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US-Iran Talks: शांति वार्ता के नाम पर पाकिस्तान की दोहरी चाल? जानें इस्लामाबाद टॉक से पाकिस्तान ने क्या पाया और क्या खोया?

इस हॉट टॉपिक को आगे बढ़ाने से पहले सबसे जरूरी जानकारी जो साझा की जानी चाहिए वह है शांति वार्ता की आड़ में पाकिस्तान की सऊदी अरब के पूर्वी क्षेत्र (जो ईरान की सीमा के करीब है) में अपने सैनिको की तैनाती। रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान ने लगभग 13,000 सैनिकों के साथ फाइटर स्क्वाड्रन, ड्रोन और अन्य सपोर्ट सिस्टम तैनात किए हैं, जिससे ईरान की संभावित प्रतिक्रिया से निपटा जा सके.

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या पाकिस्तान वास्तव में एक न्यूट्रल मध्यस्थ था? इससे पाकिस्तान को क्या मिला?

शांति वार्ता आयोजित करने के बदले आर्थिक लाभ की बात सामने आ रही है और देने वाला कोई और नहीं बल्कि अमेरिका है। अमेरिकी ने एक तरफ दुनिया को दिखाया की वह शांति के पक्ष में है, सीजफायर कर बातचीत की मेज पर आया, प्रतिनिधि के रूप में पाकिस्तान को आगे किया और अब बातचीत को डिरेल कर अगले हमले की जमीन तैयार कर चुका है। यानी जो अमेरिका मिनाब स्कूल हमले और हॉर्मूज से बैक फूट पर था वह शांति वार्ता को डिरेल कर फिर से वॉर का ग्राउंड गेन कर रहा है।

इस बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान को गुडविल और कूटनीतिक महत्व के प्रति खुद को “शांति समर्थक” दिखाने का मौका मिला. इस तरह एक आतंकी देश ने अपनी बखूबी PR की. पाकिस्तान का यह पीआर सबसे ज्यादा सफल इस मायने में है कि यह छवि भविष्य में भारत के खिलाफ गतिविधियों को ढकने का माध्यम भी बन सकती है।

आंतरिक राजनीति में मुनीर और शाहबाज के फायदे:

इस पूरे घटनाक्रम से जनरल असीम मुनीर और सैन्य प्रतिष्ठान को सबसे ज्यादा लाभ मिला है, वहीं इमरान खान और उनके समर्थकों के लिए किसी झटके से कम नहीं है. इमरान और उनकी पार्टी PTI की लोकप्रियता को इस पीआर एक्सरसाइज से प्रभावित किया जाएगा. इस तरह पाकिस्तान में “हाइब्रिड रेजीम” यानी सैन्य + राजनीतिक व्यवस्था और मजबूत होता देखा जाएगा.

बड़ा रणनीतिक संकेत, पाकिस्तान की भूमिका

ज्योपोलिटक्स में सबसे पहले GEO आता है यानी ज्योग्राफी और उसके बाद पॉलिटिक्स. पाकिस्तान का भौगोलिक महत्व  सत्ता में बैठे उसके नेता और सैन्य नेतृत्व बखूबी जानते हैं. नेतृत्व के लिए यह सिर्फ कूटनीति नहीं, बल्कि सत्ता बनाए रखने की रणनीति भी है। एक तरफ ईरान दूसरी तरफ अमेरिका और तीसरी तरफ सऊदी को साधते हुए पाकिस्तान ने अपने जियो लोकेशन का एक एक फिर शानदार इस्तेमाल किया है।

यह घटनाक्रम दिखाता है कि पाकिस्तान एक साथ कूटनीतिक मध्यस्थ और सैन्य खिलाड़ी दोनों की भूमिका निभा रहा है. “शांति” की छवि और “रणनीतिक तैनाती” साथ-साथ चल रही हैं.

 

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नागपुर में NCB की बड़ी कार्रवाई: ओडिशा-महाराष्ट्र गांजा सप्लाई चेन का खुलासा, 210 किलो बरामद, 4 गिरफ्तार

महाराष्ट्र के नागपुर में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए इंटरस्टेट गांजा तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है. ये गिरोह फिल्मी स्टाइल में गांजा की तस्करी कर रहा था. गुप्त सूचना के आधार पर कार्यवाई करते हुए एनसीबी की टीम ने एक ट्रक को रोककर तलाशी ली, जिसमें मेटल शीट्स के बीच चतुराई से छिपाकर रखा गया करीब 210 किलो गांजा बरामद हुआ. जिसकी कीमत करीब 20 करोड़ मानी जा रहा है.

इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह खेप ओडिशा के संबलपुर इलाके से लाई गई थी और महाराष्ट्र के अलग-अलग शहरों में सप्लाई की जानी थी. एनसीबी को टीम फिलहाल इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं.

देश में कैसे काम करता है गांजा सप्लाई नेटवर्क

भारत में अवैध गांजा सप्लाई का एक बड़ा नेटवर्क पूर्वी राज्यों से संचालित होता है, जिसमें ओडिशा, छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश के जंगली इलाके प्रमुख स्रोत माने जाते हैं. यहां से गांजा छोटे-छोटे गिरोहों के जरिए ट्रकों, निजी वाहनों या मालवाहक गाड़ियों में छिपाकर देश के अलग-अलग हिस्सों में भेजा जाता है. एजेंसियों से बचने के लिए तस्कर अक्सर वैध सामान जैसे सब्जियां, लकड़ी या मेटल के बीच नशे के सामान को छिपाकर इसकी सप्लाई करते हैं. महाराष्ट्र का नागपुर शहर गांजा तस्करी के लिए लॉजिस्टिक हब की तरह इस्तेमाल होता है. जहां से माल को आगे मुंबई, पुणे, नासिक और अन्य शहरों में सप्लाई किया जाता है. इस पूरे नेटवर्क में कई स्तरों पर लोग जुड़े होते हैं.

 

नागपुर में गांजा तस्करी गिरोह का भंडाफोड़

 

युवाओं में बढ़ती खपत और खतरा, स्थानीय पेडलर्स के जरिए फैलता जाल

गांजा को अक्सर ‘कम खतरनाक’ नशा समझने की गलत धारणा के चलते इसकी खपत तेजी से बढ़ रही है, खासकर युवाओं और कॉलेज स्टूडेंट्स के बीच. विशेषज्ञों के मुताबिक लगातार सेवन से मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ता है, जिसमें डिप्रेशन, एंग्जायटी और लत लगने का खतरा बढ़ जाता है. बड़े सप्लायर्स से माल लेकर स्थानीय पेडलर्स इसे छोटे पैकेट्स में बांटकर बेचते हैं, जिससे यह आसानी से आम लोगों तक पहुंच जाता है.

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जांच एजेंसियों का मानना है कि ऐसे नेटवर्क न सिर्फ युवाओं को नशे की ओर धकेलते हैं, बल्कि संगठित अपराध को भी बढ़ावा देते हैं, जिससे समाज पर दीर्घकालिक खतरा पैदा होता है. नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो द्वारा की गई इस कार्रवाई को संगठित ड्रग नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में एक बड़ी सफलता माना जा रहा है. एनसीबी लगातार देशभर में नशे के कारोबार के ख़िलाफ़ अभियान चला रही है. और इनसे जुड़े गिरोहों के खिलाफ ताबड़तोड़ एक्शन भी लिया जा रहा है.

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