नोएडा में मजदूरों का उग्र प्रदर्शन, दिल्ली-गाजियाबाद से आने वाली सड़कों पर लगा तगड़ा जाम, लोग पैदल सफर करने पर मजबूर
नोएडा में वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर चल रहा मजदूरों का प्रदर्शन अब जाम और अफरा-तफरी की वजह बन चुका है. सोमवार को गाजियाबाद-नोएडा बॉर्डर पर प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर जाम जैसे हालात उत्पन्न कर दिए हैं. इससे पूरे इलाके में यातायात काफी प्रभावित हुआ है. हालात ऐसे हो गए कि कई किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं. लोग घंटों तक जाम में फंसे रहे.
नोएडा में एंट्री करने वाली सभी सड़कों पर प्रदर्शनकारी उतर आए. चाहे मयूर विहार से नोएडा आने वाली सड़क हो या दिल्ली के आश्रम से नोएडा के सेक्टर 16 और फिल्म सिटी की ओर से आने वाले डीएनडी सड़क पर हो. इसके साथ सेक्टर 62 मेट्रो के नीचे मेरठ एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाली सड़क हो. सभी जगह मजदूरों का प्रदर्शन काफी तेज हो चुका है.
प्रमुख मार्गों पर लगाई रोक
प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली से नोएडा और नोएडा से दिल्ली जाने प्रमुख मार्गों को पूरी तरह से रोक दिया है. सेक्टर-15 फ्लाईओवर के नीचे बड़ी संख्या में मजदूर सड़क पर बैठे दिखाई दिए. इससे यातायात पूरी तरह से ठप हो गया. इस बीच सेक्टर-62 में मौजूद फोर्टिस अस्पताल के करीब विभिन्न कंपनियों के कर्मचारी धरने पर बैठ गए. इससे हालात और बिगड़ गए.
लोगों को मजबूरी मे पैदल सफर तय करना पड़ा
प्रदर्शन का असर मयूर विहार के साथ डीएनडी और रजनीगंधा चौक तक देखा गया. गाजियाबाद के गोविंदपुरम से नोएडा के एंट्री गेट तक पहुंचने में लोगों को करीब दो घंटे का समय लग गया. स्कूल जाने वाले बच्चों के साथ दफ्तर जाने वाले कर्मियों और आम लोगों को इस जाम से परेशानी का सामना करना पड़ा. सभी इस जाम से काफी परेशान नजर आए. कई लोगों को मजबूरी मे पैदल सफर तय करना पड़ा.
कई रूट डायवर्जन को लागू किया
हालात को संभालने के लिए ट्रैफिक पुलिस ने कई रूट डायवर्जन को लागू किया. सेक्टर-59 मेट्रो स्टेशन के नीचे से यातायात को मोड़कर संचालन किया गया है. वैकल्पिक मार्गों पर भी काफी दबाव के कारण जामा जैसे हालात बने हुए हैं.
हालात को नियंत्रित करना कड़ी चुनौती
मौके पर पुलिस और आम लोगों के बीच जमकर बहस हुई. आम जनता का आरोप है कि प्रशासन की ओर से किसी तरह के ठोस कदम नहीं उठाए गए. इसकी वजह से जाम जैसे हालात पैदा हो गए. पुलिस जाम को खुलवाने के साथ हालात को सामान्य करने के प्रयास में जुटी हुई है. इस दौरान प्रदर्शनकारियों के हटने तक राहत मिलना मुश्किल हो रहा है. पूरे क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल देखा जा रहा है. प्रशासन के सामने हालात को नियंत्रित करना कड़ी चुनौती बन चुका है.
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दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे फर्राटा भरने को तैयार, कल PM मोदी करेंगे उद्घाटन; जानिए खासियत
Delhi Dehradun Expressway: देश के उत्तर भारत में एक बेहद महत्वपूर्ण और लंबी प्रतीक्षित सड़क परियोजना दिल्ली‑देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन अब तय हो गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 अप्रैल 2026 को इसका औपचारिक उद्घाटन करेंगे. यह सूचना सरकार और अधिकारियों ने आधिकारिक तौर पर भी लगभग पुष्टि कर दी है, और तैयारियां अंतिम दौर में हैं.
ग्रीनफील्ड हाईवे प्रोजेक्ट्स में से एक
दिल्ली‑देहरादून एक्सप्रेसवे भारत के सबसे बड़े ग्रीनफील्ड हाईवे प्रोजेक्ट्स में से एक है. यह लगभग 213 किलोमीटर लंबा छह‑लेन एक्सप्रेसवे है, जो उत्तर‑पूर्वी दिल्ली के अक्षरधाम/ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से शुरू होकर बागपत, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर जैसे इलाकों से गुजरते हुए देहरादून तक जाता है.
सफर का समय अब सिर्फ 2.5 घंटे
अब तक दिल्ली से देहरादून पहुंचने में औसतन 5 से 6.5 घंटे लगते थे, लेकिन इस नई हाइवे के खुलने के बाद यह समय लगभग 2.5 घंटे रह जाएगा. इससे यात्रियों, पर्यटकों और व्यापारिक वाहनों को बहुत राहत मिलेगी और समय की बड़ी बचत होगी.
लागत और तकनीक
इस प्रोजेक्ट में लगभग 12,000‑13,000 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं और इसे आधुनिक तकनीकों से बनाया गया है. एक्सप्रेसवे के निर्माण में उच्च‑गति सड़क सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखा गया है और यह पूरी तरह एक्सेस‑कंट्रोल्ड छह‑लेन हाइवे है.
राजाजी नेशनल पार्क का सुरक्षा उपाय
इस एक्सप्रेसवे की एक अनोखी खासियत इसका वाइल्डलाइफ कॉरिडोर है. यह 12‑14 किलोमीटर लंबा ऊंचा सौंदर्यीकृत मार्ग है जो राजाजी नेशनल पार्क के ऊपर से गुजरता है. इसका उद्देश्य जंगल और जीव‑जंतु जैसे हाथी, बाघ आदि को बिना बाधा के सुरक्षित रूप से पास होने देना है.
सुरंग और अतिरिक्त सुविधाएं
एक्सप्रेसवे में एक 370 मीटर लंबी सुरंग (टनेल) भी बनाई गई है जो दात काली मंदिर के पास से गुजरती है. इसके अलावा कई बड़े पुल, इंटरचेंज, ओवरब्रिज और वन्यजीव अंडरपास भी हैं, ताकि हाईवे पर्यावरण‑अनुकूल और सुरक्षित हो.
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किन इलाकों को फायदा होगा?
यह एक्सप्रेसवे सिर्फ दिल्ली और देहरादून को ही नहीं जोड़ता, बल्कि हरिद्वार और ऋषिकेश जैसी तीर्थ और पर्यटन स्थलों तक पहुंच और आसान करेगा. पश्चिम उत्तर प्रदेश के बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर जैसे शहरों में कनेक्टिविटी बेहतर करेगा. पुराने राष्ट्रीय मार्गों और ट्रैफिक वाली सड़कों का भार कम करेगा.
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ट्रैफिक और कनेक्टिविटी
इस नए हाईवे के बनने से दिल्ली‑मेरठ एक्सप्रेसवे और आसपास के दूसरे राष्ट्रीय राजमार्गों पर ट्रैफिक का दबाव भी कम होने की उम्मीद है, जिससे सभी प्रकार के वाहनों का चलता‑फिरता और अधिक सुगम होगा.
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पर्यटन और यातायात की दिशा में एक बड़ा बदलाव
दिल्ली‑देहरादून एक्सप्रेसवे सिर्फ एक सड़क नहीं है यह उत्तर भारत की अर्थव्यवस्था, पर्यटन और यातायात की दिशा में एक बड़ा बदलाव साबित होने जा रहा है. जब 14 अप्रैल 2026 को इसका उद्घाटन होगा, तब यह लाखों लोगों के लिए समय, ऊर्जा और सुविधाओं की एक नई राह खोलेगा.
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