यूके-फ्रांस शिखर सम्मेलन: 40 से अधिक देशों के साथ वार्ता में खोजा जाएगा होर्मुज स्ट्रेट की स्वतंत्रता का हल
नई दिल्ली, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने होर्मुज स्ट्रेट की मौजूदा स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए 40 से अधिक देशों को साथ लाकर नौवहन की स्वतंत्रता बहाल करने की पहल की है।
इस हफ्ते यूके और फ्रांस एक अहम शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर भविष्य की समुद्री सुरक्षा रणनीति पर काम करेंगे। कीर स्टार्मर ने कहा कि इस अहम समुद्री मार्ग का लगातार बंद रहना वैश्विक अर्थव्यवस्था और आम लोगों के जीवन-यापन पर गहरा असर डाल सकता है। बढ़ती महंगाई के दबाव को कम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय शिपिंग का फिर से सुचारू रूप से शुरू होना बेहद जरूरी है।
यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पोस्ट में कहा, होर्मुज स्ट्रेट का लगातार बंद रहना बहुत ज्यादा नुकसानदायक है। जीवन-यापन की बढ़ती लागत के दबाव को कम करने के लिए वैश्विक शिपिंग को फिर से शुरू करना बेहद जरूरी है। यूके ने 40 से ज्यादा ऐसे देशों को एक साथ बुलाया है, जो नौवहन की स्वतंत्रता को बहाल करने के हमारे लक्ष्य में हमारे साथ हैं।
प्रधानमंत्री कीर ने कहा, इस हफ्ते यूके और फ्रांस मिलकर एक शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेंगे, ताकि संघर्ष खत्म होने के बाद अंतरराष्ट्रीय शिपिंग की सुरक्षा के लिए एक समन्वित, स्वतंत्र और बहुराष्ट्रीय योजना पर काम को आगे बढ़ाया जा सके।
बता दें अमेरिका और ईरान के बीच न्यूक्लियर प्रोग्राम समेत अन्य जरूरी मुद्दों पर बात नहीं बनी, जिसकी वजह से तनाव और बढ़ गया है। ऐसे में ईरान पर दबाव बनाने के लिए अमेरिका 13 अप्रैल से ईरानी पोर्ट्स में आने-जाने वाले जहाजों पर पूरी तरह से समुद्री नाकाबंदी लागू करना शुरू करेगा।
यूएस सेंट्रल कमांड (सीईएनटीसीओएम) ने यह कदम राष्ट्रपति के आदेश के बाद उठाया है और यह ईरानी पोर्ट्स में आने-जाने वाले सभी समुद्री ट्रैफिक को टारगेट करेगा, जिसमें अरब की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के किनारे के पोर्ट्स भी शामिल हैं।
इस मसले पर आलोचनाओं का दौर जारी है। भारत में फिलिस्तीन के राजदूत अब्दुल्ला अबू शावेश ने भी कहा कि यह स्ट्रेट पूरी दुनिया के काम आता है। खुद अमेरिका भी इसे खुला रखने की बात करता रहा है। ऐसे में इसे बंद करने का क्या फायदा है, समझ नहीं आता।
--आईएएनएस
एवाई/एबीएम
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आशा भोसले के निधन की कवरेज पर पाकिस्तान सरकार ने की कार्रवाई, जियो टीवी को थमाया नोटिस, जानें वजह
आशा भोसले के निधन की खबर को लेकर देश के साथ विदेशों में भी शोक लहर है. इसे संगीत जगत में भारी क्षति के रूप में देखा जा रहा है. रविवार को 92 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया. इसे लेकर हर जेनरेशन के बीच दुख का माहौल है. शायद ही कोई ऐसा हो जिसने आशा भोसले के गीत को न सुना हो. उनके गाने देश की सीमाओं के पार भी याद किए जाते हैं.
आशा भोसले के निधन पर पाकिस्तान के लोगों ने भी दुख व्यक्त किया. हर किसी को ये गम था कि अब वो खनकती आवाज कभी सुनाई नहीं देगी. कई पाकिस्तानी हस्तियों ने सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि दी. मगर पाकिस्तान के हुक्मरानों को यह बात हजम नहीं हुई. उसकी ओर से आशा भोसले की मौत की खबर दिखाने वाले जियो न्यूज को नोटिस गया. सवाल उठा कि आखिर क्यों? आशा भोसले तो गायिका थीं. उनके गीतों को हर कोई गुनगुनाता था. वैसे ही जैसे यहां भारत में गुलाम अली को सुना जाता है. आशा भोसले की आवाज में इस तरह का जादू था. मगर उनकी मौत की खबर दिखाने और बताने पर पाकिस्तान सरकार की ओर से नोटिस भेजने का तुक क्या है?
नोटिस में क्या लिखा है?
जियो न्यूज के प्रबंध निदेशक और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया संपादकों और समाचार निदेशकों के संघ के अध्यक्ष अजहर अब्बास ने X पर इस खबर की पुष्टि की. उन्होंने लिखा, “प्रतिष्ठित कलाकारों के बारे में रिपोर्टिंग करते वक्त कार्यों को याद करना और उनका सम्मान करना हमेशा से परंपरा रही है. वास्तव में, आशा भोसले जैसी महान कलाकार के लिए हमें उनके और भी सदाबहार और यादगार गाने साझा करने की जरूरत है. पाकिस्तान के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नियामक, पेमरा ने इसे प्रतिबंधित करने का विकल्प चुना है.”
भारतीय सामग्री के प्रसारण पर रोक को दोबारा से लागू किया
रविवार को जारी पेमरा नोटिस में जियो न्यूज की ओर से भोसले के निधन की खबर के साथ भारतीय गाने और फिल्मों के दृश्य प्रसारित करने को पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का जानबूझकर उल्लंघन बताया गया है. इससे भारतीय सामग्री के प्रसारण पर प्रतिबंध लगाया गया है. 2018 में पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने देश के टीवी चैनलों पर भारतीय सामग्री के प्रसारण पर रोक को दोबारा से लागू किया था.
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