अबू धाबी के क्राउन प्रिंस से मिले जिनपिंग, रखा- मध्य एशिया शांति के लिए चार सूत्रीय प्रस्ताव
बीजिंग, 14 अप्रैल (आईएएनएस)। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मिडिल ईस्ट में शांति और स्थिरता के लिए चार सूत्रीय प्रस्ताव रखा है। चीन के दौरे पर आए अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नहयान से बैठक के बाद प्रस्ताव रखा।
न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, शी जिनपिंग ने कहा कि क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के सिद्धांत का पालन जरूरी है। उन्होंने मिडिल ईस्ट और खाड़ी क्षेत्र के लिए साझा, व्यापक और टिकाऊ सुरक्षा ढांचा बनाने पर जोर दिया।
जिनपिंग ने एक-एक कर इन पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, प्रस्ताव का पहला सिद्धांत शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की प्रतिबद्ध से जुड़ा है। मध्य पूर्व के खाड़ी देश ऐसे निकट पड़ोसी हैं जिन्हें एक-दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता। खाड़ी देशों को अपने संबंधों को बेहतर बनाने में समर्थन देना, मध्य पूर्व और खाड़ी क्षेत्र के लिए एक साझा, व्यापक, सहकारी और टिकाऊ सुरक्षा ढांचा तैयार करने की दिशा में काम करना, और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की नींव को मजबूत करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने आगे कहा कि दूसरा, राष्ट्रीय संप्रभुता के सिद्धांत का पालन करना। संप्रभुता सभी देशों, विशेष रूप से विकासशील देशों के लिए, अस्तित्व और समृद्धि का आधार है, और इसका उल्लंघन नहीं किया जाना चाहिए।
तीसरे में जोर अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान पर दिया गया। शी जिनपिंग ने अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांत को भी अहम बताया। उन्होंने कहा कि ये इसलिए जरूरी है, ताकि दुनिया फिर से ताकत के बल पर चलने वाली व्यवस्था की ओर न लौटे और दुनिया को जंगल के कानून (अराजकता) की ओर लौटने से रोकना चाहिए।
चौथा, विकास और सुरक्षा के प्रति संतुलित दृष्टिकोण को अपनाना। सभी पक्षों को खाड़ी देशों के विकास के लिए एक स्वस्थ वातावरण बनाने और उसमें सकारात्मक ऊर्जा लाने की दिशा में काम करना चाहिए।
जिनपिंग का मत है कि सभी देशों की संप्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए। साथ ही हरेक देश के नागरिकों, संस्थानों और परिसरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है।
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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
पान का पत्ता बढ़ते यूरिक एसिड को कंट्रोल करने में मददगार, सूजन और मसूड़ों के दर्द में दिलाता है राहत
नई दिल्ली, 14 अप्रैल (आईएएनएस)। भारतीय घरों में पान के पत्तों का इस्तेमाल सदियों से होता आ रहा है। पूजा-पाठ और पारंपरिक रस्मों में इसका खास स्थान रहा है, लेकिन यह सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद होता है।
वैज्ञानिक रिसर्च के अनुसार, पान के पत्तों में फिनोलिक कंपाउंड्स, फ्लेवोनॉयड्स और एंटीऑक्सिडेंट्स समेत कई तरह के सक्रिय तत्व पाए जाते हैं। ये तत्व शरीर में फ्री रेडिकल्स को कम करने में मदद करते हैं, जिससे कोशिकाओं को नुकसान से बचाया जा सकता है। इसके अलावा इनमें एंटीबैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी पाए गए हैं, जो शरीर को संक्रमण और सूजन से बचाने में मदद कर सकते हैं।
आज के समय में बढ़ता यूरिक एसिड एक आम समस्या बन गया है, जो जोड़ों में दर्द और सूजन का कारण बनता है। पान के पत्तों में मौजूद तत्व शरीर के मेटाबॉलिज्म को बेहतर करने में मदद करते हैं, जिससे यूरिक एसिड का स्तर संतुलित रखने में मदद मिलती है।
पाचन से जुड़ी समस्याओं के लिए भी पान के पत्तों को उपयोगी माना जाता है। आयुर्वेद और वैज्ञानिक रिसर्च की मानें, तो पान के पत्ते लार को बढ़ाते हैं, जिससे खाना पचाने में मदद मिलती है। यह गैस, एसिडिटी और कब्ज जैसी समस्याओं को कम करने में मददगार होते हैं। इसके नियमित और सीमित सेवन से पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
सूजन और मसूड़ों से जुड़ी दिक्कतों में भी पान के पत्तों काफी फायदेमंद है। इनमें पाए जाने वाले एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व शरीर में सूजन को कम करने में मदद करते हैं। अगर मसूड़ों में दर्द या सूजन हो, तो पान के पत्ते चबाने से कुछ राहत मिलती है। इसके अलावा, इनके एंटीबैक्टीरियल गुण मुंह के बैक्टीरिया को कम करने में भी सहायक होते हैं।
दांतों की सेहत के लिए भी पान के पत्तों को लाभकारी माना जाता है। पान के पत्तों में मौजूद प्राकृतिक तत्व दांतों और मसूड़ों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं।
इसके अलावा, कुछ रिसर्च में यह पाया गया है कि पान के पत्तों में मौजूद एंटीमाइक्रोबियल गुण सर्दी-जुकाम जैसी समस्याओं में मदद करते हैं। शहद के साथ इसका सेवन गले को आराम देता है, जबकि इसके पत्तों का लेप हल्की चोट या घाव पर लगाने से तेजी से भरने में मदद मिलती है।
--आईएएनएस
पीके/वीसी
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