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Modi सरकार का बड़ा फैसला, Lok Sabha में अब होंगी 850 सीटें, सांसदों को दिए गए नए बिलों के मसौदे

केंद्र सरकार ने लोकसभा का व्यापक विस्तार प्रस्तावित किया है, जिसके तहत सीटों की कुल संख्या 543 से बढ़ाकर 850 की जाएगी। सरकार ने सांसदों को विधेयक का मसौदा भी भेजा है। प्रस्ताव के अनुसार, 850 सीटों में से 815 सीटें राज्यों के लिए आरक्षित होंगी, जबकि 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए आरक्षित होंगी। संविधान में संशोधन की संभावित प्रक्रिया से पहले सरकार ने सांसदों के साथ विधेयक का मसौदा साझा किया है। इस कदम से संसदीय प्रतिनिधित्व में महत्वपूर्ण बदलाव आने की उम्मीद है, जो 2029 के आम चुनावों से प्रभावी होंगे।

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संसद का बजट सत्र बढ़ा दिया गया है और इस दौरान तीन दिन का विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा। इस सत्र में संसद की संख्या बढ़ाने से संबंधित प्रस्तावित संवैधानिक संशोधनों पर चर्चा और उन्हें पारित करने की संभावना है। संविधान लागू होने के बाद लोकसभा में 850 सदस्य हो जाएंगे, जो इसकी वर्तमान संख्या 543 से काफी अधिक है।

विपक्ष ने चिंता जताई

विपक्ष सरकार के परिसीमन प्रयासों, विशेष रूप से 2011 की जनगणना के आंकड़ों के उपयोग को चुनौती देने की तैयारी में है। आम आदमी पार्टी (AAP), आरजेडी और डीएमके सहित कई दलों का तर्क है कि परिसीमन 2021 की जनगणना के अद्यतन आंकड़ों पर आधारित होना चाहिए। सूत्रों के अनुसार, कई इंडिया ब्लॉक दल पिछड़े वर्गों की महिलाओं के लिए "कोटा के भीतर कोटा" की लंबे समय से चली आ रही मांग पर स्पष्टीकरण भी मांग सकते हैं। आप सहित विपक्षी नेताओं और सहयोगियों की एक रणनीति बैठक कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खर्गे के दिल्ली स्थित आवास पर निर्धारित है। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में सत्ता में काबिज टीएमसी और डीएमके के नेताओं के भी बैठक में शामिल होने की संभावना है।

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संख्या का खेल

तृणमूल से कांग्रेस सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने सरकार के इरादे पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रस्तावित संशोधन महिलाओं के आरक्षण को लागू करने के बजाय परिसीमन पर अधिक केंद्रित हैं। उन्होंने पूछा,संवैधानिक संशोधन विधेयकों पर 16 अप्रैल को चर्चा होनी है। विधेयक की प्रति कहां है?” उन्होंने राज्य चुनावों से कुछ सप्ताह पहले बुलाए गए सत्र के समय पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि भाजपा को संवैधानिक संशोधनों को पारित करने के लिए विपक्ष के समर्थन की आवश्यकता होगी, जिसके लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत आवश्यक है। विपक्षी दल अपनी मांगों को आगे बढ़ाने और सरकार से अधिक स्पष्टता प्राप्त करने के लिए इसी आवश्यकता पर भरोसा कर रहा है।
 

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अबू धाबी के क्राउन प्रिंस से मिले जिनपिंग, रखा- मध्य एशिया शांति के लिए चार सूत्रीय प्रस्ताव

बीजिंग, 14 अप्रैल (आईएएनएस)। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मिडिल ईस्ट में शांति और स्थिरता के लिए चार सूत्रीय प्रस्ताव रखा है। चीन के दौरे पर आए अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नहयान से बैठक के बाद प्रस्ताव रखा।

न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, शी जिनपिंग ने कहा कि क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के सिद्धांत का पालन जरूरी है। उन्होंने मिडिल ईस्ट और खाड़ी क्षेत्र के लिए साझा, व्यापक और टिकाऊ सुरक्षा ढांचा बनाने पर जोर दिया।

जिनपिंग ने एक-एक कर इन पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, प्रस्ताव का पहला सिद्धांत शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की प्रतिबद्ध से जुड़ा है। मध्य पूर्व के खाड़ी देश ऐसे निकट पड़ोसी हैं जिन्हें एक-दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता। खाड़ी देशों को अपने संबंधों को बेहतर बनाने में समर्थन देना, मध्य पूर्व और खाड़ी क्षेत्र के लिए एक साझा, व्यापक, सहकारी और टिकाऊ सुरक्षा ढांचा तैयार करने की दिशा में काम करना, और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की नींव को मजबूत करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने आगे कहा कि दूसरा, राष्ट्रीय संप्रभुता के सिद्धांत का पालन करना। संप्रभुता सभी देशों, विशेष रूप से विकासशील देशों के लिए, अस्तित्व और समृद्धि का आधार है, और इसका उल्लंघन नहीं किया जाना चाहिए।

तीसरे में जोर अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान पर दिया गया। शी जिनपिंग ने अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांत को भी अहम बताया। उन्होंने कहा कि ये इसलिए जरूरी है, ताकि दुनिया फिर से ताकत के बल पर चलने वाली व्यवस्था की ओर न लौटे और दुनिया को जंगल के कानून (अराजकता) की ओर लौटने से रोकना चाहिए।

चौथा, विकास और सुरक्षा के प्रति संतुलित दृष्टिकोण को अपनाना। सभी पक्षों को खाड़ी देशों के विकास के लिए एक स्वस्थ वातावरण बनाने और उसमें सकारात्मक ऊर्जा लाने की दिशा में काम करना चाहिए।

जिनपिंग का मत है कि सभी देशों की संप्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए। साथ ही हरेक देश के नागरिकों, संस्थानों और परिसरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है।

--आईएएनएस

केआर/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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