पाकिस्तान: खैबर पख्तूनख्वा में पोलियो टीम पर हमले में पुलिसकर्मी की मौत, चार घायल
इस्लामाबाद, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा के हंगू जिले में सोमवार को पोलियो टीमों को सुरक्षा देने जा रही पुलिस टीम पर हमला हुआ। स्थानीय मीडिया के अनुसार, इस घटना में एक पुलिस कांस्टेबल की मौत हो गई और चार अन्य घायल हो गए।
यह घटना 13-19 अप्रैल को होने वाले वैक्सीनेशन कैंपेन के पहले दिन हंगू के थल तहसील में हुई। पाकिस्तानी अखबार डॉन के अनुसार हंगू जिला पुलिस ने कहा कि अनजान हमलावरों ने पुलिस पार्टी पर फायरिंग की, जिसमें एक पुलिसवाले की मौत हो गई और चार अन्य घायल हो गए।
घायल पुलिसवालों को इलाज के लिए हॉस्पिटल ले जाया गया। घटना के बाद, हमलावरों को ढूंढने के लिए इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान दुनिया के सिर्फ दो ऐसे देश हैं जहां वाइल्ड पोलियो वायरस (डब्ल्यूपीवी) अभी भी फैला हुआ है। पाकिस्तान में पोलियो वर्कर्स को अक्सर हमलों का निशाना बनाया गया है। खासकर खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में पोलियों की टीमों पर हमले की खबरें आती रहती हैं।
बता दें, डब्ल्यूपीवी प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला वायरस है जो पर्यावरण में फैलकर पक्षाघात (लकवा) का कारण बनता है। फरवरी में पाकिस्तान के बलूचिस्तान के चमन जिले में पुलिस वैक्सीनेशन टीम पर अनजान हमलावरों ने गोली चलाई, जिसमें एक पुलिसवाले की मौत हो गई।
फरवरी में इसी तरह की एक घटना में, पाकिस्तान के लाहौर के अलग-अलग इलाकों में पोलियो टीमों पर हमला किया गया क्योंकि माता-पिता ने उन्हें अपने बच्चों को पोलियो ड्रॉप्स नहीं पिलाने दिए।
डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस के मुताबिक, हरबंसपुरा इलाके में संदिग्धों ने पोलियो टीम को अपने बच्चों को ड्रॉप्स नहीं पिलाने दिए और फिर कथित तौर पर स्वास्थ्य कर्मियों पर हमला कर दिया।
एफआईआर के मुताबिक, आरोपियों ने पोलियोकर्मियो पर हमला किया और बाद में अपने साथियों को बुला लिया, जिन्होंने भी वर्कर्स को टॉर्चर किया। पोलियो वर्कर्स के हेल्पलाइन पर डायल करने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची।
इसके बाद आरोपियों ने पुलिस वालों पर भी हमला किया। बाद में पुलिस ने उनके खिलाफ केस दर्ज किया गया था।
इसी तरह, शाहदरा पुलिस ने कुछ बच्चों के माता-पिता के खिलाफ केस दर्ज किया, जिन पर आरोप है कि उन्होंने बच्चों को वैक्सीन लगाने के लिए इलाके में आई महिला पोलियो कर्मियों को परेशान किया।
आधिकारिक डेटा के मुताबिक, 2012 से खैबर पख्तूनख्वा में हमलावरों के हमलों में 96 लोग मारे गए हैं, जिनमें 61 पुलिस वाले, 7 स्वास्थ्यकर्मी और पांच आम लोग शामिल हैं। इसके अलावा, पोलियो टीमों पर हुए हमलों में 170 लोग घायल हुए हैं, जिनमें 124 पुलिस वाले, 28 स्वास्थ्यकर्मी और 21 लोग शामिल हैं। इस दौरान वैक्सीनेशन कैंपेन के दौरान 32 स्वास्थ्यकर्मी, तीन आम नागरिक और एक पुलिस वाले को अपहरण किया गया।
--आईएएनएस
केके/पीएम
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बिहार में पटलने वाली है बाजी, JDU ने सीएम पद को लेकर चल दिया ये दांव
बिहार की राजनीति एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर खड़ी नजर आ रही है. लंबे समय से राज्य की सत्ता का चेहरा रहे नीतीश कुमार के बाद अब सत्ता परिवर्तन की चर्चाएं तेज हो गई हैं. हालिया घटनाक्रमों से संकेत मिल रहे हैं कि भारतीय जनता पार्टी राज्य में अपना मुख्यमंत्री चेहरा सामने ला सकती है. इसी कड़ी में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान का पटना दौरा राजनीतिक हलकों में खासा महत्व रखता है, जहां विधायक दल की बैठक में नए नेता का चयन हो सकता है.
जेडीयू की अंदरूनी भावनाएं और असमंजस
हालांकि, सहयोगी दल जेडीयू के भीतर अलग ही माहौल देखने को मिल रहा है. पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता चाहते हैं कि मुख्यमंत्री पद जेडीयू के पास ही बना रहे. विधायक शालिनी मिश्रा का बयान इस भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाता है, जहां उन्होंने स्पष्ट कहा कि पार्टी के लिए नीतीश कुमार ही सर्वोपरि हैं और उनकी इच्छा है कि जेडीयू से ही अगला मुख्यमंत्री बने.
Patna, Bihar: On Bihar's Chief Minister face, JD(U) MLA Shalini Mishra says, "All of us have a common sentiment. We stand with our Chief Minister. Nitish Kumar is everything for us, and we would like, especially from our party JD(U), that Nishant Kumar should become the Chief… pic.twitter.com/RmqCAudmaQ
— IANS (@ians_india) April 13, 2026
‘निशांत कुमार’ का नाम क्यों चर्चा में?
इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम में एक नया नाम लगातार उभर रहा है निशांत कुमार. नीतीश कुमार के बेटे निशांत को लेकर पार्टी के भीतर और बाहर दोनों जगह समर्थन की आवाजें उठ रही हैं. पटना में लगे पोस्टर, जिनमें उन्हें 'नेक्स्ट सीएम ऑफ बिहार' बताया गया, यह दर्शाते हैं कि एक वर्ग उन्हें नई पीढ़ी के नेता के रूप में देख रहा है. हालांकि, यह मांग अभी भावनात्मक और प्रतीकात्मक ज्यादा लगती है, क्योंकि निशांत कुमार सक्रिय राजनीति में अब तक पूरी तरह सामने नहीं आए हैं.
गठबंधन की राजनीति: फैसला किसका होगा?
बिहार में सत्ता का समीकरण केवल एक पार्टी के हाथ में नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए के सामूहिक निर्णय पर निर्भर करता है. ऐसे में मुख्यमंत्री के चयन का अंतिम फैसला गठबंधन नेतृत्व ही करेगा. यहां भाजपा का बढ़ता प्रभाव और जेडीयू की पारंपरिक पकड़ के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होगा. यही वजह है कि हर बयान और हर दौरा राजनीतिक संकेतों से भरा हुआ है.
'मैं हूं ना', नीतीश का संदेश
इस पूरे घटनाक्रम के बीच नीतीश कुमार के करीबी नेताओं का कहना है कि अभी किसी भी तरह के बदलाव की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है. जेडीयू नेता गुलाम रसूल बलियावी का बयान 'मैं हूं ना' एक तरह से यह संकेत देता है कि नीतीश कुमार अभी भी राजनीतिक रूप से सक्रिय और निर्णायक भूमिका में हैं.यह संदेश न सिर्फ पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए है, बल्कि विपक्ष और सहयोगियों के लिए भी एक स्पष्ट संकेत है कि अंतिम निर्णय अभी बाकी है.
बहरहाल बिहार की राजनीति में यह समय अनिश्चितता और संभावनाओं का मिश्रण है. क्या भाजपा अपना मुख्यमंत्री देगी, या जेडीयू अपने नेतृत्व को बनाए रखेगी? क्या निशांत कुमार को मौका मिलेगा या यह सिर्फ राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति है? इन सभी सवालों के जवाब आने वाले दिनों में साफ होंगे, लेकिन इतना तय है कि बिहार की सियासत एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ रही है.
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