हरिवंश को फिर डिप्टी स्पीकर बनाने की तैयारी, विपक्ष बोला- इतनी जल्दी किस बात की
हरिवंश को फिर से राज्यसभा का डिप्टी स्पीकर बनाया जा सकता है। उन्होंने 10 अप्रैल को ही सांसद के तौर पर शपथ ली थी। इस बार वह मनोनीत सदस्य के तौर पर राज्यसभा पहुंचे हैं। पहले वह जेडीयू के सांसद के तौर पर थे, लेकिन इस बार नीतीश कुमार की पार्टी से उन्हें मौका नहीं मिला था।
बिहार सरकार का एक्शन, अब धड़ाधड़ शुरू होगी बालू घाटों की नीलामी; निर्माण को मिलेगी रफ्तार
Bihar News: बिहार सरकार ने बालू घाटों की नीलामी को लेकर कानूनी बाधाओं को दूर करने के लिए कस ली है. यहां काफी समय से इसके कारण निर्माण कार्यों की रफ्तार धीमी पड़ी थी, ऐसे में अब इस फैसले से न केवल विकास योजनाओं को दोबारा पंख लगेंगे बल्कि आम आदमी को भी सस्ते और सुलभ बालू की भी उपलब्धता सुनिश्चित होगी.
नीलामी में देरी बर्दाश्त नहीं
बिहार के उप मुख्यमंत्री और खान एवं भू तत्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने विभाग की समीक्षा बैठक में स्पष्ट किया है कि बालू घाटों की नीलामी में हो रही देरी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि पर्यावरणीय मंजूरी यानी एनवायरमेंटल क्लीयरेंस की प्रक्रिया में जो भी पेच फंसे हुए हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से सुलझाया जाए. मंत्री का मानना है कि जब तक सभी घाट पूरी क्षमता से काम नहीं करेंगे, तब तक कालाबाजारी और ऊंची कीमतों पर लगाम लगाना मुश्किल है.
क्या कहते हैं विभागीय आंकड़े?
राज्य में खनन विभाग ने कुल 463 पीले बालू घाटों की पहचान की है. आंकड़ों के अनुसार, इनमें से अब तक 360 घाटों की नीलामी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, लेकिन शेष 103 घाट अभी भी फाइलों के जाल में उलझे हुए हैं. इन घाटों की नीलामी रुकने का मुख्य कारण पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त करने में होने वाली देरी है. सरकार का लक्ष्य है कि मानसून से पहले इन सभी घाटों को नीलामी के दायरे में लाकर खनन शुरू कर दिया जाए, ताकि साल भर बालू का स्टॉक बना रहे.
लाइसेंस प्रक्रिया में नहीं आएंगी बाधाएं
नीलामी के बाद सबसे बड़ी समस्या स्थापना की सहमति (CTE) और संचालन की सहमति (CTO) प्राप्त करने में आती है. वर्तमान व्यवस्था में इन अनुमतियों को पाने में ठेकेदारों को महीनों लग जाते हैं. विजय कुमार सिन्हा ने इस प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने पर जोर दिया है. उन्होंने कहा है कि संबंधित विभागों के बीच बेहतर तालमेल होना चाहिए ताकि फाइलें एक मेज से दूसरी मेज पर न घूमती रहें. अगर समय पर सीटीई और सीटीओ मिलेगा, तो ठेकेदार तुरंत काम शुरू कर सकेंगे और राजस्व का नुकसान भी नहीं होगा.
केंद्र सरकार से की सहयोग की अपील
बिहार सरकार ने इस मामले को केवल राज्य स्तर तक सीमित नहीं रखा है. पर्यावरणीय मंजूरी की जटिलताओं को देखते हुए केंद्र के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को पत्र लिखकर विशेष आग्रह किया गया है. राज्य सरकार चाहती है कि केंद्र सरकार राज्यों के लिए बालू खनन से जुड़ी मंजूरी की शर्तों को थोड़ा सरल और पारदर्शी बनाए. इससे न केवल बिहार, बल्कि देश के अन्य राज्यों में भी निर्माण सामग्री की कमी को दूर किया जा सकेगा.
बिहार के बुनियादी ढांचे के विकास पर असर
बालू घाटों की पूर्ण नीलामी का सीधा असर बिहार के बुनियादी ढांचे के विकास पर पड़ेगा. वर्तमान में बालू की कमी या ऊंची कीमतों के कारण कई बड़े पुल, सड़कें और सरकारी भवनों का काम प्रभावित हो रहा था. जब सभी घाट चालू हो जाएंगे, तो बाजार में बालू की आपूर्ति बढ़ेगी जिससे इसकी कीमतों में भारी गिरावट आने की उम्मीद है. यह आम लोगों के लिए अपना घर बनाने के सपने को सच करने में मदद करेगा और बड़े ठेकेदारों को भी तय समय पर प्रोजेक्ट पूरा करने की सुविधा देगा.
हजारों लोगों को रोजगार की उम्मीद
बालू खनन न केवल निर्माण के लिए जरूरी है, बल्कि यह बिहार सरकार के खजाने को भरने का भी एक बड़ा जरिया है. नीलामी प्रक्रिया पूरी होने से सरकार को करोड़ों रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिलेगा. इसके साथ ही, बालू खनन और परिवहन से जुड़े हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार भी मिलेगा. सरकार की यह पहल राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और अवैध खनन पर लगाम लगाने की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है.
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