कांडला बंदरगाह ने हरित शिपिंग की दिशा में कदम बढ़ाते हुए मेथनॉल बंकरिंग की शुरुआत की
नई दिल्ली, 9 अप्रैल (आईएएनएस)। समुद्री क्षेत्र को डीकार्बोनाइज करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए, दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी (कांडला पोर्ट) ने अपनी मेथनॉल बंकरिंग क्षमताओं को बढ़ाया है। गुरुवार को जारी एक सरकारी बयान के अनुसार, इस कदम से यह भारत के ऊर्जा परिवर्तन प्रयासों और वैश्विक ग्रीन शिपिंग कॉरिडोर में एक अहम भूमिका निभाने वाले के तौर पर स्थापित हो गया है।
बयान में कहा गया है कि यह पहल समुद्री क्षेत्र के 2050 तक नेट-जीरो उत्सर्जन हासिल करने के लक्ष्य के अनुरूप है। इसका मुख्य फोकस शिपिंग में ग्रीनहाउस गैसों की तीव्रता को कम करने के लिए ई-मेथनॉल और ई-अमोनिया जैसे कम कार्बन वाले वैकल्पिक ईंधनों को अपनाने पर है।
केंद्रीय बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, कांडला बंदरगाह पर हासिल यह मील का पत्थर, ग्रीन शिपिंग की दिशा में वैश्विक बदलाव का नेतृत्व करने के भारत के संकल्प को दर्शाता है। मेथनॉल जैसे स्वच्छ ईंधनों को अपनाकर और भविष्य के लिए तैयार बुनियादी ढांचा बनाकर, हम अपने समुद्री क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय स्थिरता लक्ष्यों के साथ जोड़ रहे हैं, साथ ही इसकी दक्षता और प्रतिस्पर्धात्मकता को भी बढ़ा रहे हैं। दुनिया के शीर्ष समुद्री राष्ट्रों में से एक बनने की हमारी यात्रा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।
भारत के पश्चिमी तट पर स्थित, कांडला बंदरगाह लंबे समय से कार्गो के रूप में ग्रे मेथनॉल का संचालन करता आ रहा है, और इसके पास पहले से ही इसके अनुकूल बुनियादी ढांचा मौजूद है, जिसमें टैंक भंडारण, पाइपलाइन और जेट्टी शामिल हैं। इसी नींव पर आगे बढ़ते हुए, बंदरगाह अब सक्रिय रूप से मेथनॉल बंकरिंग की विशेष क्षमताओं को विकसित कर रहा है।
तैयारी का आकलन करने के लिए, कांडला बंदरगाह ने डीएनवी मैरीटाइम एडवाइजरी सर्विसेज को मौजूदा बुनियादी ढांचे और नियामक व सुरक्षा ढांचों की पर्याप्तता का मूल्यांकन करने का कार्य सौंपा। इस मूल्यांकन के बाद, मेथनॉल बंकरिंग के लिए इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ पोर्ट्स एंड हार्बर्स (आईएपीएच) के पोर्ट रेडीनेस लेवल (पीआरएल) पैमाने पर बंदरगाह को लेवल 6 का दर्जा दिया गया।
2 अप्रैल को, कांडला बंदरगाह ने बुनियादी ढांचे और परिचालन प्रोटोकॉल को प्रमाणित करने के लिए, तट से जहाज तक मेथनॉल ईंधन भरने का एक परीक्षण सफलतापूर्वक आयोजित किया। यह अभ्यास उद्योग जगत के भागीदारों के सहयोग से किया गया, जिनमें स्टॉल्ट टैंकर, जे.एम. बक्सी, एगिस वोपाक, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड और दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी शामिल थे।
इस परीक्षण ने बंकर हस्तांतरण प्रक्रियाओं, सुरक्षा प्रणालियों और नियामक अनुपालन जैसे प्रमुख तत्वों को सफलतापूर्वक प्रमाणित किया। डीएनवी की टीम ने मौके पर जाकर सत्यापन किया, और इस बात की पुष्टि की कि यह प्रक्रिया मेथनॉल बंकरिंग के लिए वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप है।
बंदरगाह अब 2028-29 तक लगभग 500 केटीपीए (हजार टन प्रति वर्ष) नवीकरणीय गैर-जैविक मूल के ईंधन (आरएफएनबीओ) के अनुरूप ई-मेथनॉल की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रहा है।
बयान में बताया गया है कि इस आपूर्ति से एशिया-यूरोप व्यापार गलियारे पर संचालित होने वाले गहरे समुद्र के दोहरे-ईंधन वाले जहाजों को सहायता मिलने की उम्मीद है। किनारे से जहाज तक ट्रायल के सफल होने के बाद, कांडला बंदरगाह अगले चरण में जहाज से जहाज तक मेथनॉल बंकरिंग करने की योजना बना रहा है, जिससे उसकी ऑपरेशनल क्षमताएं और मजबूत होंगी। बयान में कहा गया है कि कांडला बंदरगाह की प्रगति, भारत को उभरते हुए ग्रीन शिपिंग कॉरिडोर में एक अहम केंद्र के तौर पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, जिससे एक ज्यादा साफ, ज्यादा मजबूत और भविष्य के लिए तैयार समुद्री इकोसिस्टम बनाने में मदद मिलेगी।
सोनोवाल ने कहा, हमारे बंदरगाह इनोवेशन और सस्टेनेबिलिटी के केंद्र बन रहे हैं। मेथनॉल बंकरिंग जैसी पहलें न सिर्फ उत्सर्जन कम करती हैं, बल्कि निवेश, टेक्नोलॉजी सहयोग और रोजगार सृजन के नए अवसर भी खोलती हैं, जिससे उभरते हुए वैश्विक समुद्री क्षेत्र में भारत का सार्थक योगदान और मजबूत होता है। यह 2050 तक नेट जीरो उत्सर्जन हासिल करने के प्रयासों को और मजबूत करता है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक विजन है।
--आईएएनएस
एससीएच
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
पाकिस्तान में अदालत ने नाबालिग ईसाई लड़की की शादी को दी मान्यता, बिशप और समुदाय ने जताई चिंता
इस्लामाबाद, 9 अप्रैल (आईएएनएस)। पाकिस्तान में बिशप (ईसाई धर्म के धर्मगुरु) चिंतित हैं क्योंकि फेडरल कॉन्स्टिट्यूशनल कोर्ट ने एक ईसाई नाबालिग लड़की की शादी को मान्यता दी है। पाकिस्तान कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस (पीसीबीसी) ने कहा कि अदालतें 18 साल से कम उम्र में शादी पर लगे कानून को हमेशा समान रूप से लागू नहीं कर रही हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, पीसीबीसी ने इसे कानून के अलग-अलग तरीके से पालन करना बेहद परेशान करने वाला बताया।
पीसीबीसी के अध्यक्ष बिशप सैमसन शुकार्डिन ने कहा कि जब ईसाई लड़कियों का अपहरण होता है, तो उनके मामलों में कानून के अनुसार सही फैसला नहीं लिया जाता। लाहौर के कैथोलिक आर्कबिशप खालिद रहमत ओएफएम कैप ने भी एक अलग बयान में अदालत के फैसले पर नाराजगी जताई।
ईसाई समुदाय नाराज है क्योंकि पाकिस्तान के फेडरल कॉन्स्टिट्यूशनल कोर्ट की दो सदस्यीय बेंच ने 25 मार्च को यह फैसला सुनाया कि ईसाई लड़की मारिया बीबी और मुस्लिम शख़्स शहरयार अहमद की शादी सही है। अदालत ने बीबी के पिता शाहबाज मसीह की याचिका खारिज कर दी। पिता का कहना था कि उनकी बेटी, जो लगभग 13 साल की थी, जुलाई 2025 में अवैध रूप से हिरासत में ली गई थी। अदालत ने कहा कि कानून नाबालिग शादी को दंडनीय मानता है, लेकिन ऐसे विवाह को अमान्य नहीं माना जाता।
पांच अप्रैल को ईसाई समुदाय ने ईस्टर मनाते हुए प्रार्थना की कि ईसाई लड़कियों को अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और जबरन शादी से बचाया जाए। ये प्रार्थनाएं इसी हालिया अदालत के फैसले के बाद की गई थीं।
यूरेशिया रिव्यू की रिपोर्ट के अनुसार, 25 मार्च के अदालत के फैसले के बाद पाकिस्तान में ईसाई समुदाय ने नाबालिग लड़की की शादी को मान्यता देने के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन किया। समुदाय के नेताओं ने कहा कि इस फैसले से और अधिक ईसाई और हिंदू लड़कियों का अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और जबरन शादी होने का खतरा बढ़ सकता है।
चार अप्रैल को, पाकिस्तान के हैदराबाद में 200 से अधिक ईसाइयों ने एक विरोध रैली में हिस्सा लिया। यह रैली कैथोलिक चर्च के मानवाधिकार संगठन नेशनल कमीशन फॉर जस्टिस एंड पीस (एनसीजेपी) ने आयोजित की और बिशप साइमन शुकार्डिन ने इसका नेतृत्व किया।
ईसाई समूहों का कहना है कि इस तरह की व्याख्या नाबालिगों की शादी को मान्यता देती है, जो कि पाकिस्तान के कानून, नैतिक मूल्यों और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के खिलाफ है। वे इसे न्यायपालिका के रूढ़िवादी दृष्टिकोण का प्रतीक मानते हैं। इस फैसले की न केवल देश में आलोचना हुई है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता जताई गई है। ब्रिटेन के संसद सदस्यों ने भी इस निर्णय पर चिंता व्यक्त की है।
माइनॉरिटी कंसर्न पाकिस्तान के संपादक और जस्टिस एंड पीस कमीशन ऑफ पाकिस्तान के पूर्व कार्यकारी सचिव आफताब अलेक्जेंडर मुगल ने यूरेशिया रिव्यू में लिखा कि, “पाकिस्तान की न्यायिक स्वतंत्रता का सम्मान करते हुए, ब्रिटेन में पाकिस्तान के अल्पसंख्यक मामलों के सभी पार्टी पार्लियामेंटरी ग्रुप (एपीपीजी) ने कहा कि यह मामला उन पैटर्न में आता है जो अच्छी तरह से दस्तावेजीकृत हैं, जिसमें धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों, खासकर ईसाई और हिंदू लड़कियों का अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और जबरन शादी शामिल हैं।”
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
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