हॉस्पिटल बिल होगा कम? IRDAI ने बनाई एक सब कमेटी, जानें क्या है इसका काम
मौजूदा समय में बढ़ता हॉस्पिटल बिल लोगों के लिए एक बड़ी समस्या है। यह चुनौती उस समय और बड़ी हो जाती है जब इंश्योरेंस कंपनियों की तरफ से क्लेम ढिलाई देखने को मिलती है। इसकी को देखते हुए IRDAI ने सब-कमेटी बनाई है।
Video: न सुपरपावर, न कोई कॉस्ट्यूम! फिर भी बचा चुके हैं 57 जानें, मिलिए असली सुपरहीरो से
Blood Donor Neeraj Kumar Story: अक्सर व्यक्तिगत दुख इंसान को तोड़ देते हैं. लेकिन बिहार के गया जिले के नीरज कुमार ने अपनी त्रासदी को हजारों परिवारों की मुस्कान में बदल दिया. शेरघाटी प्रखंड के दखिन खाप गांव निवासी 33 वर्षीय नीरज आज पूरे सूबे के लिए रक्तवीर की मिसाल बन चुके हैं. यह सफर एक दर्दनाक मोड़ से शुरू हुआ. दसवीं की पढ़ाई के दौरान समय पर रक्त न मिलने के कारण नीरज की बड़ी बहन का निधन हो गया. उस अभाव और पीड़ा ने नीरज के भीतर एक संकल्प को जन्म दिया. खून की कमी से अब कोई और जान नहीं जाएगी. 18 साल की उम्र में पहली बार रक्तदान करने वाले नीरज अब तक 57 बार ब्लड डोनेट कर चुके हैं. इतना ही नहीं नीरज ने अपनी टीम के साथ मिलकर अब तक 10 हजार से अधिक लोगों की जान बचाई है. उनकी इस निस्वार्थ सेवा के लिए उन्हें साल 2017 में राष्ट्रपति पुरस्कार से भी नवाजा गया. मानवता के प्रति उनका समर्पण यहीं नहीं रुकता. उन्होंने मृत्यु के पश्चात अपना पूरा शरीर भी दधीचि देहदान समिति को दान कर दिया है. ताकि उनकी हड्डियां और अंग शोध व दूसरों के काम आ सकें. आज नीरज न केवल खुद हर 90 दिन पर रक्तदान करते हैं, बल्कि युवाओं को भी इस महादान के लिए प्रेरित कर रहे हैं.
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