निमंत्रण स्वीकार, लेकिन पीएम बालेन्द्र शाह की भारत यात्रा में हो सकती है देरी: नेपाली विदेश मंत्री
काठमांडू, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने सोमवार को कहा कि प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह की भारत यात्रा में थोड़ा समय लग सकता है। हालांकि उन्हें पहले ही भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से भारत आने का निमंत्रण मिल चुका है।
आमतौर पर नेपाल के प्रधानमंत्री अपनी पहली विदेश यात्रा भारत ही करते हैं, लेकिन कभी-कभी दोनों देशों के रिश्तों में तनाव या दूसरे कारणों से यह परंपरा टूट भी जाती है।
सोमवार को मॉरीशस में हुई नौवीं हिंद महासागर सम्मेलन में शामिल होकर नेपाल लौटने के बाद खनाल ने बताया कि उन्हें प्रधानमंत्री शाह के नई दिल्ली दौरे का न्योता भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मिला है, और नेपाल के प्रधानमंत्री ने इसे स्वीकार भी कर लिया है।
उन्होंने कहा, “नई सरकार अभी बनी है, पहले वह अपनी प्राथमिकताएं तय करेगी। दोनों देशों के बीच जो तकनीकी स्तर की टीमें हैं, वे भी एजेंडा तय करने पर काम करेंगी।”
खनाल ने बताया कि भारत और नेपाल के बीच करीब 40 तरह की द्विपक्षीय तंत्र हैं, जो अलग-अलग मुद्दों पर काम करता है। जब ये तकनीकी तैयारियां पूरी हो जाएंगी, तब प्रधानमंत्री शाह की राजनीतिक यात्रा होगी।
ये व्यवस्थाएं जिला स्तर से लेकर विदेश मंत्री स्तर तक फैली हैं, जिनमें सुरक्षा, पानी के संसाधन, सिंचाई, सीमा प्रबंधन, सीमा विवाद, व्यापार, खेती जैसे कई मुद्दे शामिल हैं। कुछ बैठकों का आयोजन नियमित रूप से होता है, लेकिन कई अब तक नहीं हो पाई हैं।
भारत, नेपाल के बड़े विकास सहयोगियों में से एक है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत नेपाल का सबसे बड़ा द्विपक्षीय दाता रहा, जिसने 107.8 मिलियन डॉलर की मदद दी। भारत की सहायता से कई विकास परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं और कुछ अभी बन रही हैं।
इंडियन ओशन कॉन्फ्रेंस के दौरान खनाल ने जलवायु परिवर्तन और उसके हिमालयी क्षेत्र और समुद्रों पर असर का मुद्दा भी उठाया।
उन्होंने कहा “पहाड़ों की सेहत और समुद्र की सेहत एक-दूसरे से जुड़ी हुई है।” उन्होंने कहा कि हिंदू कुश हिमालय इलाका अरबों लोगों के लिए मीठे पानी का मुख्य स्रोत है। उन्होंने यह भी कहा कि हिंद महासागर वैश्विक व्यापार और ऊर्जा के लिए बहुत अहम है, इसलिए इसकी स्थिरता बनाए रखना पूरी दुनिया की जिम्मेदारी है।
खनाल ने समुद्री आतंकवाद, लूटपाट और ड्रग्स व मानव तस्करी जैसी समस्याओं पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ये चुनौतियां सीधे लोगों की जिंदगी को प्रभावित करती हैं, खासकर उन नेपाली नागरिकों को जो रोजगार के लिए इन समुद्री रास्तों से यात्रा करते हैं।
उन्होंने दोहराया कि नेपाल के ग्लेशियर और बर्फ से ढके इलाके बड़ी नदियों को पानी देते हैं, जो आगे चलकर इंडियन ओशन में मिलती हैं, इसलिए पहाड़ और समुद्र दोनों की सेहत एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं।
नौवीं इंडियन ओशन कॉन्फ्रेंस का आयोजन भारत के विदेश मंत्रालय, मॉरीशस सरकार और इंडिया फाउंडेशन ने मिलकर किया था।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
बिहार में नई कैबिनेट का खाका तैयार, नीतीश की टीम में इन दिग्गजों को मिल सकता है मौका
बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव होने की तैयारी अंतिम चरण में पहुंच गई है. सूत्रों के मुताबिक 14 अप्रैल को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे की तारीख तय मानी जा रही है, जबकि 15 अप्रैल 2026 को नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित होने की चर्चा है. नई सरकार के गठन की अटकलों के साथ संभावित मंत्रियों के नाम भी राजनीतिक गलियारों में तेजी से सामने आने लगे हैं. अब नजर इस बात पर है कि नई कैबिनेट का स्वरूप कैसा होगा और किन पुराने चेहरों पर फिर से भरोसा जताया जाएगा. बिहार की जनता और राजनीतिक पंडितों के बीच इस समय सिर्फ इसी बात की चर्चा है कि आने वाले दो दिन राज्य की किस्मत के लिए कितने बड़े होने वाले हैं.
जेडीयू कोटे से इन नेताओं की दावेदारी मजबूत
जेडीयू कोटे से जिन वरिष्ठ नेताओं के नाम सबसे आगे बताए जा रहे हैं, उनमें बिजेंद्र यादव और विजय कुमार चौधरी प्रमुख हैं. दोनों को मुख्यमंत्री के भरोसेमंद सहयोगियों में गिना जाता है और वर्तमान सरकार में भी अहम जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं. अनुभव और संगठन में पकड़ को देखते हुए इनका नई कैबिनेट में शामिल होना लगभग तय माना जा रहा है. इन दोनों नेताओं ने लंबे समय तक सरकार और पार्टी के बीच पुल का काम किया है, इसलिए मुख्यमंत्री इन्हें दोबारा अपनी टीम में शामिल करने का पूरा मन बना चुके हैं.
इन पुराने चेहरों की भी वापसी की चर्चा
इसके अलावा श्रवण कुमार को भी फिर से मंत्री बनाए जाने की संभावना जताई जा रही है. एनडीए की संभावित नई सरकार में अशोक चौधरी, लेसी सिंह, मदन सहनी, जमा खां और सुनील कुमार जैसे नेताओं के नाम भी चर्चा में हैं. पार्टी नेतृत्व का फोकस इस बार अनुभव और संतुलन पर बताया जा रहा है, ताकि सरकार की कार्यशैली में निरंतरता बनी रहे. इन नामों पर अंतिम फैसला शपथ ग्रहण से ठीक पहले लिया जा सकता है. जेडीयू का प्रयास है कि जातिगत समीकरणों को ध्यान में रखते हुए एक मजबूत टीम तैयार की जाए जो भविष्य की चुनौतियों का सामना कर सके.
निशांत को लेकर सस्पेंस बरकरार
सबसे ज्यादा चर्चा मुख्यमंत्री के बेटे निशांत कुमार को लेकर है. पहले खबर थी कि उन्हें डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है, वहीं विजय चौधरी का नाम भी इस पद के लिए सामने आया था. लेकिन अब जानकारी मिल रही है कि निशांत फिलहाल सरकार में शामिल होने के इच्छुक नहीं हैं. कहा जा रहा है कि वे मंत्री पद लेने के बजाय संगठन में काम करना चाहते हैं. निशांत का यह फैसला कई लोगों को चौंका रहा है क्योंकि माना जा रहा था कि उनके आने से सरकार को एक नया और युवा चेहरा मिलेगा.
मनाने की कोशिश जारी
हालांकि पार्टी के भीतर उन्हें सरकार में शामिल करने की कोशिशें जारी बताई जा रही हैं. जेडीयू के कई नेता मानते हैं कि निशांत की एंट्री से युवाओं के बीच सकारात्मक संदेश जाएगा. अब सभी की नजर 15 अप्रैल के संभावित शपथ ग्रहण पर टिकी है. देखना होगा कि निशांत अपना फैसला बदलते हैं या संगठन की जिम्मेदारी संभालने का रास्ता चुनते हैं. बिहार की राजनीति में नई सरकार का अंतिम स्वरूप जल्द ही साफ हो सकता है. राज्य के प्रशासनिक अमले में भी इस बदलाव को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है क्योंकि नए मंत्रियों के साथ नई प्राथमिकताएं भी तय होंगी.
ये भी पढ़ें- पाकिस्तान की मध्यस्थता फेल होने के बाद ईरान हुआ बेचैन, ट्रंप बोले- डील के लिए बेताब है 'दुश्मन' देश
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation




















