स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने लॉन्च किया 10,000 करोड़ रुपए का 'स्टार्टअप इंडिया एफओएफ 2.0'
नई दिल्ली, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने सोमवार को स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 (एफओएफ 2.0) लॉन्च किया, और देश भर के स्टार्टअप्स के लिए वेंचर और ग्रोथ कैपिटल की उपलब्धता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 10,000 करोड़ के नए फंड की घोषणा की।
यह कदम पहले वाले फंड ऑफ फंड्स फॉर स्टार्टअप्स (एफएफएस 1.0) की सफलता के आधार पर उठाया गया है, जिसे 2016 में स्टार्टअप इंडिया एक्शन प्लान के तहत शुरू किया गया था, ताकि स्टार्टअप्स के लिए फंडिंग की कमी को दूर किया जा सके और घरेलू निवेश को बढ़ावा मिले।
नई योजना के तहत 10,000 करोड़ रुपए की राशि को योग्य अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (एआईएफ) के जरिए 16वें और 17वें वित्त आयोग के दौरान निवेश किया जाएगा।
सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से खासकर नए और तेजी से बढ़ने वाले स्टार्टअप सेक्टर्स में पूंजी की पहुंच और मजबूत होगी।
यह फंड डीप टेक्नोलॉजी, शुरुआती ग्रोथ स्टेज के स्टार्टअप्स (खासकर छोटे एआईएफ द्वारा समर्थित), और टेक्नोलॉजी-आधारित व इनोवेटिव मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में निवेश को प्राथमिकता देगा।
इसके अलावा, यह योजना किसी एक सेक्टर या स्टेज तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि हर तरह के स्टार्टअप्स को फंडिंग देने का प्रयास करेगी, ताकि इनोवेशन को व्यापक स्तर पर बढ़ावा मिल सके।
एआईएफ के चयन के लिए एक तय प्रक्रिया बनाई गई है। इसके लिए वेंचर कैपिटल इन्वेस्टमेंट कमेटी (वीसीआईसी) बनाई जाएगी, जिसमें स्टार्टअप इकोसिस्टम के अनुभवी सदस्य शामिल होंगे और वही चयन प्रक्रिया की निगरानी करेंगे।
इसके अलावा, योजना के सही क्रियान्वयन और प्रदर्शन पर नजर रखने के लिए एक एम्पावर्ड कमेटी (ईसी) भी बनाई जाएगी।
इस योजना में सरकार और संस्थागत निवेशकों द्वारा सह-निवेश की भी व्यवस्था रखी गई है, साथ ही पारदर्शिता और सही प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए जरूरी सुरक्षा उपाय भी शामिल किए गए हैं।
उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) जल्द ही इस योजना के संचालन से जुड़े विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करेगा, जिसमें वीसीआईसी की संरचना भी शामिल होगी।
सिडबी यानी भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (एसआईडीबीआई) को इस योजना का मुख्य कार्यान्वयन एजेंसी बनाया गया है और यह अधिसूचना के साथ ही योजना को लागू करना शुरू करेगा।
सरकार एक और घरेलू एजेंसी को भी नियुक्त करने की योजना बना रही है, ताकि इस योजना के कार्यान्वयन में सहयोग मिल सके।
एफओएफ 2.0 के तहत सरकार सेबी रजिस्टर्ड एआईएफ में निवेश करेगी, और ये एआईएफ आगे चलकर केंद्र द्वारा मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में निवेश करेंगे।
--आईएएनएस
डीबीपी
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'रक्षा मंत्रालय के दखल के बाद कार्रवाई', ब्रिगेडियर के परिवार ने पुलिस पर निष्क्रियता का लगाया आरोप
नई दिल्ली, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। साउथ दिल्ली के वसंत एन्क्लेव में कथित तौर पर अपने बेटे के साथ मारपीट का शिकार हुए एक वरिष्ठ सेना अधिकारी के परिवार ने दावा किया है कि उन्हें पुलिस से कोई तत्काल सहायता नहीं मिली। इस मामले में कार्रवाई तब शुरू हुई जब इस मुद्दे को रक्षा मंत्रालय चैनलों के माध्यम से उठाया गया।
अधिकारियों के अनुसार, ब्रिगेडियर और उनके बेटे पर कुछ लोगों के एक समूह ने हमला कर दिया। यह हमला तब हुआ जब उन्होंने अपने रिहायशी इलाके में खड़ी एक कार के अंदर शराब पी रहे दो लोगों पर आपत्ति जताई। बताया जा रहा है कि यह घटना 11 अप्रैल की रात करीब 10 बजे हुई।
ब्रिगेडियर गुजरात में तैनात हैं और अपने परिवार के साथ दिल्ली में रहते हैं। उन्होंने बताया कि यह घटना तब हुई जब वे रात के खाने के बाद अपने बेटे के साथ टहलने के लिए बाहर निकले। अपने घर के ठीक बाहर उन्होंने देखा कि दो लोग एक सफेद मर्सिडीज कार के अंदर बैठे शराब पी रहे थे। जब अधिकारी ने इस हरकत पर आपत्ति जताई तो दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हो गई।
अधिकारी की पत्नी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए पूरी घटना का ब्योरा देते हुए कहा कि पूरी घटना यह थी कि दो लोग एक सफेद मर्सिडीज कार में बैठकर शराब पी रहे थे। रात के खाने के बाद जब मेरे पति और बेटा टहलने के लिए बाहर निकले तो उन्होंने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि रिहायशी कॉलोनी में शराब पीना मना है।
इसके बाद उन लोगों ने उनसे बदतमीजी से बात की। हमने पलटवार नहीं किया और पीसीआर को फोन किया। पीसीआर को आने में थोड़ा समय लगा, और कुछ देर बाद वे पहुंचे और मर्सिडीज में बैठे लोगों से बात की। जब तक अधिकारी हमारे बयान लेना शुरू करते, तब तक दो कारों में कुछ गुंडे आ गए और मेरे बेटे और पति पर हमला करना शुरू कर दिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि हमले के दौरान पुलिस ने कोई दखल नहीं दिया। ब्रिगेडियर की पत्नी ने बताया कि हमारी मदद करने के बजाय, पुलिसकर्मी अपनी वैन से वापस चले गए। मेरे पति ने मेरे बेटे को गुंडों से बचाने की कोशिश की, लेकिन वे उन्हें भी पीट रहे थे। जब मैं दोबारा पुलिसकर्मी के पास गई तो उसने मदद करने से मना कर दिया और कहा कि इतने सारे गुंडों के सामने वह अकेला कुछ नहीं कर सकता। उसने कहा कि वह अपनी टीम का इंतजार करेगा। उसकी टीम कभी नहीं आई। गुंडे 20 मिनट तक मेरे पति और बच्चे को पीटते रहे। मैं उन्हें बचाने की कोशिश कर रही थी, और उस समय भी, गुंडों ने मुझ पर भद्दे कमेंट किए।
ब्रिगेडियर की पत्नी ने पुलिस के साथ अपनी बातचीत के बारे में बताते हुए कहा कि जब मैंने पुलिसकर्मी से मुझे पुलिस स्टेशन ले जाने के लिए कहा, तो उसने मेरे लिए वैन का ट्रंक खोला और मुझसे वहां लेटने को कहा, और कहा कि वह मुझे स्टेशन ले जाएगा। मैंने कहा कि मैं ट्रंक में नहीं बैठूंगी। मैं सीट पर बैठना चाहती हूं, जिस पर पुलिसकर्मी ने कहा कि यह तुम्हारी जगह नहीं है, इसलिए हम अपनी ही कार से पुलिस स्टेशन गए, जहां हमें कोई मदद नहीं मिली और हमसे पूछा गया कि हम बार-बार पीसीआर को क्यों बुला रहे हैं और उन्हें परेशान क्यों कर रहे हैं?
परिवार ने बताया कि 12 अप्रैल की सुबह-सुबह एक शिकायत दर्ज की गई थी। उन्होंने कहा कि हमने 12 अप्रैल को लगभग 2 बजे रात में शिकायत दर्ज की थी। हालांकि, जब तक हमने डिफेंस चैनल के जरिए मदद नहीं मांगी तब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्हें (ब्रिगेडियर को) पुलिस की ओर से अस्पताल ले जाया गया। हम खुद उन्हें अपने आर्मी अस्पताल ले गए, क्योंकि पुलिस ने कहा कि उनके पास उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले जाने के लिए एम्बुलेंस नहीं है। कोई भी पुलिस अधिकारी हमारे साथ नहीं गया। उन्होंने हर चीज को नजरअंदाज कर दिया, पराठे खाते रहे और बाकी सब कुछ करते रहे। उन्होंने हमारी तकलीफ को नजरअंदाज कर दिया।
हमले के बावजूद, अधिकारी और उनके बेटे को कथित तौर पर कोई गंभीर चोट नहीं आई।
ब्रिगेडियर के बेटे ने भी घटना का जिक्र करते हुए कहा कि मेरे पिता ने उनसे विनम्रता से कहा था कि वे सोसायटी के पास शराब न पिएं क्योंकि यह एक रिहायशी इलाका है। उन्होंने हमसे कहा कि हम उन्हें हिदायत न दें। तब हमने पीसीआर को बुलाया। तब तक, उन लोगों ने अपने गुंडों को बुला लिया था, और उसके बाद उन्होंने हम पर हमला करना शुरू कर दिया। किसी ने हमारी मदद नहीं की।
ब्रिगेडियर के बेटे ने बताया कि पुलिस ने एमएलसी (मेडिको लीगल सर्टिफिकेट) मांगा, लेकिन पुलिस की तरफ से कोई भी उनके साथ अस्पताल नहीं गया। बाद में, वह एमएलसी के लिए खुद ही अस्पताल गए। ब्रिगेडियर ने कहा कि एमएलसी के बाद भी पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की और सिर्फ जनरल डायरी में एंट्री की।
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि सबूत देने के बावजूद शुरुआत में मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा कि सभी सबूत देने के बाद भी कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की गई, इसलिए कोर ऑफ मिलिट्री पुलिस (सीएमपी) ने शायद इस मामले को अपने हाथों में ले लिया है, और मुझे यकीन है कि वे इसे ज्यादा असरदार तरीके से संभालेंगे। भारतीय सेना ने इस मामले का गंभीरता से संज्ञान लिया है और संबंधित अधिकारी को सहायता प्रदान करने के लिए कदम उठाए हैं। एक सीएमपी टीम को उनकी सहायता करने का निर्देश दिया गया है, और दिल्ली पुलिस से जांच करने तथा आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है। इस मामले में जांच जारी है।
--आईएएनएस
एसडी/डीकेपी
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