंत की कप्तानी वाली LSG का प्रदर्शन मिला-जुला रहा है। टीम ने चार में से दो मैच जीते हैं और फिलहाल टेबल के निचले हिस्से में बनी हुई है।
LSG के लिए सबसे बड़ी चुनौती चिन्नास्वामी स्टेडियम का रिकॉर्ड है। टीम यहां अब तक दोनों मुकाबले हार चुकी है। 2023 में वह करीब पहुंची थी, लेकिन जीत नहीं मिली, जबकि 2024 में 28 रन से हार का सामना करना पड़ा। वहीं RCB ने इस मैदान पर इस सीजन में सनराइजर्स हैदराबाद और चेन्नई सुपर किंग्स को हराकर दबदबा दिखाया है।
अगर लखनऊ को जीत दर्ज करनी है तो मोहम्मद शमी को नई गेंद से कमाल करना होगा। इस सीजन में उनका इकॉनमी 6.25 है और उन्होंने पावरप्ले में अच्छी गेंदबाजी की है। शुरुआती विकेट लेकर वे मैच का रुख बदल सकते हैं, लेकिन उन्हें दूसरे छोर से भी सहयोग चाहिए होगा।
हेड टू हेड में आरसीबी भारी
हेड-टू-हेड आंकड़ों में भी आरसीबी का पलड़ा भारी है। पिछले 6 मुकाबलों में से 4 में बेंगलुरु ने जीत दर्ज की है। अब देखना होगा कि कोहली की फिटनेस और LSG की गेंदबाजी इस मुकाबले का नतीजा किस ओर मोड़ती है।
बीजेपी में 'बाहरीयों'का दबदबा: देखिए उन नेताओं की लिस्ट जिन्होंने दल बदल कर पाया राजपाट! विचारधारा नहीं 'विनेबिलिटी' जरुरी
भारतीय राजनीति में बीजेपी को कभी अपनी विचारधारा के प्रति बेहद सख्त माना जाता था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के दौर में पार्टी ने 'राजनीतिक समावेश' की नई इबारत लिखी है। आज बीजेपी में कई ऐसे चेहरे शीर्ष पदों पर काबिज हैं, जिनका सियासी सफर कांग्रेस, आरजेडी या अन्य क्षेत्रीय दलों से शुरू हुआ था। सम्राट चौधरी से लेकर हिमंत बिस्वा सरमा तक, बीजेपी ने इन नेताओं की राजनीतिक क्षमता को पहचानते हुए उन्हें सीधे सत्ता के सिंहासन पर बैठाया है।
सम्राट चौधरी: बिहार के नए 'सम्राट'
बिहार की राजनीति में सम्राट चौधरी का उदय सबसे चौंकाने वाला रहा है। आरजेडी से अपना सफर शुरू करने वाले सम्राट चौधरी, राबड़ी देवी सरकार में मंत्री रहे और फिर जेडीयू के रास्ते 2017 में बीजेपी में शामिल हुए। बीजेपी ने उनके ओबीसी (OBC) चेहरे और आक्रामक राजनीति को देखते हुए उन्हें पहले प्रदेश अध्यक्ष बनाया और अब बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई है। वे बीजेपी के ऐसे पहले मुख्यमंत्री हैं जिनका बैकग्राउंड संघ या बीजेपी का नहीं है।
हिमंत बिस्वा सरमा: पूर्वोत्तर के चाणक्य
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा आज बीजेपी के सबसे कद्दावर नेताओं में शुमार हैं। 2015 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए सरमा, कभी तरुण गोगोई सरकार में कद्दावर मंत्री थे। बीजेपी ने उनकी सांगठनिक क्षमता को देखते हुए 2021 में उन्हें असम का मुख्यमंत्री बनाया और अब 2026 के चुनाव भी उन्हीं के चेहरे पर लड़ रही है।
पेमा खांडू: अरुणाचल प्रदेश में बीजेपी का बड़ा चेहरा
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने भी अपना सफर कांग्रेस से शुरू किया था। उनके पिता दोरजी खांडू भी कांग्रेस के सीएम रहे थे। 2016 में पेमा खांडू कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए और तब से लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री बनकर राज्य की कमान संभाल रहे हैं।
एन बीरेन सिंह: मणिपुर में बदला सियासी मिजाज
मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह का बैकग्राउंड भी गैर-बीजेपी रहा है। उन्होंने अपनी पारी 'डेमोक्रेटिक रिवोल्यूशनरी पीपल्स पार्टी' से शुरू की और फिर कांग्रेस में मंत्री रहे। 2016 में कांग्रेस छोड़ने के बाद बीजेपी ने उन्हें 2017 और फिर 2022 में मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपी।
डॉ. माणिक साहा: त्रिपुरा में कांग्रेस से सीएम तक
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा ने 2016 में कांग्रेस का दामन छोड़कर बीजेपी जॉइन की थी। पार्टी ने उनकी साफ-सुथरी छवि को देखते हुए पहले प्रदेश अध्यक्ष और फिर 2022 में मुख्यमंत्री बनाया। 2023 के चुनाव जीत कर वे दोबारा सत्ता के शिखर पर बैठे हैं।
अर्जुन मुंडा: झारखंड मुक्ति मोर्चा से बीजेपी की कमान
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा मूल रूप से 'झारखंड मुक्ति मोर्चा' (JMM) से थे। 2000 में झारखंड राज्य बनने के बाद वे बीजेपी में आए और 2003 में राज्य के सबसे युवा मुख्यमंत्री बने। पार्टी ने उन्हें कई बार राज्य की कमान सौंपी और केंद्र में भी अहम जिम्मेदारी दी।
ब्रजेश पाठक: यूपी के डिप्टी सीएम का कांग्रेस कनेक्शन
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी अपनी राजनीति की शुरुआत कांग्रेस और फिर बसपा से की थी। 2017 के चुनाव से ठीक पहले बीजेपी में आए पाठक ने अपनी कार्यशैली से पार्टी में जगह बनाई और आज वे यूपी के सबसे प्रभावशाली ब्राह्मण चेहरों में से एक हैं।
बासवराज बोम्मई: जनता दल (S) से कर्नाटक की कुर्सी
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बासवराज बोम्मई का परिवार जनता दल की राजनीति से जुड़ा था। 2008 में वे बीजेपी में शामिल हुए और बीएस येदियुरप्पा के हटने के बाद 2021 में बीजेपी ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाया।
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