क्या होर्मुज पर ट्रंप ने कर लिया कंट्रोल? ईरान ने दिया जवाब; चीन ने भी मारी एंट्री
मध्य-पूर्व में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंचता दिख रहा है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास अमेरिकी नाकाबंदी की खबरों ने वैश्विक राजनीति, व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं. दरअसल ट्रंप ने दावा किया है कि उन्होंने होर्मुज पर नाकाबंदी शुरू कर दी है. ट्रंप के इस दावे पर ईरान ने पलटवार किया और बताया हम पूरी तरह तैयार हैं जबकि खास बात यह है कि इस दावे और पलटवार में चीन में भी एंट्री ले ली है. डोनाल्ड ट्रंप की ओर से इस कदम की घोषणा के बाद हालात और भी संवेदनशील हो गए हैं.
रणनीतिक क्षेत्र में बढ़ता तनाव
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है. अरब सागर और गल्फ ऑफ ओमान के आसपास नाकाबंदी की खबरें अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बड़ा झटका साबित हो सकती हैं. यदि यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो इसका सीधा असर तेल की कीमतों और वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ेगा.
अमेरिका की सख्त चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ किया है कि नाकाबंदी क्षेत्र के पास आने वाले किसी भी संदिग्ध जहाज के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने ईरानी नौसेना को लेकर भी सख्त बयान दिया और चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार की चुनौती का तुरंत जवाब दिया जाएगा. इस बयान से साफ है कि अमेरिका इस क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति और नियंत्रण को लेकर बेहद आक्रामक रुख अपना रहा है.
Chinese Defense Minister Admiral Dong Jun:
— Daily Iran News (@DailyIranNews) April 13, 2026
"We have trade and energy agreements with Iran; we expect others not to interfere in our affairs. The Strait of Hormuz is open to us."
China is issuing a warning to the US. pic.twitter.com/oIQK9845Ty
चीन की प्रतिक्रिया
इस घटनाक्रम पर चीन ने भी अपनी चिंता जताई है. चीन के रक्षा मंत्री डॉन्ग जन ने कहा कि ईरान के साथ उनके ऊर्जा और व्यापारिक हित जुड़े हुए हैं, और इस मार्ग को खुला रहना चाहिए. चीन की यह प्रतिक्रिया दर्शाती है कि यह मामला अब केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन का मुद्दा बन चुका है.
क्या सभी जहाजों पर असर पड़ेगा?
नाकाबंदी की शर्तों के अनुसार, बिना अनुमति किसी भी जहाज को इस क्षेत्र में प्रवेश करने या बाहर निकलने पर रोका जा सकता है, उसका मार्ग बदला जा सकता है या उसे जब्त किया जा सकता है. हालांकि, यह भी कहा गया है कि तटस्थ देशों के जहाजों को पूरी तरह रोका नहीं जाएगा, बल्कि उनकी गतिविधियों पर निगरानी रखी जाएगी. मानवीय सहायता जैसे भोजन और दवाइयों से जुड़े जहाजों को जांच के बाद अनुमति दी जा सकती है.
???? Iran’s Acting Minister of Defense Brigadier General Seyyed Majid Ibn Reza:
— Press TV ???? (@PressTV) April 13, 2026
???? We are ready for any scenario, and the armed forces are on maximum combat alert.
???? Any act of aggression or provocation by the enemy will be met with a harsh and decisive response. pic.twitter.com/t8n5GrJa4a
ईरान की कड़ी चेतावनी
इस बीच ईरान ने भी सख्त प्रतिक्रिया दी है. ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि उनके सशस्त्र बल पूरी तरह तैयार हैं और किसी भी आक्रामक कार्रवाई का जवाब “कड़ा और निर्णायक” होगा. ईरान ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि उसके बंदरगाहों की सुरक्षा खतरे में पड़ती है, तो पूरे क्षेत्र की समुद्री सुरक्षा प्रभावित हो सकती है.
वैश्विक असर और संभावित खतरे
इस नाकाबंदी के कई बड़े प्रभाव हो सकते हैं:
- कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
- वैश्विक व्यापार मार्गों में बाधा
- सैन्य टकराव का खतरा
- ऊर्जा संकट की संभावना
जानकारों की मानें तो स्थिति और बिगड़ती है, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा. होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव केवल एक क्षेत्रीय विवाद नहीं है, बल्कि यह वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बन सकता है.
अमेरिका, ईरान और चीन जैसे बड़े देशों के बीच बढ़ती बयानबाजी से हालात और जटिल होते जा रहे हैं. अब दुनिया की नजर इस पर टिकी है कि क्या यह तनाव कूटनीति से सुलझेगा या फिर यह किसी बड़े टकराव की ओर बढ़ेगा.
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उद्योग स्थापना प्रक्रिया को सरल बनाने पर जोर, आंध्र सीएम चंद्रबाबू नायडू ने दिए निर्देश
अमरावती, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने सोमवार को अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य में उद्योगों की स्थापना प्रक्रिया को तेज करने के लिए नीतियों और प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाए।
उन्होंने अनावश्यक कानूनों और नियमों को खत्म कर निवेशकों के लिए अधिक अनुकूल माहौल बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
इस बीच, इस्पात मंत्रालय के सचिव संदीप पौंड्रिक के नेतृत्व में एक केंद्रीय प्रतिनिधिमंडल ने सचिवालय का दौरा किया और मुख्यमंत्री व राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ केंद्र सरकार की ‘डीरगुलेशन फेज-2’ पहल पर चर्चा की।
बैठक में औद्योगिक स्वीकृतियों में तेजी लाने, प्रक्रियाओं को सरल बनाने और नियामकीय बोझ कम करने पर विशेष ध्यान दिया गया। अधिकारियों ने राज्य में पहले से लागू सुधारों और भविष्य की कार्ययोजना पर प्रस्तुति दी।
आधिकारिक बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री ने फेज-1 की प्रगति और फेज-2 की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की। फेज-1 के तहत सात विभागों में 23 प्राथमिकता वाले कार्य पूरे किए जा चुके हैं, जबकि फेज-2 के लिए 28 प्राथमिकता क्षेत्र चिन्हित किए गए हैं।
बताया गया कि 47 सिफारिशों में से 18 पहले ही लागू की जा चुकी हैं और शेष को 31 मई तक पूरा करने का लक्ष्य है।
मुख्यमंत्री ने स्वीकृति प्रक्रिया की जटिलताओं को कम करने और गति बढ़ाने पर जोर देते हुए ब्रिटिश काल के पुराने कानूनों को हटाने की बात कही। उन्होंने 800 से अधिक अनुपालन को घटाकर 100 से कम करने और लाइसेंस की संख्या को सिंगल डिजिट में लाने का निर्देश दिया।
हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
उन्होंने थर्ड-पार्टी निरीक्षण को बढ़ावा देने, डुप्लिकेट लाइसेंसिंग सिस्टम खत्म करने, व्यवसाय पंजीकरण को आजीवन वैधता देने और फायर सेफ्टी के लिए राष्ट्रीय भवन संहिता के बजाय राज्य-विशिष्ट सरल मानदंड लागू करने का सुझाव दिया।
मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि पूरी स्वीकृति प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन किया जाए। फेज-2 लागू होने के बाद उद्योग स्थापना में लगने वाले समय को कम से कम 40 प्रतिशत तक घटाने का लक्ष्य रखा गया है।
वर्तमान में व्यवसायों को करीब 82 तरह की मंजूरियां लेनी पड़ती हैं, जिसे चरणबद्ध तरीके से 57 तक लाने का निर्देश दिया गया है। इसी तरह, बिल्डिंग प्लान और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट की संख्या 30 से घटाकर 18 करने की योजना है।
मुख्यमंत्री ने औद्योगिक पार्कों में भूमि आवंटन की प्रक्रिया तेज करने, सभी मंजूरियों के लिए एकल नोडल एजेंसी बनाने और फायर सेफ्टी, पर्यावरण, ऊर्जा, पर्यटन, शिक्षा व स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में सरलीकरण पर भी जोर दिया।
--आईएएनएस
डीएससी
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