केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने भूटान में ऊर्जा और सांस्कृतिक सहयोग पर चर्चा की
थिम्पू, 9 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने गुरुवार को भूटान के प्रधानमंत्री त्शेरिंग तोबगे से मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच ऊर्जा सुरक्षा, जलविद्युत सहयोग, सांस्कृतिक और लोगों के बीच संबंध मजबूत करने पर चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री तोबगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा, मनोहर लाल का स्वागत करके खुशी हुई। हमने ऊर्जा सुरक्षा और जलविद्युत सहयोग को मजबूत करने पर बात की, ताकि भूटान और भारत के बीच स्थायी दोस्ती और बढ़े।
केंद्रीय मंत्री ने भूटान के साथ हर स्तर पर सहयोग करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भारत और भूटान का साझेदारी अनोखी और उदाहरणीय है, जो आपसी विश्वास, सद्भावना और सम्मान पर आधारित है।
मनोहर लाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, भूटान दौरे के दौरान मैंने प्रधानमंत्री त्शेरिंग तोबगे से शिष्टाचार भेंट की। इस बैठक में हमने भारत और भूटान के बीच गहरे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और लोगों के बीच संबंध और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। भारत और भूटान का साझेदारी अनोखी और उदाहरणीय है, जो आपसी विश्वास, सद्भावना और सम्मान पर आधारित है।
उन्होंने आगे कहा, हमारी साझा आध्यात्मिक विरासत और लोगों के बीच गर्मजोशी भरे संबंध इस विशेष साझेदारी की खासियत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेबरहुड फर्स्ट नीति के अनुसार, भारतीय सरकार हर स्तर पर भूटान के साथ साझेदारी करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
मनोहर लाल गुरुवार को चार दिन के दौरे पर भूटान पहुंचे। भूटान के ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधन मंत्री ल्योनपो जेम त्शेरिंग और भारत के भूटान राजदूत संदीप आर्य ने हवाई अड्डे पर उनका स्वागत किया।
विद्युत मंत्रालय के बयान में कहा गया, यह दौरा दोनों देशों की साफ-सुथरी ऊर्जा में सहयोग, सीमा पार बिजली व्यापार बढ़ाने और भूटान के सामाजिक-आर्थिक विकास में सहयोग की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। जलविद्युत सहयोग भारत-भूटान संबंधों की नींव है, जो सतत ऊर्जा उत्पादन और मजबूत आर्थिक संबंधों के जरिए दोनों पक्षों को लाभ देता है।
इससे पहले मंगलवार को विदेश मंत्रालय (एमईए) के अतिरिक्त सचिव (उत्तर) मुनू महावर ने भूटान के विदेश मंत्री ल्योंपो डी एन धुंग्येल से मुलाकात की और विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंध मजबूत करने पर चर्चा की।
भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव (उत्तर) मुनू महावर ने भूटान के विदेश मंत्री ल्योंपो डी एन धुंग्येल से मुलाकात की। भारत-भूटान संबंधों में विश्वास की सराहना की और आपसी प्राथमिकता वाले विभिन्न क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने पर विचार साझा किए।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
कतर में पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी, एलएनजी सप्लाई पर करेंगे अहम बातचीत
नई दिल्ली, 9 अप्रैल (आईएएनएस)। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी गुरुवार को अपनी दो दिवसीय यात्रा पर दोहा पहुंचे। हवाई अड्डे पर भारत के कतर स्थित राजदूत विपुल और कतर एनर्जी के अधिकारियों ने उनका स्वागत किया।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी का यह दौरा पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच हुआ है। मंत्री पुरी यहां ईरान संघर्ष के कारण प्रभावित हुई लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) की सप्लाई को लेकर अहम बातचीत करेंगे। वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव के बावजूद भारत घरेलू उपभोक्ताओं के लिए गैस की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है।
कतर की सरकारी कंपनी कतर एनर्जी ने पिछले महीने लंबी अवधि के एलएनजी सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट्स पर फोर्स मेजर लागू कर दिया था, जिससे इटली, बेल्जियम, दक्षिण कोरिया और चीन जैसे देशों को जाने वाली सप्लाई प्रभावित हुई थी। हालांकि, भारत का नाम इस सूची में नहीं था, लेकिन कतर से एलएनजी खरीदने वाले प्रमुख देशों में भारत भी शामिल है।
कतर एनर्जी के सीईओ साद अल-काबी के अनुसार, फरवरी के अंत में संघर्ष शुरू होने के बाद से कतर पर ईरान के हमलों के कारण ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा है। इससे देश की करीब 17 प्रतिशत एलएनजी निर्यात क्षमता प्रभावित हुई है।
हमलों में कतर के 14 एलएनजी प्लांट्स में से 2 और 2 गैस-टू-लिक्विड (जीटीएल) सुविधाओं में से एक को नुकसान पहुंचा है, जिससे करीब 12.8 मिलियन टन प्रति वर्ष उत्पादन ठप हो गया है। उन्होंने कहा कि इसकी मरम्मत में तीन से पांच साल का समय लग सकता है।
इस संकट से कतर को हर साल करीब 20 अरब डॉलर के नुकसान का अनुमान है और इससे वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। खासकर यूरोप और एशिया के देशों में।
इससे पहले मार्च में प्रधानमंत्री मोदी ने कतर के अमीर तमीम बिन हमद अल थानी से बात की थी और ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों की कड़ी निंदा की थी। दोनों नेताओं ने होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया था।
इस बीच, भारतीय कंपनियां एलएनजी की आपूर्ति के लिए अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और रूस जैसे वैकल्पिक स्रोतों की ओर रुख कर रही हैं, जिसका उपयोग मुख्य रूप से औद्योगिक क्षेत्र में होता है।
भारत ने 2025 में करीब 25.5 मिलियन टन एलएनजी आयात किया था और सरकार का लक्ष्य 2030 तक देश के कुल ऊर्जा मिश्रण में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत तक बढ़ाने का है।
--आईएएनएस
एवाई/एबीएम
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