Terror Threat: क्या सुरक्षित हैं अमेरिकी-ईरानी प्रतिनिधि? इस्लामाबाद में सुरक्षा को लेकर दुनिया में खलबली
Big Security Alert: पाकिस्तान 11 अप्रैल 2026 को एक ऐसी बैठक की मेजबानी करने जा रहा है, जो वैश्विक राजनीति की दिशा बदल सकती है। अमेरिका और ईरान के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडलों के बीच होने वाली इस वार्ता के लिए इस्लामाबाद को चुना गया है।
हालांकि, पाकिस्तान के मौजूदा आंतरिक सुरक्षा हालात और आतंकी खतरों को देखते हुए वॉशिंगटन से लेकर तेहरान तक चिंता की लहर है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या पाकिस्तान इन दोनों महाशक्तियों के प्रतिनिधियों को पूरी सुरक्षा मुहैया कराने में सक्षम है?
अमेरिकी सुरक्षा टीम का इस्लामाबाद में डेरा
हालात की गंभीरता को देखते हुए अमेरिका ने अपनी ओर से कोई कसर नहीं छोड़ी है। करीब 30 सदस्यीय अमेरिकी सुरक्षा टीम पहले ही इस्लामाबाद पहुँच चुकी है, जो बैठक स्थल और प्रतिनिधिमंडल के रुकने की जगह की बारीकी से जांच कर रही है।
पाकिस्तान सरकार ने इस बैठक के लिए 'सिक्स-लेयर' सुरक्षा घेरा तैयार करने का दावा किया है, जिसमें सेना और अर्धसैनिक बलों की तैनाती शामिल है। बावजूद इसके, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान में कट्टरपंथी समूहों की मौजूदगी इस बैठक के लिए एक बड़ा जोखिम बनी हुई है।
ट्रंप की चेतावनी और ईरान का रुख
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने पहले ही संकेत दे दिए हैं कि वे होर्मुज स्ट्रेट में ईरान की गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं। ऐसे में इस बैठक के जरिए शांति बहाली की कोशिश की जा रही है। दूसरी ओर, ईरान भी अपने प्रतिनिधियों की सुरक्षा को लेकर बेहद सतर्क है।
पाकिस्तान ने दावा किया है कि इस मध्यस्थता के जरिए वह दुनिया में अपनी साख बचाना चाहता है, लेकिन अगर सुरक्षा में जरा सी भी चूक हुई, तो पाकिस्तान के लिए इसके परिणाम विनाशकारी हो सकते हैं।
वैश्विक बिरादरी की पैनी नजर
पूरी दुनिया इस समय पाकिस्तान की ओर देख रही है। यह बैठक केवल दो देशों के बीच की बातचीत नहीं है, बल्कि यह पाकिस्तान की वैश्विक छवि की परीक्षा भी है। इजरायली सेना की लेबनान में बढ़ती सक्रियता और मिडिल-ईस्ट में जारी युद्ध के बीच, इस्लामाबाद में होने वाली यह चर्चा बेहद संवेदनशील मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान को न केवल बाहरी खतरों से बल्कि अंदरूनी गद्दारों से भी सावधान रहना होगा, जो इस कूटनीतिक प्रयास को विफल करना चाहते हैं।
ईरान की अमेरिका को दो टूक: 'जब तक लेबनान में युद्धविराम नहीं, तब तक कोई बात नहीं', इस्लामाबाद वार्ता से हटने की धमकी
Iran US ceasefire talks: मिडल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ईरान ने एक बड़ा कूटनीतिक फैसला लिया है। ईरान ने अमेरिका के साथ पाकिस्तान के इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता से पीछे हटने की धमकी दी है। तेहरान ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक लेबनान में इजरायल के हमले तुरंत नहीं रुकते, तब तक वह वार्ता की मेज पर नहीं आएगा। इसके साथ ही ईरान ने उन मीडिया रिपोर्टों को भी खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि उसका प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंच चुका है।
बातचीत के लिए लेबनान बना सबसे बड़ा रोड़ा
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसियों 'फार्स' और 'तस्नीम' के अनुसार, आधिकारिक सूत्रों ने उन खबरों को पूरी तरह गलत बताया है जिनमें दावा किया गया था कि ईरानी दल बातचीत के लिए पाकिस्तान पहुंच गया है। सूत्रों का कहना है कि जब तक अमेरिका लेबनान में युद्धविराम को लेकर अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी नहीं करता और इजरायल अपने हमले बंद नहीं करता, तब तक बातचीत निलंबित रहेगी।
इजरायली हमलों से बढ़ा आक्रोश
लेबनान में बुधवार को इजरायली हमलों में कम से कम 182 लोगों की मौत हो गई, जिसके बाद हालात और बिगड़ गए हैं। इजरायल ने ईरान समर्थित हिजबुल्लाह समूह के खिलाफ अपने अभियान को तेज कर दिया है। इसके जवाब में ईरान ने सामरिक रूप से महत्वपूर्ण 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को बंद कर दिया है, जिससे पहले से ही नाजुक चल रहा सीजफायर अब पूरी तरह टूटने की कगार पर है।
10-सूत्रीय प्रस्ताव पर विवाद
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का कहना है कि हॉर्मुज को बंद करना इजरायली हमलों का मुंहतोड़ जवाब है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का तर्क है कि लेबनान में युद्ध को समाप्त करना सीजफायर समझौते का हिस्सा था। हालांकि, इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू और डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि लेबनान का मुद्दा इस अस्थायी समझौते में शामिल नहीं था।
हिजबुल्लाह कमांडर के सहयोगी की मौत
इस बीच, इजरायल ने गुरुवार को दावा किया कि उसने हिजबुल्लाह नेता नईम कासिम के करीबी सहयोगी अली यूसुफ हर्षी को मार गिराया है। इजरायल का आरोप है कि हिजबुल्लाह नागरिक इलाकों का इस्तेमाल सैन्य गतिविधियों के लिए कर रहा है। दूसरी ओर, स्थानीय निवासियों और अधिकारियों ने इजरायल के इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि रिहायशी इमारतों पर बिना किसी पूर्व चेतावनी के हमले किए जा रहे हैं।
इस्लामाबाद वार्ता पर सस्पेंस बरकरार
ईरान के इस सख्त रुख के बाद इस्लामाबाद में होने वाली प्रस्तावित वार्ता पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं। ईरान का कहना है कि लेबनान में शांति स्थापित हुए बिना अमेरिका के साथ किसी भी शांति वार्ता में शामिल होने की उसकी कोई योजना नहीं है। अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अमेरिका और इजरायल इस कूटनीतिक गतिरोध को कैसे सुलझाते हैं।
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