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पेरेंटिंग- जॉब के साथ बच्चे को वक्त नहीं दे पाते:वो जिद्दी हो रहा है, अपनी डिमांड पूरी करने के लिए ब्लैकमेल करता है, क्या करें?

सवाल- मैं दिल्ली से हूं। मेरा 8 साल का एक बेटा है। मैं और मेरे हसबैंड, दोनों कॉरपोरेट जॉब करते हैं। काम की वजह से हम बच्चे को पर्याप्त समय नहीं दे पाते थे। इस कमी को पूरा करने के लिए हम अक्सर उसे महंगे गिफ्ट्स, गैजेट्स दे दिया करते थे। उसकी हर इच्छा भी पूरी करते थे। लेकिन कुछ समय से हमें ऐसा लग रहा है कि बेटे की उम्मीदें बढ़ती जा रही हैं। वह अपनी बात मनवाने के लिए इमोशनली ब्लैकमेल भी करने लगा है। हमें अब अपनी गलती का एहसास भी हो रहा है, लेकिन ये समझ नहीं आ रहा कि इसे ठीक कैसे करें। सही संतुलन कैसे बनाएं? प्लीज हेल्प। एक्सपर्ट: डॉ. अमिता श्रृंगी, साइकोलॉजिस्ट, फैमिली एंड चाइल्ड काउंसलर, जयपुर जवाब- सवाल पूछने के लिए शुक्रिया। यह सवाल आज कई वर्किंग पेरेंट्स की स्थिति को दिखाता है। वर्किंग पेरेंट्स के लिए काम और परिवार के बीच संतुलन बनाना चैलेंजिंग होता है। ऐसे में बच्चे को पर्याप्त समय न दे पाने पर गिल्ट होना स्वाभाविक है। बहुत से पेरेंट्स इस कमी को पूरा करने के लिए बच्चों को महंगे खिलौने, गैजेट्स या पैसे देकर खुश करने की कोशिश करते हैं। शुरुआत में यह तरीका आसान लगता है। लेकिन धीरे-धीरे बच्चे के मन में यह धारणा बन जाती है कि प्यार का मतलब सिर्फ भौतिक चीजें या सुख-सुविधाएं हैं। हालांकि अच्छी बात है कि आपने समय रहते इस बदलाव को नोटिस किया है। ऐसे में समझदारी से इस स्थिति को मैनेज किया जा सकता है। वर्किंग पेरेंट्स को गिल्ट क्यों होता है? गिल्ट के और कई कारण हो सकते हैं- ‘गिल्ट पेरेंटिंग’ का बच्चे पर प्रभाव गिल्ट की वजह से पेरेंट्स बच्चे को जरूरत से ज्यादा चीजें, छूट या लाड़-प्यार देते हैं। शुरुआत में यह ‘प्यार’ लगता है, लेकिन लंबे समय में इसका असर बच्चे की सोच, व्यवहार और इमोशनल डेवलपमेंट पर पड़ता है। ग्राफिक में देखिए गिल्ट पेरेंटिंग का बच्चे पर क्या असर होता है- आइए, अब ‘गिल्ट पेरेंटिंग’ को मैनेज करने के तरीके समझते हैं। वर्किंग पेरेंट्स ‘गिल्ट’ कैसे मैनेज करें? वर्किंग पेरेंट्स के लिए ‘गिल्ट’ पूरी तरह खत्म करना संभव नहीं है। लेकिन इसे मैनेज किया जा सकता है। आइए इसे प्रैक्टिकल तरीके से समझते हैं- कुल मिलाकर इस समय बच्चे को ज्यादा समय, ज्यादा अटेंशन और ज्यादा साथ की जरूरत है। पेरेंटिंग गिल्ट को मैनेज करने के लिए कुछ बातों का खास ख्याल रखें। इसे ग्राफिक में देखिए- बच्चे के लिए पेरेंट्स का साथ जरूरी बच्चे के लिए पेरेंट्स का साथ उसकी इमोशनल, मेंटल और सोशल ग्रोथ की बुनियाद होता है। यह उसकी पर्सनैलिटी को आकार देता है। बच्चे को समय की कमी कैसे समझाएं? 6–10 साल के बच्चे में समझने की क्षमता विकसित हो रही होती है। ऐसे में उन्हें अपने काम के बारे में तर्क से समझाया जा सकता है। इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखें- अंत में यही कहूंगी कि बच्चों के लिए सबसे बड़ी जरूरत महंगे गिफ्ट्स नहीं, बल्कि माता-पिता का समय, अटेंशन और प्यार है। अगर पेरेंट्स रोज थोड़ी देर भी बिना मोबाइल, बिना काम के बच्चे के साथ बिताते हैं तो यह बच्चे के लिए बहुत मायने रखता है। ………………….. पेरेंटिंग से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए पेरेंटिंग- 10 साल की बेटी एकदम मुंहफट है: जो मुंह में आए, बोल देती है, ये उसकी साफगोई है या संवेदना की कमी, उसे कैसे समझाएं 10 साल की उम्र में बच्चे अपने विचारों को साफ तरीके से रखना सीख रहे होते हैं। उनमें लॉजिकल ब्रेन विकसित हो रहा होता है। लेकिन 'सोशल इंटेलिजेंस' (सामाजिक समझ) अभी पूरी तरह मेच्यौर नहीं हुई होती है। पूरी खबर पढ़िए…

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बुक-रिव्यू- एक दिन की सफलता के पीछे बरसों की मेहनत:रातोंरात कुछ नहीं होता, कैसे चलें कि थकें नहीं, हारें नहीं, निराशा न घेरे

किताब का नाम: जीवन के अद्भुत रहस्य (‘लाइफ्स अमेजिंग सीक्रेट्स’ का हिंदी अनुवाद) लेखक: गौर गोपाल दास अनुवाद: राजेश्वर वशिष्ठ प्रकाशक: पेंगुइन मूल्य: 225 रुपए हर कोई बेहतर जीवन चाहता है, जहां रिश्तों में मधुरता, काम में संतुलन और भीतर सुकून हो। लेकिन दौड़ती-भागती जिंदगी में यह संतुलन मिलना मुश्किल है। मशहूर लाइफ कोच और संत गौर गोपाल दास की किताब ‘जीवन के अद्भुत रहस्य’ यह संतुलन बनाना सिखाती है। इस किताब में लेखक आधुनिक जीवन के तनावों से निपटने के लिए सरल उपाय बताते हैं। वह बताते हैं कि कैसे पर्सनल, प्रोफेशनल और सोशल लाइफ को संतुलित रखा जा सकता है। किताब का मकसद और अहमियत किताब हमें सिखाती है- नीचे दिए ग्राफिक से किताब से मिलने वाले 8 सबक के बारे में जानिए- किताब चार बड़े विषयों पर आधारित है, जो ‘जीवन के चार पिलर’ हैं। आइए इन्हें समझते हैं। 1. पर्सनल लाइफ: सकारात्मकता और कृतज्ञता लेखक किताब में बताते हैं- 2. रिलेशनशिप: संवेदनशीलता और क्षमा लेखक बताते हैं- लेखक ने रिश्ते मजबूत करने के कुछ आसान तरीके बताए हैं- 3. वर्किंग लाइफ: हेल्दी कॉम्पिटिशन और सेल्फ इम्प्रूवमेंट वर्किंग लाइफ में सफलता के लिए गौर गोपाल दास सलाह देते हैं- 4. सामाजिक योगदान: निस्वार्थ सेवा किताब यह भी सिखाती है- यह किताब क्यों पढ़नी चाहिए? 'जीवन के अद्भुत रहस्य' ऐसी किताब है, जो जिंदगी को आसान और सार्थक बनाने का रास्ता दिखाती है। यह बताती है कि छोटे-छोटे कदमों से जीवन संतुलित किया जा सकता है। अगर आप शांति और मकसद ढूंढ रहे हैं, तो यह किताब आपके लिए है। किताब के बारे में मेरी राय ……………… ये बुक रिव्यू भी पढ़िए बुक रिव्यू- दिमाग में आने वाली हर बात सच नहीं: ज्यादा सोचने से ज्यादा दुख होगा, ओवरथिंकिंग न करें, समझने के लिए ये किताब पढ़ें ओवरथिंकिंग एक ऐसी समस्या है, जो व्यक्ति को अंदर-ही-अंदर खोखला कर सकती है। इसके कारण लोग भविष्य की चिंता में परेशान होते हैं या अतीत के पछतावे में जलते रहते हैं। जोसेफ नूयेन की किताब इसी मानसिक जाल को तोड़ने का एक मॉडर्न मैनुअल है। आगे पढ़िए…

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  Sports

दोस्त की बहन पर आया दिल... क्रिकेटर ने धर्म की दीवार तोड़ कर ली शादी, आज टीम इंडिया के चीफ सेलेक्टर

Ajit Agarkar Love Story: मैदान पर अपनी रफ्तार और स्विंग से बल्लेबाजों के स्टंप उखाड़ने वाले अजीत अगरकर की निजी जिंदगी की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है. एक हिंदू ब्राह्मण परिवार का लड़का और एक मुस्लिम लड़की. धर्म की दीवार और समाज की परवाह किए बिना अगरकर ने जिस तरह अपने प्यार फातिमा घड़ियाली का हाथ थामा. वह आज भी भारतीय क्रिकेट के सबसे साहसी और खूबसूरत प्रेम प्रसंगों में गिना जाता है. Sat, 11 Apr 2026 23:29:31 +0530

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