हंगरी की राजनीति में आज एक युग का अंत हो गया। पिछले 16 वर्षों से सत्ता के शिखर पर बैठे कद्दावर राष्ट्रवादी नेता विक्टर ऑर्बन का तिलस्म आखिरकार टूट गया है। देश में हुए ऐतिहासिक संसदीय चुनावों में कंजर्वेटिव नेता पीटर माग्यार ने न केवल ऑर्बन को सत्ता से बेदखल किया, बल्कि उनकी तिस्ज़ा पार्टी ने संसद में दो-तिहाई से भी अधिक बहुमत हासिल कर एक नया इतिहास रच दिया है। कुल 199 सीटों वाली संसद में माग्यार की पार्टी 137 सीटों पर कब्जा करती दिख रही है। यह जीत इतनी बड़ी है कि विपक्षी गठबंधन अब अकेले दम पर संविधान तक बदलने की ताकत रखता है। हंगरी की जनता ने इस बार बदलाव के लिए जी-जान लगा दी। चुनाव में रिकॉर्ड 77.8% मतदान हुआ, जो पिछले कई दशकों में सबसे अधिक है। चुनावी नतीजों के बाद विक्टर ऑर्बन ने गरिमापूर्ण तरीके से अपनी हार स्वीकार की। उन्होंने पत्रकारों से भावुक होते हुए कहा चुनाव परिणाम दर्द भरे हैं लेकिन स्पष्ट हैं। जनता ने हमें इस बार सेवा का मौका नहीं दिया है। मैं विजेता पक्ष को शुभकामनाएँ देता हूँ।
16 साल बाद ओर्बन सत्ता से बाहर
ओर्बन के कार्यकाल में ये संबंध कमजोर पड़ गए थे। मैग्यार की चौंकाने वाली इस जीत के बाद यूरोपीय नेताओं ने उन्हें बधाई दी और उनकी सराहना की। मैग्यार की तिस्जा पार्टी को 77 प्रतिशत मतों की गिनती पूरी होने तक 53 प्रतिशत से अधिक वोट मिले जबकि ओर्बन की सत्तारूढ़ फिदेस्ज पार्टी को 38 प्रतिशत मत मिले। यह चुनावी परिणाम ओर्बन के लिए बड़ा झटका है, जिन्हें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का करीबी सहयोगी माना जाता है। ओर्बन ने चुनाव में अपनी हार स्वीकार कर ली है।
पीएम मोदी ने मैग्यार की जीत पर दी बधाई
प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को हंगरी में संसदीय चुनावों में पीटर मैग्यार की शानदार जीत पर उन्हें बधाई दी। मोदी ने कहा कि वह द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने तथा भारत-यूरोपीय संघ के बीच अहम रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए उनके साथ मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हैं। दक्षिणपंथ की तरफ झुकाव रखने वाली विपक्षी तिस्जा पार्टी के नेता पीटर मैग्यार ने रविवार को हुए चुनाव में हंगरी के मौजूदा प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन को हराया। मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि पीटर मैग्यार और तिस्जा पार्टी को उनकी शानदार चुनावी जीत पर हार्दिक बधाई। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और हंगरी घनिष्ठ मित्रता, साझा मूल्यों और एक-दूसरे के प्रति अटूट सम्मान की डोर से बंधे हुए हैं। उन्होंने कहा मैं हमारे द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने तथा हमारे लोगों की साझा समृद्धि और कल्याण के साथ भारत-यूरोपीय संघ के बीच अहम रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए आपके साथ मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हूं।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने पोप लियो की कड़ी आलोचना करते हुए उन्हें बेहद कमजोर बताया है। ट्रंप ने कहा कि पोप लियो अपराध के मामले में कमजोर हैं और विदेश नीति के लिहाज से बेहद कमजोर हैं। ट्रंप के इस बयान के बाद से वेटिकन सिटी और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ गया है। दरअसल, शनिवार को लियो पोप ने वैश्विक शांति की अपील की और कहा कि स्वार्थ और धन की पूजा बंद करो। शक्ति प्रदर्शन बंद करो। युद्ध बंद करो।" पोप ने उस चीज के प्रति आगाह किया जिसे उन्होंने "सर्वशक्तिमानता का भ्रम" बताया, जो तेजी से अप्रत्याशित और खतरनाक होता जा रहा है। पोप लियो ने ईरान पर अमेरिका-इजराइल युद्ध को बढ़ावा देने वाले "सर्वशक्तिमान होने के भ्रम" की निंदा की और वैश्विक नेताओं से तनाव को रोकने और संवाद के माध्यम से शांति स्थापित करने का आग्रह किया। पोप की ये टिप्पणियां सेंट पीटर बेसिलिका में एक प्रार्थना सभा के दौरान की गईं, जो इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच नाजुक युद्धविराम के बीच चल रही दुर्लभ आमने-सामने की वार्ताओं के साथ मेल खाती हैं।
इससे पहले जनवरी में पोप लियो XIV के भाषण के बाद वेटिकन के राजदूत को अमेरिका की सैन्य शक्ति की याद दिलाई गई थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि आम सहमति पर आधारित कूटनीति की जगह बल पर आधारित कूटनीति ले रही है। अमेरिका में जन्मे पहले पोप और वेटिकन सिटी के वर्तमान शासक, पोप लियो XIV, डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन की आव्रजन नीतियों और आक्रामक विदेश नीति के आलोचक रहे हैं। 9 जनवरी को वेटिकन के राजनयिक कोर को पोप के वार्षिक संबोधन के बाद उभरा, जिसमें उन्होंने चेतावनी दी कि युद्ध का चलन फिर से बढ़ गया है और बल प्रयोग, वैश्विक प्रभुत्व और प्रवासियों के साथ दुर्व्यवहार पर आधारित कूटनीति की आलोचना की। द फ्री प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पेंटागन के शीर्ष अधिकारियों, जिनमें नीति के लिए रक्षा उप सचिव (अब युद्ध) एलब्रिज कोल्बी भी शामिल हैं, ने इस भाषण को ट्रम्प प्रशासन के लिए एक सीधी चुनौती के रूप में देखा।
खबरों के मुताबिक, पेंटागन ने कार्डिनल क्रिस्टोफ़ पियरे को तलब किया, जो उस समय अमेरिका में पोप के निजी दूत के रूप में कार्यरत थे, और उन्हें फटकार लगाई, जिसे वेटिकन सूत्रों ने एक तीखी फटकार बताया। होली सी को अमेरिका का पक्ष लेने के लिए कहा गया। वेटिकन के अधिकारियों ने इस बैठक और संदेश को अमेरिका की सैन्य शक्ति से जुड़ी एक अप्रत्यक्ष धमकी के रूप में देखा। इसके बाद पोप लियो ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस द्वारा अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के समारोह में आमंत्रित किए जाने को अस्वीकार कर दिया।
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