'IPL फिल्म जैसा है, PSL में ज्यादा कॉम्पिटिशन है...' पाकिस्तान के सपोर्ट में उतरा स्टार क्रिकेटर, भारत के खिलाफ उगली आग
IPL vs PSL : इंडियन प्रीमियर लीग और पाकिस्तान सुपर लीग की तुलना अक्सर की जाती है. दुनिया भर के तमाम क्रिकेटर अक्सर इसके बारे में अपने विचार साझा करते रहते हैं. आईपीएल अच्छा है या फिर पीएसएल अच्छा है, इस पर अक्सर डिबेट होती रहती है. अब इस विषय पर एक बार फिर से एक स्टार क्रिकेटर ने बड़ा बयान दिया है. ये क्रिकेटर कोई और नहीं बल्कि साउथ अफ्रीका के बाएं हाथ के सलामी बल्लेबाज राइली रूसो हैं.
साउथ अफ्रीका के इस क्रिकेटर ने अब आईपीएल और पीएसल की तुलना करते हुए बड़ा बयान दिया है. उन्होंने पाकिस्तान सुपर लीग का समर्थन किया है, जबकि इंडियन प्रीमियर लीग के खिलाफ जहर उगला है. पीएसएल को अच्छा बताने के बाद उन्होंने आईपीएल को सिर्फ एक मूवी की तरह बताया है. उन्होंने क्या कहा है, आइए इस बारे में जानते हैं.
आईपीएल और पीएसएल पर क्या बोले रूसो
राइली रूसो ने इस बारे में बात करते हुए कहा कि, 'आईपीएल एक बहुत लंबा टूर्नामेंट है और पाकिस्तान सुपर लीग ज्यादा कॉम्पैक्ट है, जहां कॉम्पिटिशन बहुत ज्यादा कड़ा होता है. जाहिर है कि, आईपीएल के पीछे पूरा बॉलीवुड है, इसलिए यह असली क्रिकेट से कहीं ज्यादा एक फिल्म जैसा है'.
????BIG STATEMENT BY RILEE ROSSOUW ON IPL VS PSL????
— Ajay Jadeja (@AjayJadeja171) April 11, 2026
"IPL is a very long tournament & PSL is a much more compact, where the competition is a lot more fierce. IPL obviously has the whole Bollywood behind it, so it's a lot more of a movie than actual cricket". pic.twitter.com/5ttSrIcHbL
पीएसएल में दो टीमों के लिए खेले राइली रूसो
राइली रूसो पाकिस्तान सुपर लीग में इस समय क्वेटा ग्लैडिएटर्स की टीम के साथ जुड़े हुए हैं. इससे पहले वो कई सीजन मुल्तान सुलान के लिए भी खेल चुके हैं. उन्होंने पीएसएल के इतिहास की सबसे तेज सेंचुरी भी लगाई थी. उन्होंने 41 गेंद में शतक जड़ा था.
पीएसएल में राइली रूसो का प्रदर्शन
उन्होंने पाकिस्तान सुपर लीग में 99 मैचों की 93 पारियों में 3 शतक और 11 अर्धशतकों के साथ 2366 रन बनाए हैं. इस दौरान उनका औसत 31.45 का रहा है, जबकि उनकी स्ट्राइक रेट 144.70 रही है. उनके बल्ले से टूर्नामेंट में 238 चौके और 93 छक्के रहे हैं. उनका उच्तम स्कोर 121 रहा है. वो पीएसएल के अलावा दुनिया भर के तमाम क्रिकेट लीग में खेलते हैं.
How well did this man play what a player and more importantly great man ????????????kushi you a legend ???? pic.twitter.com/C4X78SODBX
— Rilee Rossouw (@Rileerr) July 23, 2024
राइली रूसो ने आईपीएल में दिखाया दम
राइली रूसो इसके साथ ही आईपीएल में भी खेल चुके हैं. उन्होंने दिल्ली कैपिटल्स, पंजाब किंग्स और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के लिए इंडियन प्रीमियर लीग खेला है. वो 2014 से लेकर 2024 तक आईपीएल खेले चुके हैं.
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— Pretoria Capitals (@PretoriaCapsSA) January 8, 2025
इस दौरान उनके बल्ले से 22 मैचों की 22 पारियों में 2 अर्धशतक के साथ कुल 473 रन बनाए हैं. इस दौरान उनके बल्ले से 45 चौके और 25 छक्के निकले हैं. उनका टूर्नामेंट में औसत 23.65 और स्ट्राइर रेट 153.57 का रहा है.
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ईरान संघर्ष पर रे डालियो की बड़ी चेतावनी: होर्मुज जलडमरूमध्य में अभी सबसे खतरनाक दौर आना बाकी
नई दिल्ली, 11 अप्रैल (आईएएनएस)। दुनिया के जाने-माने निवेशक और ब्रिजवाटर एसोसिएट्स के संस्थापक रे डालियो ने ईरान से जुड़े मौजूदा संघर्ष को लेकर बड़ी चेतावनी दी है। उनका कहना है कि इस टकराव का सबसे गंभीर और निर्णायक चरण अभी बाकी है और होर्मुज जलडमरूमध्य पर होने वाली अंतिम लड़ाई ही यह तय करेगी कि इस युद्ध में कौन जीतेगा और कौन हारेगा।
अमेरिकी अरबपति डालियो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि इस संघर्ष में शामिल सभी पक्ष जानते हैं कि असली और निर्णायक लड़ाई अभी नहीं लड़ी गई है। उनके अनुसार, यह फाइनल बैटल ही युद्ध का परिणाम तय करेगी और इसका असर लंबे समय तक वैश्विक शक्ति संतुलन पर पड़ेगा।
उन्होंने बातचीत के जरिए समाधान की संभावना को लगभग खारिज करते हुए कहा कि इस स्थिति में समझौते बेकार साबित हो सकते हैं। उन्होंने कहा है कि आगे आने वाला दौर इस संघर्ष का सबसे खतरनाक चरण हो सकता है।
डालियो के मुताबिक, पूरे संघर्ष का केंद्र एक अहम सवाल पर टिका है—क्या अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित व्यापारिक आवाजाही सुनिश्चित कर सकता है या नहीं। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका ऐसा करने में विफल रहता है, तो इसे उसकी हार मानी जाएगी, भले ही ईरान को थोड़ी भी नियंत्रण शक्ति मिल जाए।
उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी स्थिति के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इसमें खाड़ी देशों के साथ संबंधों को नुकसान, वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता, सहयोगी देशों का भरोसा कम होना और डॉलर की वैश्विक स्थिति पर खतरा शामिल है। इससे निवेश और पूंजी का रुख भी बदल सकता है।
पांच शताब्दियों के साम्राज्यवादी चक्रों के अपने अध्ययन के आधार पर, डालियो ने कहा कि अगर अमेरिका इस संकट को संभालने में विफल रहता है, तो यह स्थिति 1956 के स्वेज नहर संकट जैसी हो सकती है, जिसने ब्रिटेन की वैश्विक ताकत को कमजोर कर दिया था।
उन्होंने यह भी बताया कि इसी तरह का पैटर्न 18वीं शताब्दी में डच साम्राज्य और 17वीं शताब्दी में स्पेनिश साम्राज्य के पतन के दौरान भी देखा गया था, जब किसी अहम व्यापारिक मार्ग पर नियंत्रण खोने से वैश्विक शक्ति संतुलन बदल गया।
डालियो के मुताबिक, ईरान-होर्मुज संकट सिर्फ एक क्षेत्रीय संघर्ष नहीं है, बल्कि इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय शक्ति संतुलन पर गहरा असर पड़ सकता है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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