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गर्मियों में ताकत का डोज है ये हेल्दी स्नैक, स्वाद ऐसा कि बच्चे भी कर जाएंगे चट

Sabudana vada kaise banaye: गर्मी का मौसम आते ही खान-पान में बदलाव शुरू हो जाता है और लोग हल्का, हेल्दी और ठंडक देने वाला भोजन तलाशते हैं. ऐसे में विंध्य क्षेत्र में साबूदाना वड़ा एक खास पहचान रखता है. यह न सिर्फ स्वाद में लाजवाब होता है, बल्कि शरीर को ठंडक देने और ऊर्जा बनाए रखने में भी मदद करता है. डॉक्टरों के अनुसार, साबूदाना वड़ा कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होता है, जो तुरंत ऊर्जा देता है और लंबे समय तक पेट भरा रखता है. यह पाचन में भी मदद करता है. अगर आप स्वाद और सेहत दोनों चाहते हैं, तो यह देसी नाश्ता आपके लिए परफेक्ट है. वीडियो में देखें इसे कैसे बनाएं.

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अमेरिकी अजूबा ‘घोस्ट मर्मर’:ईरान की पहाड़ियों में फंसे पायलट को सीआईए ने इसकी मदद से खोजा, क्वांटम मैग्नेटोमेट्री और एआई पर आधारित है उपकरण

अमेरिका ने पिछले हफ्ते ईरान में फंसे अपने पायलट को सुरक्षित निकालकर दुनिया को चौंकाया था। राष्ट्रपति ट्रम्प ने इसे भूसे के ढेर में सुई ढूंढ़ने जैसा बताया था। अब खुलासा हुआ है कि सीआईए ने पहाड़ियों में छिपे पायलट को उसके दिल की धड़कन से खोजा था। इसके लिए पहली बार ‘घोस्ट मर्मर’ नाम का गोपनीय उपकरण इस्तेमाल हुआ। अमेरिकी अखबार ‘न्यूयॉर्क पोस्ट’ ने सूत्रों के हवाले से ये दावा किया है। ये तकनीक क्वांटम मैग्नेटोमेट्री पर आधारित है। इसमें धड़कन के इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फिंगरप्रिंट खोजे जाते हैं। एआई सॉफ्टवेयर बैकग्राउंड का शोर हटाता है। कार्यक्रम से जुड़े सूत्र ने कहा, अगर आपका दिल धड़क रहा है तो हम आपको ढूंढ़ लेंगे। सूत्र के अनुसार, लापता पायलट ने लोकेटर बीकन चालू किया था। पर सटीक लोकेशन स्पष्ट नहीं थी। निर्णायक क्षण तब आया, जब घोस्ट मर्मर ने उसे ढूंढ़ा। दोनों तकनीकें उपयोगी थीं। बीकन सिग्नल भेजने के लिए वह बाहर आया। यहां सिग्नल से ज्यादा अह​मियत बाहर निकलने की थी। सूत्र ने कहा कि घोस्ट मर्मर की गोपनीयता के चलते सब लोग अब तक हैरान हैं कि पायलट वास्तव में कैसे मिला। लोग ये भी नहीं जानते कि इतनी दूरी से ये तकनीक संभव है। वो सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है ‘घोस्ट मर्मर’ की टेक्नोलॉजी क्या है? क्वांटम मैग्नेटोमेट्री। इंसान का दिल धड़कते वक्त बहुत हल्का इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिग्नल पैदा करता है। खास क्वांटम सेंसर (जैसे डायमंड एनवी सेंटर) इन्हें पकड़ते हैं। मेडिकल में दिल की धड़कन के लिए ‘मर्मर’ शब्द इस्तेमाल होता है। ये संकेत कोई भी माप सकता है क्या? संकेत बेहद हल्के होते हैं। सामान्यत: छाती से सटे सेंसर ही पकड़ पाते हैं। हालांकि, क्वांटम मैग्नेटोमेट्री के क्षेत्र में प्रगति, खासकर कृत्रिम हीरों में सूक्ष्म दोषों पर आधारित सेंसर्स ने शारीरिक तौर पर छुए बिना ये संकेत पहचानना संभव बना दिया है। कोई रिसर्च है या ​सीआईए ने ही किया है? अमेरिका में एमआईटी, जापान में टोक्यो इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, जर्मनी में मैक्स प्लांक जैसे कई बड़े संस्थान रिसर्च कर रहे हैं। हार्वर्ड के प्रो. रोनाल्ड वाल्सवर्थ ने 2024 में चूहे को छुए बिना धड़कन पहचानने में सफलता पाई। जनवरी, 2026 में 3 यूरोपीय रिसर्च ग्रुप्स ने एनवी डायमंड मैग्नेटोमीटर से इंसानी दिल की धड़कन पकड़ी। इन प्रयोगों में दूरी नैनोमीटर से मिलीमीटर ही थी। लंबी दूरी की ट्रैकिंग विकसित होने का उल्लेख कहीं नहीं है। सीआईए की तकनीक किसने बनाई है? द पोस्ट के अनुसार, ‘घोस्ट मर्मर’ को लॉकहीड मार्टिन की गुप्त इकाई ‘स्कंक वर्क्स’ ने बनाया है। ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टरों पर परीक्षण सफल रहा। एफ-35 लड़ाकू विमानों में इस्तेमाल संभव है। ईरान में इसका प्रयोग कैसे हुआ? पायलट वीराने में था। घोस्ट मर्मर के लिए ये आदर्श था। साफ माहौल। कम इलेक्ट्रोमैग्नेटिक हस्तक्षेप। मानव संकेत भी बहुत ज्यादा नहीं। रात में शरीर व रेगिस्तानी जमीन के तापमान के अंतर ने और मजबूत पुष्टि की। ट्रम्प ने कहा था कि पायलट को 40 मील दूर से देखा। ये स्पष्ट नहीं है कि ये दूरी घोस्ट मर्मर की रेंज है या किसी और उपकरण की। ये तकनीक कहीं भी प्रयोग हो सकती है? नहीं, शांत, दूरदराज और कम भीड़भाड़ वाले इलाकों में यह तकनीक सबसे बेहतर काम करती है। इसकी प्रोसेसिंग में भी काफी समय लगता है। क्या इससे प्राइवेसी का खतरा भी है? ये तकनीक पूरी तरह विकसित होती है तो बिना किसी डिवाइस के भी व्यक्ति की मौजूदगी का पता लगा सकती है। इससे निजता (प्राइवेसी) को लेकर गंभीर सवाल उठ सकते हैं।

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चारधाम यात्रा की तैयारियां तेज, CM धामी ने दिए अधिकारियों को दिए कड़े निर्देश, यात्रा को सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने पर जोर, भ्रामक प्रचार पर FIR का आदेश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस साल की चारधाम यात्रा को हर लिहाज से बेहतर बनाने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने साफ कहा है कि देवभूमि उत्तराखंड की जीवन रेखा कही जाने वाली इस यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित, स्वच्छ और तकनीकी रूप से मजबूत किया जाए। इसका मकसद साफ है, देश-विदेश से आने … Thu, 09 Apr 2026 22:43:57 GMT

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