Responsive Scrollable Menu

शांति के बीच पाकिस्तान का खेल, सऊदी में 13000 सैनिक भेजकर मचा दिया बवाल

पूरी दुनिया इस वक्त शांति की तरफ बढ़ने की कोशिश कर रही है। लेकिन पाकिस्तान है कि हर मौके पर अपनी बेइज्जती करवाने का कोई रास्ता निकाल ही लेता है। एक तरफ मध्य पूर्व में तनाव कम हो रहा था। सीज फायर लागू हो चुका था। ईरान ने भी अपने हमले रोक दिए थे। लेकिन तभी पाकिस्तान ने फिर वही पुराना खेल खेल दिया। जिस वक्त दुनिया शांति की तरफ बढ़ रही थी। उस वक्त पाकिस्तान ने अपने फाइटर चैट्स और करीब 13,000 सैनिक सऊदी अरब में भेज दिए। दरअसल 2025 में पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच एक रक्षा समझौता हुआ था। जिसके मुताबिक अगर किसी एक देश पर हमला होता है तो उसे दोनों देशों पर हमला माना जाएगा। कागजों पर यह समझौता भले ही मजबूत दिखता था, लेकिन असल में यह पाकिस्तान की मजबूरी और उसकी निर्भरता को उजागर करता है। सबसे बड़ी बात देखिए जब ईरान सऊदी अरब पर हमले कर रहा था, तब पाकिस्तान कहीं नजर नहीं आया। 

इसे भी पढ़ें: ट्रंप ने 158 ,जहाज तबाह किए, ईरान की पूरी नौसेना खत्म!

जैसे ही माहौल शांत हुआ,पाकिस्तान दिखावा करने पहुंच गया। यानी खतरे के वक्त गायब और बाद में हीरो बनने की कोशिश। अब यहां एक और बड़ा खेल देखिए। एक तरफ पाकिस्तान खुद को शांति का दूत दिखाना चाहता है। इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत करवाने की कोशिश कर रहा है और दूसरी तरफ उसी इलाके में अपनी सेना भेजकर एक पक्ष के साथ खड़ा भी हो रहा है। आप खुद सोचिए क्या कोई देश एक साथ मध्यस्थ भी बन सकता है और किसी एक पक्ष का सैनिक साथी भी यही पाकिस्तान के दोहरी नीति है जो उसकी कूटनीति पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा करती है। असल में यह कोई नई बात नहीं है। पाकिस्तान लंबे समय से सऊदी अरब पर निर्भर रहा है और इसके बदले में सऊदी अरब उसे बार-बार आर्थिक मदद देता है। जब यूएई ने पाकिस्तान से अपना कर्ज वापस मांगा तब भी सऊदी अरब ही सामने आया। 2018 में 6 अरब का पैकेज और आज भी आर्थिक संकट के वक्त सऊदी का सहारा यानी साफ है कि पाकिस्तान की विदेश नीति या रणनीति पर नहीं बल्कि मजबूरी बन चुकी है। जहां फैसले राष्ट्रीय हित से नहीं बल्कि पैसों के दबाव से लिए जाते हैं। यही वजह है कि आज पाकिस्तान अपने ही सैनिकों को हजारों किलोमीटर दूर भेज रहा है। जबकि उसके अपने देश में हालत स्थिर नहीं है। 

इसे भी पढ़ें: Strait of Hormuz में जंग की उलटी गिनती शुरू, America की नाकेबंदी पर Iran ने दे डाली दुनिया को खतरनाक चेतावनी

पहले ही ईरान और सऊदी अरब के बीच तनाव बना हुआ है। ऐसे में पाकिस्तान का खुलकर सऊदी के साथ खड़ा होना उसे एक पक्षीय खिलाड़ी बना देता है। जिसका सीधा असर भविष्य में उस पर पड़ सकता है। यानी आने वाले समय में पाकिस्तान खुद अपने लिए नई मुश्किलें खड़ी कर सकता है। कुल मिलाकर पाकिस्तान ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वो अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी छवि सुधारने में नहीं बल्कि उसे और उलझाने में माहिर है। एक तरफ शांति वार्ता दूसरी तरफ सैन्य तैनाती ये दोनों चीजें साथ-साथ नहीं चल सकती। लेकिन पाकिस्तान से शायद यही उम्मीद की जा सकती थी। 

Continue reading on the app

यूके-फ्रांस शिखर सम्मेलन: 40 से अधिक देशों के साथ वार्ता में खोजा जाएगा होर्मुज स्‍ट्रेट की स्‍वतंत्रता का हल

नई दिल्ली, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने होर्मुज स्‍ट्रेट की मौजूदा स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए 40 से अधिक देशों को साथ लाकर नौवहन की स्वतंत्रता बहाल करने की पहल की है।

इस हफ्ते यूके और फ्रांस एक अहम शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर भविष्य की समुद्री सुरक्षा रणनीति पर काम करेंगे। कीर स्टार्मर ने कहा कि इस अहम समुद्री मार्ग का लगातार बंद रहना वैश्विक अर्थव्यवस्था और आम लोगों के जीवन-यापन पर गहरा असर डाल सकता है। बढ़ती महंगाई के दबाव को कम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय शिपिंग का फिर से सुचारू रूप से शुरू होना बेहद जरूरी है।

यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म एक्स पोस्ट में कहा, होर्मुज स्‍ट्रेट का लगातार बंद रहना बहुत ज्‍यादा नुकसानदायक है। जीवन-यापन की बढ़ती लागत के दबाव को कम करने के लिए वैश्विक शिपिंग को फिर से शुरू करना बेहद जरूरी है। यूके ने 40 से ज्‍यादा ऐसे देशों को एक साथ बुलाया है, जो नौवहन की स्वतंत्रता को बहाल करने के हमारे लक्ष्य में हमारे साथ हैं।

प्रधानमंत्री कीर ने कहा, इस हफ्ते यूके और फ्रांस मिलकर एक शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेंगे, ताकि संघर्ष खत्म होने के बाद अंतरराष्ट्रीय शिपिंग की सुरक्षा के लिए एक समन्वित, स्वतंत्र और बहुराष्ट्रीय योजना पर काम को आगे बढ़ाया जा सके।

बता दें अमेरिका और ईरान के बीच न्यूक्लियर प्रोग्राम समेत अन्य जरूरी मुद्दों पर बात नहीं बनी, जिसकी वजह से तनाव और बढ़ गया है। ऐसे में ईरान पर दबाव बनाने के लिए अमेरिका 13 अप्रैल से ईरानी पोर्ट्स में आने-जाने वाले जहाजों पर पूरी तरह से समुद्री नाकाबंदी लागू करना शुरू करेगा।

यूएस सेंट्रल कमांड (सीईएनटीसीओएम) ने यह कदम राष्ट्रपति के आदेश के बाद उठाया है और यह ईरानी पोर्ट्स में आने-जाने वाले सभी समुद्री ट्रैफिक को टारगेट करेगा, जिसमें अरब की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के किनारे के पोर्ट्स भी शामिल हैं।

इस मसले पर आलोचनाओं का दौर जारी है। भारत में फि‍लिस्तीन के राजदूत अब्दुल्ला अबू शावेश ने भी कहा क‍ि यह स्ट्रेट पूरी दुनिया के काम आता है। खुद अमेरिका भी इसे खुला रखने की बात करता रहा है। ऐसे में इसे बंद करने का क्या फायदा है, समझ नहीं आता।

--आईएएनएस

एवाई/एबीएम

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

Continue reading on the app

  Sports
  Videos
See all

News Ki Pathshala: Sushant Sinha | चीन ने अमेरिका को दी चेतावनी ! | Xi Jinping | Trump | World News #tmktech #vivo #v29pro
2026-04-13T16:41:39+00:00

Salary Hike | News Ki Pathshala: हरियाणा सरकार ने वर्करों की सैलरी बढ़ाई | #haryana #noidaprotest #tmktech #vivo #v29pro
2026-04-13T16:43:16+00:00

Amit Shah | Bengal News: 4 शादियों पर बंगाल में गरजे Amit Shah!| #bengalelection #shorts #tmktech #vivo #v29pro
2026-04-13T16:36:25+00:00

News Ki Pathshala | Sushant Sinha: UAE ने पाक से वापस मांगा उधार | #pakistannews #shehbazsharif #tmktech #vivo #v29pro
2026-04-13T16:34:09+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers