ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागर कालीबाफ की इस्लामाबाद यात्रा कोई साधारण सफर नहीं थी, यह एक उड़ान नहीं बल्कि मासूम बच्चों के खून से उठी चीखों का कारवां था। विमान की हर सीट पर रखी मिनाब में मारे गए बच्चों की तस्वीरें सिर्फ यादें नहीं थीं, वे दुनिया की खामोशी पर तमाचा थीं। हर तस्वीर जैसे सवाल कर रही थी कि आखिर इन मासूम जिंदगियों का कसूर क्या था। यह दृश्य सिर्फ भावुक नहीं बल्कि गुस्से से भरा हुआ एक खुला इल्जाम था, यह एक ऐसी पुकार थी जो बताती है कि यह वार्ता अब महज बातचीत नहीं, बल्कि इंसाफ की जंग बन चुकी है।
हम आपको बता दें कि दुनिया के बदलते भू राजनीतिक हालात के बीच इस्लामाबाद में होने जा रही वार्ता अब सिर्फ कूटनीतिक बैठक नहीं बल्कि शक्ति, अविश्वास और खून से सनी यादों का टकराव बन चुकी है। हालात इतने विस्फोटक हैं कि एक छोटी-सी चिंगारी भी पूरे क्षेत्र को फिर से युद्ध की आग में झोंक सकती है। इसी तनावपूर्ण माहौल में ईरान ने एक ऐसा प्रतीकात्मक कदम उठाया जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागर कालीबाफ जब इस्लामाबाद के लिए रवाना हुए, तो उनके विमान की सीटों पर मिनाब हमले में मारे गए बच्चों की तस्वीरें रखी गई थीं। उन तस्वीरों के साथ उनके बैग और गुलाब रखे गए थे। यह कोई सामान्य दृश्य नहीं था बल्कि एक तीखा संदेश था। कालीबाफ ने खुद इन तस्वीरों को अपनी यात्रा के साथी बताया। यह कदम साफ संकेत देता है कि ईरान इन वार्ताओं में भावनात्मक और राजनीतिक दबाव दोनों बनाना चाहता है।
इस्लामाबाद पहुंचते ही माहौल और भी तनावपूर्ण हो गया। पाकिस्तान की सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा, जैसे किसी आपातकाल का माहौल हो। सुरक्षा बलों ने शहर को लगभग सील कर दिया और लोगों को घरों में रहने की सलाह दी गई। यह ऐसा क्षण है जिसे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने निर्णायक बताया है। उनका कहना है कि यह वार्ता तय करेगी कि युद्ध विराम कायम रहेगा या फिर पूरी तरह ढह जाएगा।
हम आपको यह भी बता दें कि ईरान और अमेरिका के बीच अविश्वास की खाई इतनी गहरी है कि बातचीत शुरू होने से पहले ही उसकी नींव कमजोर दिखाई दे रही है। कालीबाफ ने साफ कहा है कि पिछले अनुभवों में अमेरिका ने हमेशा वादाखिलाफी की है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि ईरान के पास सद्भावना तो है लेकिन भरोसा बिल्कुल नहीं।
देखा जाये तो इस पूरे तनाव की जड़ में मिनाब हमला है, जिसने पूरे क्षेत्र को हिला कर रख दिया। यह हमला एक स्कूल पर हुआ, जिसमें एक सौ पैंसठ लोग मारे गए, जिनमें कई बच्चे शामिल थे। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि हमला जानबूझकर स्कूल को निशाना बनाकर किया गया या पास स्थित सैन्य ठिकाने पर हमले का परिणाम था, लेकिन ईरान ने सीधे तौर पर इसके लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है।
ईरान ने यहां तक दावा किया कि अमरीकी नौसेना के अधिकारियों ने टॉमहॉक मिसाइल दागने का आदेश दिया, जिससे यह त्रासदी हुई। दूसरी ओर अमेरिका और इजराइल ने अभी तक इस पर स्पष्ट जिम्मेदारी नहीं ली है, हालांकि जांच जारी होने की बात कही गई है। यही अस्पष्टता इस पूरे मामले को और अधिक विस्फोटक बना रही है।
दूसरी ओर, हालात और जटिल तब हो गए जब खबर आई कि चीन जल्द ही ईरान को नई वायु रक्षा प्रणाली भेज सकता है। यह कदम क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को पूरी तरह बदल सकता है और अमेरिका तथा उसके सहयोगियों के लिए नई चुनौती खड़ी कर सकता है।
इसी बीच लेबनान में भी तनाव चरम पर है। हिजबुल्लाह ने दावा किया है कि उसने इजराइली सैनिकों पर हमला किया और कई इलाकों में राकेट दागे। जवाब में इजराइल ने दक्षिणी लेबनान के शहरों पर हवाई हमले किए। यह घटनाएं साफ संकेत देती हैं कि युद्ध भले ही औपचारिक रूप से रुका हुआ हो, लेकिन जमीनी स्तर पर आग अभी भी धधक रही है।
वहीं, इस्लामाबाद में हो रही वार्ता के सामने कई बड़े मुद्दे हैं। इनमें प्रतिबंध हटाना, क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचा और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे रणनीतिक मार्गों पर नियंत्रण शामिल है। इन मुद्दों पर सहमति बनना आसान नहीं है और यही कारण है कि इस वार्ता को अब तक की सबसे कठिन बातचीत माना जा रहा है।
देखा जाये तो ईरान का कड़ा रुख, अमेरिका का दबाव, चीन की संभावित भूमिका और लेबनान में जारी संघर्ष यह सब मिलकर इस पूरे संकट को और गहरा बना रहे हैं। इस्लामाबाद अब सिर्फ बातचीत का मंच नहीं बल्कि वैश्विक शक्ति संघर्ष का केंद्र बन चुका है।
बहरहाल, अब दुनिया की नजरें इसी बात पर टिकी हैं कि क्या यह वार्ता शांति का रास्ता खोलेगी या फिर एक और विनाशकारी अध्याय की शुरुआत करेगी। क्योंकि अगर यह मौका हाथ से निकल गया, तो अगली खबर शायद किसी और त्रासदी की होगी।
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Kidney Stone Diet: किडनी स्टोन यानी गुर्दे की पथरी एक आम लेकिन दर्दनाक समस्या है. यह तब बनती है जब शरीर में कुछ खनिज और नमक जमा होकर खतरनाक रूप ले लेते हैं. अगर समय रहते खानपान पर ध्यान न दिया जाए तो यह समस्या बढ़ सकती है. इसलिए सही डाइट अपनाना बेहद जरूरी है. चलिए जानते हैं किडनी में स्टोन होने पर क्या खाना चाहिए और क्या नहीं? इसके बारे में विस्तार से जानते हैं.
किडनी स्टोन में क्या न खाएं? (What not to eat in kidney stone)
ज्यादा नमक वाली चीजों से करें परहेज
अगर आप किडनी स्टोन से परेशान हैं, तो ज्यादा नमक खाना आपकी हालत को बिगाड़ सकता है. नमक शरीर में कैल्शियम की मात्रा बढ़ाता है, जिससे स्टोन बनने का खतरा बढ़ जाता है. पैकेज्ड फूड, चिप्स, नमकीन और फास्ट फूड से दूरी बनाएं. खाने में नमक कम रखें और प्राकृतिक स्वाद को अपनाने की कोशिश करें.
ऑक्सालेट से भरपूर फूड्स कम करें
कुछ खाद्य पदार्थों में ऑक्सालेट की मात्रा ज्यादा होती है. यह कैल्शियम के साथ मिलकर स्टोन बना सकता है. पालक, चुकंदर, चॉकलेट, नट्स और चाय जैसे फूड्स का सेवन सीमित मात्रा में करें. पूरी तरह बंद करना जरूरी नहीं, लेकिन संतुलन बहुत जरूरी है.
ज्यादा प्रोटीन भी बन सकता है कारण
अधिक मात्रा में नॉनवेज और प्रोटीन लेना भी किडनी स्टोन की समस्या को बढ़ा सकता है. खासकर रेड मीट, अंडे और सीफूड का ज्यादा सेवन यूरिक एसिड बढ़ाता है. इससे स्टोन बनने की संभावना बढ़ जाती है. इसलिए प्रोटीन लें, लेकिन सीमित मात्रा में.
मीठी चीजों से दूरी रखें
ज्यादा मीठा खाना या शुगर वाले ड्रिंक्स पीना भी किडनी के लिए ठीक नहीं है. सॉफ्ट ड्रिंक्स और पैक्ड जूस में मौजूद फ्रक्टोज स्टोन बनने का खतरा बढ़ाता है. इनकी जगह आप नारियल पानी, नींबू पानी या सादा पानी पी सकते हैं.
विटामिन C का अधिक सेवन न करें
विटामिन C शरीर के लिए जरूरी है, लेकिन इसकी ज्यादा मात्रा भी नुकसान पहुंचा सकती है. अधिक विटामिन C शरीर में ऑक्सालेट में बदल जाता है, जिससे स्टोन बन सकता है. इसलिए सप्लीमेंट्स लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.
पानी कम पीना सबसे बड़ी गलती
किडनी स्टोन के मरीजों के लिए पानी सबसे जरूरी चीज है. कम पानी पीने से शरीर में खनिज जमा होने लगते हैं. दिनभर में कम से कम 8 से 10 गिलास पानी जरूर पिएं. इससे स्टोन बनने का खतरा कम होता है और छोटे स्टोन बाहर निकलने में मदद मिलती है.
क्या खाएं ताकि राहत मिले? (What to eat in kidney stone)
जहां कुछ चीजों से परहेज जरूरी है, वहीं कुछ चीजें फायदेमंद भी होती हैं.
- नींबू पानी
- नारियल पानी
- ताजे फल और सब्जियां
- फाइबर युक्त आहार
- ये सभी किडनी को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं.
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Disclaimer: इस खबर को सामान्य जानकारी के आधार पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए एक्सपर्ट की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यज नेशन इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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