ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करने में मददगार अर्जुन की छाल
नई दिल्ली, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। आजकल बढ़ते हृदय रोग और सांस संबंधी समस्याओं के बीच आयुर्वेद में उपयोग होने वाला अर्जुन एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक औषधि माना जाता है। अर्जुन वृक्ष की छाल को इसके औषधीय गुणों के कारण सदियों से स्वास्थ्य लाभ के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अर्जुन की छाल में मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट्स हृदय को मजबूत बनाने में मदद करते हैं और रक्त संचार को बेहतर करते हैं। यह शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने में भी सहायक माना जाता है, जिससे हृदय स्वास्थ्य को लाभ मिलता है।
इसके नियमित सेवन से काफी राहत महसूस होती है। धड़कन नियमित, ब्लड प्रेशर कंट्रोल और सांस की समस्या भी दूर होती है।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, अर्जुन की छाल हृदय स्वास्थ्य के लिए बेहद उपयोगी है। इसमें टर्मिनैलिक एसिड, फ्लेवोनॉइड्स और प्रचुर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। ये तत्व हृदय की मांसपेशियों को मजबूती देते हैं, खून को पतला करते हैं और हार्ट अटैक का खतरा कम करते हैं। अर्जुन रक्त वाहिकाओं को चौड़ा करके ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखता है। यह खराब कोलेस्ट्रॉल को घटाता है और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है।
साथ ही रक्त संचार को बेहतर बनाकर पूरे शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करता है। सांस संबंधी समस्याओं में भी अर्जुन रामबाण साबित होता है। अस्थमा, खांसी, सांस फूलना और सीने में जकड़न जैसी शिकायतों में इसका काढ़ा राहत देता है। इसके अलावा यह पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है, कब्ज, अपच और गैस जैसी समस्याओं को दूर करता है। त्वचा की चमक बढ़ाने और घाव जल्दी भरने में भी अर्जुन की छाल फायदेमंद है।
आयुर्वेदाचार्य सलाह देते हैं कि अर्जुन की छाल का काढ़ा सुबह खाली पेट या रात को सोने से पहले लिया जा सकता है। स्वाद के लिए इसमें थोड़ा शहद या गुड़ मिलाया जा सकता है। रोजाना इसका सेवन सुरक्षित और लाभकारी माना जाता है।
प्रेग्नेंट महिलाएं और स्तनपान कराने वाली माताएं अर्जुन का सेवन डॉक्टर या आयुर्वेदाचार्य की सलाह से ही करें। नियमित उपयोग से हृदय स्वस्थ रहता है, रक्त संचार सुधरता है और शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है।
--आईएएनएस
एमटी/वीसी
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जगन्नाथ मंदिर के भीतरी रत्न भंडार की 48 साल बाद गणना शुरू, अब खुलेगा रहस्यों का पिटारा
Jagannath Puri Ratna Bhandar: ओडिशा के पूरी में सोमवार, 13 अप्रैल से विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ मंदिर के रहस्यमयी रत्न भंडार के भीतर रखे आभूषणों और बहुमूल्य रत्नों की गणना का काम आधिकारिक रूप से शुरू हो चुका है. यह क्षण न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि ऐतिहासिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. पूरे 48 सालों के लंबे इंतजार के बाद भीतरी भंडार को खोला गया है, जिससे भक्तों और इतिहासकारों के बीच भारी उत्साह है. प्रशासन ने इस पूरी प्रक्रिया को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का जाल बिछाया है ताकि दुनिया के सामने मंदिर की अटूट संपत्ति का सही विवरण आ सके.
खजाने की तीन हिस्सों में गिनती
जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार को मुख्य रूप से तीन हिस्सों में बांटा गया है. सबसे पहले चलित खजाने की गिनती की गई, जिसमें वे आभूषण होते हैं जिन्हें भगवान के दैनिक श्रृंगार के लिए उपयोग किया जाता है. इसके बाद दूसरे चरण में बाहरी खजाने की गणना हुई, जिसमें उत्सवों और विशेष पर्वों पर भगवान को पहनाए जाने वाले गहने सुरक्षित रखे जाते हैं. अब सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील चरण यानी भीतरी खजाने की गिनती शुरू हुई है. भीतरी भंडार में वे प्राचीन और बेशकीमती आभूषण रखे गए हैं जिन्हें सदियों से संरक्षित किया गया है और जो सार्वजनिक रूप से बाहर नहीं निकाले जाते हैं.
3D मैपिंग से हो रही गणना
रत्न भंडार के भीतर की स्थिति और वहां मौजूद संपदा का सटीक आकलन करने के लिए प्रशासन कोई कसर नहीं छोड़ रहा है. गणना के काम में 3D मैपिंग, हाई-रेजोल्यूशन वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी का इस्तेमाल किया जा रहा है. इसका उद्देश्य न केवल गहनों की गिनती करना है बल्कि भंडार की दीवारों और संरचना की मजबूती की जांच करना भी है. भीतरी भंडार को काफी संवेदनशील इलाका माना जाता है, इसलिए वहां जाने की अनुमति केवल विशेष समिति के सदस्यों को ही दी गई है. रविवार को हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में गिनती से जुड़े सभी कड़े नियम तय किए गए थे ताकि मर्यादा और सुरक्षा बनी रहे.
क्या है रहस्य?
भीतरी रत्न भंडार का खुलना अपने आप में एक बड़ी घटना है क्योंकि इससे पहले साल 1978 में इसे खोला गया था. तब से लेकर अब तक यह हिस्सा पूरी तरह बंद था. लोक कथाओं और मंदिर के सेवकों की मान्यताओं के अनुसार, इस भंडार के भीतर कई गुप्त चैंबर और गलियारे हो सकते हैं. कुछ पुजारी यह भी दावा करते हैं कि मंदिर के प्रांगण में ऐसी खुफिया सुरंगें हैं जो किसी अनजान खजाने तक ले जाती हैं. इतिहास गवाह है कि सोमनाथ मंदिर की तरह ही जगन्नाथ मंदिर पर भी करीब 18 बार विदेशी आक्रमणकारियों ने हमले किए थे. हर हमले के दौरान मंदिर के जांबाज सेवकों ने भगवान की मूर्तियों और खजाने को बचाने के लिए उन्हें गुप्त स्थानों पर छिपा दिया था.
भक्तों की आस्था और समर्पण का प्रतीक
पुरी का जगन्नाथ धाम सदियों से करोड़ों लोगों की श्रद्धा का केंद्र रहा है. यहां मौजूद अथाह धन और रत्न किसी एक व्यक्ति के नहीं बल्कि उन राजा-महाराजाओं और भक्तों के दान का परिणाम हैं, जिन्होंने सदियों से अपनी श्रद्धा के अनुसार स्वर्ण और माणिक्य भगवान को अर्पित किए. 13 अप्रैल से शुरू हुई यह गिनती 16 और 18 अप्रैल तक जारी रहने की उम्मीद है. प्रशासन का कहना है कि गणना पूरी होने के बाद इसकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी. फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें पुरी पर टिकी हैं क्योंकि हर कोई उस पल का साक्षी बनना चाहता है जब 48 साल बाद भगवान के दिव्य भंडार का रहस्य दुनिया के सामने उजागर होगा.
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