शादी की अनोखी रस्म: छत पर चमचा बांधने की परंपरा के पीछे छिपा भावुक अर्थ
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'जिया बेकरार है...' से जमाई धाक, हसरत जयपुरी ने ऐसे पूरा किया अधूरी ख्वाहिशों से अमर गीतों तक का सफर
मुंबई, 14 अप्रैल (आईएएनएस)। 15 अप्रैल 1922 को जयपुर में जन्मे इकबाल हुसैन के अंदर दो दुनिया बसती थीं। एक तरफ स्कूल की अंग्रेजी तालीम, तो दूसरी तरफ अपने नाना (मशहूर शायर फिदा हुसैन) से सीखी गई उर्दू और फारसी की बारीकी थी। जब बीस साल की उम्र में पहली मोहब्बत मुकम्मल नहीं हुई, तो उन्होंने अपना उपनाम 'हसरत' रख लिया, जिसका मतलब ही है 'अधूरी ख्वाहिश'। आगे चलकर फिल्म इंडस्ट्री में इन्हें ही हसरत जयपुरी के नाम से प्रसिद्धि मिली।
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