भारत को हर 1-2 साल में वैश्विक अस्थिरता के लिए तैयार रहना चाहिए : अर्थशास्त्री
नई दिल्ली, 10 अप्रैल (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के सदस्य और एक्सिस बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री नीलकंठ मिश्रा ने शुक्रवार को कहा कि भारत को हर एक से दो साल में वैश्विक अस्थिरता के लिए तैयार रहना चाहिए और भू-राजनीतिक तनाव में मौजूदा विराम का उपयोग लंबे समय से लंबित संरचनात्मक सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए करना चाहिए।
मिश्रा ने कहा कि मौजूदा विराम विद्युतीकरण, आवास, शहरी अवसंरचना और पर्यटन में सुधारों को गति देकर विकास में लचीलापन लाने का अवसर है।
विश्लेषक ने कहा कि अस्थिरता अब छिटपुट नहीं बल्कि संरचनात्मक है, लेकिन साथ ही कहा कि भारत इतिहास के पिछले दौरों की तुलना में अधिक मजबूत सुरक्षा उपायों के साथ अस्थिरता के दौर में प्रवेश कर रहा है।
कोटक प्राइवेट की एक प्रेस रिलीज में मिश्रा ने कहा, इतिहास में किसी भी अन्य समय की तुलना में, हम इससे निपटने के लिए कहीं बेहतर तरीके से तैयार हैं।
उन्होंने एक वरिष्ठ नीति निर्माता के साथ हुई बातचीत को याद करते हुए कहा, जिन्होंने आज के माहौल की तुलना 1989-93 की अशांत अवधि से की थी।
हालांकि, मिश्रा ने कहा कि भारत के पास अब अधिक गहन पूंजी बाजार, अधिक मजबूत बाह्य संतुलन और अधिक नीतिगत विश्वसनीयता है।
मिश्रा ने तर्क दिया कि ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम के आह्वान के बाद तत्काल तनाव बढ़ने की आशंकाएं भले ही कम हो गई हों, लेकिन व्यापक आर्थिक संकटों का चक्र अभी समाप्त होने की संभावना नहीं है।
एक्सिस बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री ने विद्युतीकरण को एक रणनीतिक प्राथमिकता बताया और कहा कि भारत अपने समकक्षों की तुलना में तेल और गैस संकटों के प्रति कहीं अधिक संवेदनशील है क्योंकि यहां ऊर्जा खपत का बहुत कम हिस्सा विद्युत ऊर्जा का है। उन्होंने कहा कि विद्युतीकरण में तेजी लाने और ऊर्जा की बेहतर कीमतों के साथ, भू-राजनीति के प्रति जोखिम कम होगा और दक्षता में सुधार होगा।
उन्होंने वैश्विक अस्थिरता से काफी हद तक अप्रभावित घरेलू मांग पैदा करने के लिए आवास और शहरी अवसंरचना पर निर्णायक नीतिगत कार्रवाई का भी आग्रह किया।
अर्थशास्त्री ने कहा कि होटल एफएसआई और शहरी क्षमता में सुधार से लागत कम होगी, प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित होंगे।
--आईएएनएस
एबीएस/
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क्या असम में ‘Silent Voter’ ने बिगाड़ा BJP का खेल? ज्यादा वोटिंग से इस पार्टी को हो सकता है फायदा...
Assam 85 percent voting: असम विधानसभा चुनाव 2026 में इस बार वोटिंग ने सबको चौंका दिया है. चुनाव आयोग के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक राज्य में करीब 85% से ज्यादा मतदान दर्ज हुआ है. बता दें ये पिछले चुनाव से ज्यादा है. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतने बड़े स्तर पर लोग घरों से वोट देने क्यों निकले और क्या यह 'Silent Voter' किसी एक पार्टी का खेल बदल सकता है?
क्या है ‘Silent Voter’ और क्यों है अहम?
'Silent Voter' यानी वो मतदाता जो खुलकर अपनी पसंद जाहिर नहीं करता लेकिन मतदान के दिन चुपचाप वोट डालकर नतीजों को प्रभावित करता है. राजनीतिक जानकार मानते हैं कि ऐसे वोटर अक्सर सर्वे और एग्जिट पोल को भी चौंका देते हैं. इस बार असम में बढ़ी वोटिंग को इसी वर्ग से जोड़कर देखा जा रहा है.
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अचानक क्यों बढ़ गई वोटिंग?
राजनीतिक विशलेषक असम में इस बार ज्यादा मतदान के पीछे कई वजहें मान रहे हैं. प्रदेश के राजनीतिक पंडितों की मानें तो पहली बार वोट देने वाले युवाओं की बड़ी संख्या से इस बार वोटिंग प्रतिशत में इजाफा हुआ है. इसके अलावा लोगों ने स्थानीय मुद्दों जैसे रोजगार, महंगाई और पहचान की राजनीति को ध्यान में रखते हुए मतदान किया है.
क्या ज्यादा वोटिंग से होगी कांग्रेस की वापसी?
ज्यादा वोटिंग से किस पार्टी को फायदा होगा ये तो नतीजों के बाद पता चलेगा. फिलहाल सत्तारूढ़ Bharatiya Janata Party और विपक्षी Indian National Congress के बीच सीधी टक्कर दिख रही है. बीजेपी तीसरी बार सरकार बनाने का दावा कर रही है, जबकि कांग्रेस 10 साल बाद अपनी वापसी की आस लगाए बैठी है.
Silent Voter का किसे मिल सकता है फायदा?
अब सवाल ये है कि इतनी ज्यादा वोटिंग किसके पक्ष में जाएगी. यहां बता दें कि अगर यह वोटिंग सरकार के समर्थन में हुई है तो Himanta Biswa Sarma के नेतृत्व में BJP को फायदा मिल सकता है. लेकिन अगर यह वोटिंग बदलाव की चाहत से प्रेरित है तो कांग्रेस और विपक्ष को बढ़त मिल सकती है. यानी 'Silent Voter' इस बार असली गेमचेंजर साबित हो सकता है.
क्या ज्यादा वोटिंग के पीछे असम के क्षेत्रीय गणित भी करेगा असर?
असम की राजनीति को आमतौर पर तीन हिस्सों में समझा जाता है. पहला ऊपरी असम, यहां हिंदू वोट अधिक हैं और इस एरिया को बीजेपी अपना गढ़ मानते हैं. दूसरा मध्य असम या बोडोलैंड और तीसरा निचला असम जो बांग्लादेश के पास है और यहां मुस्लिम वोटर अधिक हैं.
4 मई को नतीजे बताएंगे सच्चाई, बीजेपी या कांग्रेस कौन 'धुरंधर' ?
फिलहाल सभी दल अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं, लेकिन असली तस्वीर 4 मई 2026 को वोटों की गिनती के बाद ही साफ होगी. तब तक एक बात तय है इस बार का 'Silent Voter' असम की राजनीति में बड़ा उलटफेर कर सकता है.
FAQ
Q1. असम में इस बार वोटिंग प्रतिशत कितना रहा?
उत्तर. करीब 85% के आसपास मतदान दर्ज किया गया है.
Q2. ‘Silent Voter’ किसे कहा जाता है?
उत्तर. ऐसे मतदाता जो अपनी पसंद जाहिर नहीं करते, लेकिन चुपचाप वोट डालते हैं.
Q3. ज्यादा वोटिंग का फायदा किसे मिलता है?
उत्तर. यह इस बात पर निर्भर करता है कि वोटिंग समर्थन में है या बदलाव के लिए.
Q4. असम में मुख्य मुकाबला किनके बीच है?
उत्तर. BJP और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर मानी जा रही है.
Q5. नतीजे कब आएंगे?
उत्तर. 4 मई 2026 को वोटों की गिनती होगी.
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