कैंडिस ओवेन्स और डोनाल्ड ट्रंप के बीच की दरार अब महज़ मतभेद नहीं, बल्कि एक खुली जंग बन चुकी है। जो ओवेन्स सालों तक ट्रंप की सबसे मुखर रक्षक और समर्थक मानी जाती थीं, अब उन्होंने ट्रंप के खिलाफ ऐसा मोर्चा खोला है जिसे नज़रअंदाज़ करना नामुमकिन है। नीतिगत असहमतियों से शुरू हुआ यह सिलसिला अब बेहद निजी और कड़वे वार-पलटवार तक पहुँच गया है। ओवेन्स की हालिया 'दो-टूक' टिप्पणी ने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक तहलका मचा दिया है। ट्रंप के कट्टर समर्थकों के खेमे में आई यह टूट अब सुर्खियां बटोर रही है, क्योंकि जिस आवाज़ ने कभी ट्रंप का साम्राज्य खड़ा करने में मदद की थी, वही अब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर खड़ी है।
सालों तक, ओवेन्स ट्रम्प के सबसे मुखर समर्थकों में से एक थीं। इसी इतिहास की वजह से यह पल कुछ अलग सा महसूस हो रहा है। यह सिर्फ़ आलोचना नहीं है। यह एक साफ़-साफ़ अलगाव जैसा लगता है। जहाँ टकर कार्लसन और मेगिन केली जैसी अन्य कंज़र्वेटिव हस्तियाँ ट्रम्प की बयानबाज़ी को लेकर चिंताएँ जता रही हैं, वहीं ओवेन्स ने ज़्यादा सीधा रास्ता अपनाया है। उनके शब्दों ने सिर्फ़ पलटवार ही नहीं किया। उन्होंने ट्रम्प के लहजे, उनके फ़ैसलों और शायद उनके पुराने सहयोगियों के बीच उनकी मौजूदा हैसियत को भी चुनौती दी है। ओवेन्स ने कोई लंबा-चौड़ा स्पष्टीकरण नहीं दिया, न ही वे किसी लंबी बहस में उलझीं। इसके बजाय, उन्होंने सिर्फ एक लाइन पोस्ट की, जो अपनी लंबाई से कहीं ज्यादा गहरा घाव कर गई। ओवेन्स ने सीधे ट्रंप की उम्र पर हमला करते हुए लिखा: शायद अब वक्त आ गया है कि दादाजी को वृद्धाश्रम भेज दिया जाए। उनका यह छोटा सा प्रहार ट्रंप के लिए सबसे तीखा जवाब माना जा रहा है, जिसने उनके समर्थकों और विरोधियों दोनों को हैरान कर दिया है।
उनकी यह प्रतिक्रिया तब आई जब ट्रंप ने ओवेन्स और अन्य लोगों को निशाना बनाते हुए एक लंबा और आक्रामक बयान जारी किया। उन्होंने लिखा मुझे पता है कि टकर कार्लसन, मेगिन केली, कैंडिस ओवेन्स और एलेक्स जोन्स ये सभी सालों से मुझसे क्यों लड़ रहे हैं; खासकर इस वजह से कि उन्हें लगता है कि ईरान जो आतंकवाद का सबसे बड़ा सरकारी प्रायोजक है के पास परमाणु हथियार होना बहुत अच्छी बात है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इन सभी में एक बात समान है: इनका IQ (बुद्धि-स्तर) बहुत कम है। ये बेवकूफ़ लोग हैं; ये खुद भी यह बात जानते हैं, इनके परिवार वाले भी जानते हैं, और बाकी सभी लोग भी जानते हैं! ज़रा इनके अतीत पर नज़र डालिए, इनके रिकॉर्ड देखिए। इनमें वह काबिलियत नहीं है जो होनी चाहिए, और न ही कभी इनमें वह काबिलियत थी!"
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भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने वाशिंगटन स्थित व्हाइट हाउस में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात की। तीन दिवसीय अमेरिकी दौरे पर गए मिस्री और रुबियो के बीच हुई इस बैठक को काफी "सकारात्मक और उत्पादक" माना जा रहा है। दोनों नेताओं ने भारत और अमेरिका के बीच व्यापार, रक्षा और रणनीतिक संबंधों पर विस्तार से चर्चा की। मार्को रुबियो अगले महीने भारत की यात्रा पर आने वाले हैं, जिसे द्विपक्षीय रिश्तों को और मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। बैठक में मौजूद भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस मुलाकात की जानकारी साझा करते हुए लिखा, "व्हाइट हाउस में विक्रम मिस्री का स्वागत है! मार्को रुबियो के साथ एक सफल बैठक हुई, जिसमें व्यापार, रक्षा और क्वाड जैसे अहम मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया गया।
भारतीय दूतावास के अनुसार, मिसरी और लैंडौ ने द्विपक्षीय प्राथमिकताओं पर चर्चा की तथा पारस्परिक चिंता के क्षेत्रीय एवं वैश्विक घटनाक्रम पर भी अपने विचार साझा किए। हूकर ने कहा कि उन्होंने और मिसरी ने इस बात पर चर्चा की कि भारत और अमेरिका रक्षा एवं अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में किस तरह और निकटता से मिलकर काम कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि हम अमेरिकियों और भारतीयों, दोनों को अधिक सुरक्षित एवं समृद्ध बनाने के व्यावहारिक तरीके तलाश रहे हैं, जिनमें क्वाड के जरिये किए जा रहे प्रयास भी शामिल हैं। अमेरिका में भारत के दूतावास ने कहा कि हूकर और मिसरी ने पिछले साल दिसंबर में हुई विदेश कार्यालय परामर्श वार्ता के बाद से भारत-अमेरिका द्विपक्षीय एजेंडे की समीक्षा की। दोनों राजनयिकों ने पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रम के साथ-साथ आपसी हितों से जुड़े क्षेत्रीय मुद्दों पर भी अपने आकलन साझा किए। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे डी वेंस के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ईरानी नेताओं के साथ वार्ता के लिए इस्लामाबाद जा रहा है। युद्धरत पक्ष, पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुए दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमत हुए हैं।
मिसरी ने अमेरिकी सुरक्षा एजेंसी एफबीआई के निदेशक काश पटेल के साथ भी मुलाकात की। मिसरी एवं पटेल ने वाशिंगटन में हुई बैठक के दौरान आतंकवाद, संगठित अपराध और मादक पदार्थों से निपटने में सहयोग पर चर्चा की। अमेरिका में भारतीय दूतावास ने बृहस्पतिवार रात सोशल मीडिया पर एक ‘पोस्ट’ में कहा, ‘‘विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने आज एफबीआई (संघीय जांच ब्यूरो) के निदेशक काश पटेल से मुलाकात की। दोनों के बीच आतंकवाद, संगठित अपराध और मादक पदार्थों से निपटने में भारत-अमेरिका के बीच मजबूत सहयोग पर सार्थक विचार-विमर्श हुआ।
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