सोना-चांदी सस्ते में खरीदने का मौका; कीमतें करीब 8,000 रुपए तक घटीं
नई दिल्ली, 9 अप्रैल (आईएएनएस)। सोने और चांदी की कीमतों में गुरुवार को गिरावट देखने को मिली है, जिससे दोनों कीमती धातुओं का दाम क्रमश: करीब 1,200 रुपए और 8,000 रुपए कम हो गया है।
इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के मुताबिक, 24 कैरेट सोने का दाम 1,184 रुपए कम होकर 1,49,937 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जो कि पहले 1,51,121 रुपए प्रति 10 ग्राम था।
22 कैरेट सोने की कीमत 1,38,427 रुपए प्रति 10 ग्राम से कम होकर 1,37,342 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई है। 18 कैरेट सोने का दाम कम होकर 1,12,453 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जो कि पहले 1,13,341 रुपए प्रति 10 ग्राम था।
सोने के साथ चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली है।
चांदी का दाम 7,883 रुपए कम होकर 2,36,158 रुपए प्रति किलो हो गया है, जो कि पहले 2,44,041 रुपए प्रति किलो था।
वायदा बाजारों में सोने और चांदी में मिलाजुला कारोबार हुआ है। खबर लिखे जाने तक सोने के 05 जून 2026 के कॉन्ट्रैक्ट का दाम 0.47 प्रतिशत बढ़कर 1,52,488 रुपए हो गया है और चांदी के 05 मई 2026 के कॉन्ट्रैक्ट का दाम 0.60 प्रतिशत कम होकर 2,38,483 रुपए हो गया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी में बिकवाली देखी गई। सोना 0.11 प्रतिशत की मामूली कमजोरी के साथ 4,770 डॉलर प्रति औंस और चांदी 74 डॉलर प्रति औंस पर थी।
जानकारों के मुताबिक, सोने और चांदी में गिरावट की वजह हाल की तेजी बाद आई मुनाफावसूली है, इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने भी सोने और चांदी पर दबाव बनाने का दाम किया है।
सोने और चांदी ने बीते एक साल में शानदार रिटर्न दिया है। इस दौरान सोने की कीमत में करीब 54 प्रतिशत और चांदी की कीमत में 144 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।
--आईएएनएस
एबीएस/
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नीतीश कुमार ने दिल्ली पहुंचते ही कर दिया बड़ा खुलासा, जानें किस भूमिका की तैयारी को लेकर कही बड़ी बात
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दिल्ली पहुंचने के साथ ही राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. गुरुवार को नीतीश कुमार दिल्ली पहुंच गए हैं. खास बात यह है कि राष्ट्रीय राजधानी पहुंचते ही नीतीश कुमार ने एक बड़ा खुलासा कर दिया है. जी हां नीतीश ने उस राज से पर्दा उठा दिया है कि वह राज्यसभा सांसद के तौर पर शपथ कब लेंगे. दिल्ली में वह दो दिन रहेंगे. इस बीच बिहार में नई सरकार को लेकर भी अहम चर्चा होना है. ये चर्चा एनडीए की बैठक में होगी. लेकिन इससे पहले नीतीशु कमार ने बताया दिया है कि वह कौन सी भूमिका रहेंगे और उसकी तैयारी भी शुरू कर दी है.
नीतीश कुमार ने कहा है कि वह 10 अप्रैल को राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ लेने वाले हैं. हाल ही में उन्होंने अपनी एमएलसी सीट से इस्तीफा दे दिया था, जिससे यह साफ संकेत मिला कि बिहार में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है.
दिल्ली पहुंचते ही क्या बोले नीतीश कुमार, बता दिया कब लेंगे शपथ?#nitishkumar #Bihar pic.twitter.com/joxSDoYyH9
— Dheeraj sharma (@dheer23) April 9, 2026
20 साल बाद केंद्र की राजनीति में वापसी
लगभग दो दशकों तक बिहार की राजनीति का केंद्र रहे नीतीश कुमार अब एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने जा रहे हैं. 2005 से लेकर अब तक (बीच में कुछ महीनों को छोड़कर) उन्होंने मुख्यमंत्री पद संभाला और राज्य में अपनी एक अलग पहचान बनाई. दिल्ली पहुंचने के बाद उन्होंने कहा, “20 साल तक वहां (बिहार) में रहे हैं, अब यहां भी काम करेंगे,” जिससे उनके नए राजनीतिक अध्याय की झलक मिलती है.
NDA में नेतृत्व को लेकर चर्चाएं तेज
नीतीश कुमार के इस कदम के बाद बिहार में नए मुख्यमंत्री को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. हालांकि, सत्तारूढ़ गठबंधन ने स्पष्ट किया है कि सरकार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की ही रहेगी और नीतियों में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा. इससे संकेत मिलता है कि सत्ता का ढांचा तो स्थिर रहेगा, लेकिन नेतृत्व में बदलाव संभव है.
‘नीतीश मॉडल’ जारी रहने का दावा
बिहार सरकार के मंत्री विजय चौधरी ने साफ कहा है कि राज्य में आगे भी “नीतीश मॉडल” ही लागू रहेगा. उनके मुताबिक, पिछले 20 वर्षों में बिहार ने जो विकास की दिशा पकड़ी है, वह इसी मॉडल का परिणाम है. उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के विकास का यही रास्ता आगे भी जारी रहेगा, चाहे नेतृत्व में बदलाव क्यों न हो.
परिवार की भूमिका पर भी चर्चा
इस राजनीतिक बदलाव के बीच निशांत कुमार का नाम भी चर्चा में है. हाल ही में उनके पार्टी से जुड़ने की खबरों ने अटकलों को और हवा दी है कि क्या आने वाले समय में उन्हें राजनीति में बड़ी भूमिका दी जा सकती है. हालांकि, इस पर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है.
बिहार की राजनीति में नया अध्याय
नीतीश कुमार की दिल्ली वापसी को बिहार की राजनीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है. यह न केवल नेतृत्व परिवर्तन का संकेत है, बल्कि राज्य और केंद्र के बीच राजनीतिक संतुलन को भी नए सिरे से परिभाषित कर सकता है.
बदलाव के बीच स्थिरता की कोशिश
कुल मिलाकर, नीतीश कुमार का यह कदम बिहार की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत का संकेत देता है. जहां एक ओर नेतृत्व में बदलाव की संभावना है, वहीं दूसरी ओर “नीतीश मॉडल” को जारी रखने की बात कही जा रही है. अब सबकी नजर इस पर है कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा और यह बदलाव राज्य की राजनीति को किस दिशा में ले जाएगा.
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