नई दिल्ली स्थित ईरानी एंबेसी में कार्यक्रम, पबित्रा मार्गेरिटा ने जताई ईरान के प्रति संवेदना
नई दिल्ली, 12 अप्रैल (आईएएनएस)। नई दिल्ली में स्थित ईरानी एंबेसी में चेहल्लुम में केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने भारत सरकार की ओर से ईरान के प्रति संवेदना व्यक्त की।
ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के गुजरने के 40वें दिन शोक सभा (चेहल्लुम) में उपस्थित लोगों ने गहरी संवेदना व्यक्त की। इस मौके पर राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने दोनों देशों के बीच गहरे सभ्यतागत, सांस्कृतिक और लोगों के स्तर पर मजबूत रिश्तों को भी रेखांकित किया।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने नई दिल्ली में ईरान के दूतावास की ओर से आयोजित 40वें दिन (चेहल्लुम) के शोक समारोह में भारत सरकार की ओर से भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
पोस्ट में कहा गया, भारत और ईरान के संबंध गहरी जड़ों वाले सभ्यतागत, सांस्कृतिक और लोगों के आपसी संपर्कों पर आधारित हैं।
वहीं, ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा है, भारत के लोगों ने अपनी करुणा और एकजुटता के माध्यम से यह साबित कर दिया है कि शांति और न्याय चाहने वाले वैश्विक समुदाय के बीच उनका एक विशिष्ट स्थान है, और वे आज के दौर की दुनिया में सह-अस्तित्व, आपसी समझ और जिम्मेदारी का एक आदर्श बन सकते हैं। मैं भारत में अपने सभी प्यारे भाइयों और बहनों का इस्लामिक गणराज्य ईरान के प्रति उनकी सहानुभूति, एकजुटता, मानवता और समर्थन के लिए, और साथ ही भारत सरकार का भी, तहे दिल से आभारी हूं।
शोक सभा में भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा, आज, हम सब यहां एक महान आध्यात्मिक और धार्मिक शख्सियत, एक सम्मानित और गर्वित आध्यात्मिक नेता की शहादत पर अपनी श्रद्धांजलि देने के लिए इकट्ठा हुए हैं। उनका संदेश जोरदार और साफ था और इसने एक मजबूत सबक दिया।
वहीं, कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने कहा, आज हम सब यहां उन्हें याद करने के लिए एकत्रित हुए हैं। वे हमारे लिए एक सीख, एक प्रेरणा और एक मार्गदर्शक रहे हैं। जीवन कैसे जिया जाए, मृत्यु का सामना कैसे किया जाए, बलिदान का क्या अर्थ है और उसे कैसे अपनाया जाए। उन्होंने अपने जीवन के माध्यम से हमें सिखाया है कि जीवन को सार्थक ढंग से कैसे जिया जाए और अपनी नश्वरता को कैसे स्वीकार किया जाए।
--आईएएनएस
एवाई/एबीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
ईरान युद्ध से वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका, आईएमएफ प्रमुख की चेतावनी
वाशिंगटन, 12 अप्रैल (आईएएनएस)। आईएमएफ (अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष) की प्रमुख ने कहा कि ईरान युद्ध ने दुनिया की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका दिया है। इसकी वजह से ऊर्जा की सप्लाई बाधित हो गई है और पूरी दुनिया में कीमतें बढ़ रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि इसका असर आने वाले साल तक महसूस होता रहेगा।
आईएमएफ की मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने सीबीएस न्यूज के एक इंटरव्यू में कहा कि इस रुकावट का पैमाना और अवधि ही इसके दीर्घकालिक परिणामों को निर्धारित करेगी। उन्होंने आगाह किया कि इसके प्रभाव पहले से ही व्यापक हैं।
उन्होंने कहा, “मैं आपको यह बता सकती हूं कि यह झटका बहुत बड़ा है। दुनिया का लगभग 13 प्रतिशत तेल और 20 प्रतिशत गैस, जो सामान्य रूप से सप्लाई होती, वह अब पिछले पांच हफ्तों से अटकी हुई है, जिससे सप्लाई की गंभीर स्थिति समझ आती है।
उन्होंने कहा कि इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है, लेकिन हर देश पर अलग तरह से। हर कोई ऊर्जा का इस्तेमाल करता है। हर कोई बढ़ती कीमतों का असर महसूस कर रहा है और यह अलग-अलग देशों पर अलग तरीके से असर डालता है।
ऊर्जा पर निर्भर देश और संघर्ष के पास वाले इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, जबकि कम आय वाले देशों पर इसका दबाव और भी ज्यादा है क्योंकि उनके पास संसाधन सीमित हैं।
जॉर्जीवा ने बताया कि इसका असर अब कई क्षेत्रों में दिखने लगा है जैसे ईंधन की कमी, खाद की सप्लाई में दिक्कत, ट्रांसपोर्ट और विदेश से आने वाले पैसों पर भी।
उन्होंने कहा कि लोग परेशान हैं, और कई जगहों पर सामान की भारी कमी हो रही है। जरूरी चीजें ही उपलब्ध नहीं हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि एशिया के कई हिस्सों में ऊर्जा की राशनिंग और सप्लाई की कमी से आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। साथ ही चेतावनी दी कि खाद की कीमतें बढ़ने से दुनिया भर में खाने-पीने की चीजें भी महंगी हो सकती हैं।
आईएमएफ प्रमुख ने यह भी कहा कि भले ही संघर्ष रुक जाए, फिर भी इसका असर तुरंत खत्म नहीं होगा। यह असर पहले ही सिस्टम में बैठ चुका है। देरी से हुई सप्लाई और बुनियादी ढांचे को नुकसान लंबे समय तक असर डालता रहेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि कुछ जरूरी ऊर्जा उत्पादन सुविधाओं को पूरी तरह ठीक होने में तीन से पांच साल तक लग सकते हैं।
उन्होंने अमेरिका के बारे में बात करते हुए कहा कि वहां असर बाकी दुनिया के मुकाबले थोड़ा कम है, लेकिन बढ़ती कीमतें महंगाई को कंट्रोल करने की कोशिशों को मुश्किल बना सकती हैं।
उन्होंने कहा कि आईएमएफ को उम्मीद थी कि 2026 में वैश्विक विकास बेहतर होगा, लेकिन अब इस युद्ध की वजह से यह अनुमान कम हो सकता है। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि संघर्ष कितने समय तक चलता है और उत्पादन कितनी जल्दी ठीक होता है।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
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