ईरानी हुक्मरानों से ऐसी क्या डील मुनीर नेकर ली कि वाशिंगटन में बैठे आकर ट्रंप इतने खुश हो गए। यह दावा करने लगे कि ईरान परमाणु बम के लिए जरूरी संवर्धित यूरेनियम सौंपने के लिए तैयार हो गया। जिस यूरेनियम का पता ट्रंप की सेना और ट्रंप के एजेंट्स 40 दिनों की जंग में नहीं लगा पाए। नतांज से लेकर इसहान तक ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले करते गए। ट्रंप ने यहां तक दावा कर दिया कि ईरान की परमाणु क्षमता हमने खत्म कर दी है। अब वो 20 साल तक परमाणु बम बना नहीं सकता।
जिस डस्ट को ढूंढ नहीं पाए वो अब ईरान खुद सौंप देगा। ईरान के साथ पूरी जंग इसी यूरेनियम के लिए छिड़ी थी। एक वक्त ऐसा आया कि लगा ईरान को घुटनों पर लाने के लिए ट्रंप टारगेटेड एटम बम का इस्तेमाल करने वाले हैं। जंग के छठवें हफ्ते में ट्रंप ने मीडिया के सामने यह बयान दिया कि वह एक रात में ईरान की पूरी सभ्यता को खत्म कर देंगे। ट्रंप ने ऐसा किया तो नहीं लेकिन इस बयान के बाद ईरान और उग्र हो गया। ईरानी संसद में यह प्रस्ताव तक ला दिया गया कि उसे अब परमाणु अप्रसार संधि से हट जाना चाहिए और परमाणु बम के लिए जरूरी यूरेनियम का संवर्धन और तेज कर देना चाहिए। ईरान को यह ख्याल अपने 60% एनरच्ड 400 किलो यूरेनियम की वजह से आया। आपको बताते हैं इतने एनरड्ड यूरेनियम से ईरान क्या-क्या कर सकता है।
ईरान 400 किलो यूरेनियम 60% तक संवर्धित कर चुका है। यानी यूरेनियम में बम के लिए जरूरी U235 को 60% तक बढ़ा दिया गया है। प्राकृतिक रूप से यूरेनियम की चट्टानों में U35 तत्व 0.7% पाया जाता है। 60% एम्ब्रिज यूरेनियम का कोई ऊर्जा इस्तेमाल नहीं होता। इससे बॉम्ब ही बनता है। 60% संवर्धन के बाद यूरेनियम को बहुत कम समय में 90% किया जा सकता है। 400 किलो 90% संवर्धित यूरेनियम से ईरान कम से कम 10 परमाणु बम बना सकता है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर ट्रंप तो यह बात राष्ट्रपति बनने के बाद से ही कह रहे हैं। लेकिन अभी तक किसी ईरानी लीडर ने इस बात का संकेत नहीं दिया कि वो अपना एनरच्ड यूरेनियम अमेरिका को सौंप देंगे। रूस ने जरूर यह प्रस्ताव दिया था कि अगर ईरान चाहे तो उसका संवर्धित यूरेनियम अपनी सेफ कस्टडी में वह रखने को तैयार है।
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क्या अब 100 रुपए की छोटी सी खरीदारी भी बन सकती है बड़ी मुसीबत? क्या सीमा पार सामान लाना अब जेब पर भारी पड़ने वाला है? क्या इस नए फैसले से बदल जाएगी लाखों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी? दरअसल नेपाल सरकार ने हाल ही में भारत से होने वाली छोटी खरीदारी पर एक महत्वपूर्ण नीति लागू की है। जिसके तहत 100 रुपए से अधिक के सामान पर कस्टम ड्यूटी देना अनिवार्य कर दिया गया है। इस फैसले का उद्देश्य देश में घरेलू उत्पादों को बढ़ावा देना और राजस्व बढ़ाना बताया जा रहा है। लेकिन इसका असर खासतौर पर सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और छोटे व्यापारियों पर साफ दिखाई देने वाला है। भारत नेपाल सीमा के पास रहने वाले लोग लंबे समय से रोजमर्रा की जरूरतों के लिए एक दूसरे के बाजारों पर निर्भर रहे हैं। खासकर नेपाल के नागरिक अक्सर सस्ते और आसानी से उपलब्ध सामान के लिए भारतीय बाजारों का रुख करते हैं। दाल, चावल, तेल, नमक, चीनी, सब्जियां और दवाइयों जैसी जरूरी चीजें लोग भारत से खरीद कर अपने घरों का खर्च चलाते हैं। ऐसे में ₹100 से अधिक की खरीदारी पर कस्टम ड्यूटी लगाने का फैसला उनके दैनिक जीवन को सीधे प्रभावित कर सकता है। नई व्यवस्था के अनुसार इस तरह की खरीदारी पर 5% से लेकर 80% तक का कस्टम ड्यूटी लगाया जा सकता है। इसका मतलब है कि छोटी-छोटी खरीदारी भी अब महंगी पड़ सकती है।
खासतौर पर मजदूर दिहाड़ी पर काम करने वाले लोग और कम आय वाले परिवार जो रोज ₹200 से ₹300 तक का सामान खरीद कर अपना गुजारा करते हैं। इस नियम से सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। नेपाल सरकार के इस कदम के पीछे घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देने की मंशा बताई जा रही है। सरकार चाहती है कि लोग स्थानीय उत्पादों का इस्तेमाल करें जिससे देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले। इसके अलावा अवैध व्यापार और सीमा पार होने वाली अनियमित गतिविधियों को नियंत्रित करना भी इस नीति का एक उद्देश्य है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के फैसले का असर बड़े कारोबारियों से ज्यादा आम जनता और छोटे व्यापारियों पर ही पड़ता है। सीमावर्ती इलाकों में इस फैसले को लेकर चिंता का माहौल है। स्थानीय प्रशासन द्वारा लाउडस्कर के जरिए लोगों को नए नियमों की जानकारी दी जा रही है। जिससे लोगों में असमंजस और परेशानी बढ़ गई है। कई लोगों का कहना है कि यह फैसला गरीब तबके के लिए मुश्किलें खड़ी करेगी क्योंकि वे सस्ते विकल्पों पर ही निर्भर रहते हैं। इसके अलावा इस आदेश में किसी भी सरकारी संस्था या गैर सरकारी संगठन को कोई छूट नहीं दी जाएगी जिससे इसका दायरा और भी व्यापक हो गया है।
हालांकि अभी कई स्थानों पर अधिकारियों को उच्च स्तर की स्पष्ट निर्देश मिलने का इंतजार है। जिसके बाद नियमों को पूरी सख्ती से लागू किया जाएगा। सिर्फ सामान की खरीदारी ही नहीं बल्कि भारत से नेपाल जाने वाले वाहनों के लिए भी नियम सख्त कर दिए गए हैं। अब भारतीय नंबर प्लेट वाले वाहनों को नेपाल में प्रवेश करने के लिए कस्टम ड्यूटी देना अनिवार्य होगा। इसके तहत बाइक या स्कूटर के लिए प्रतिदिन ₹100, तीन पहिया वाहनों के लिए ₹400, कार और जीप या वैन के लिए ₹600 का शुल्क तय किया गया है। इसके साथ ही कोई भी विदेशी वाहन नेपाल में एक आर्थिक वर्ष के दौरान अधिकतम 30 दिनों तक ही चलाया जा सकता है। चाहे वह अवधि लगातार हो या अलग-अलग हिस्सों में हो। यदि कोई वाहन इस निर्धारित समय सीमा से अधिक समय तक नेपाल में रहता है तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। बाइक और स्कूटर के लिए भी यह जुर्माना ₹2000 प्रतिदिन और अन्य वाहनों के लिए ₹2500 प्रतिदिन तक हो सकता है।
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