प. बंगाल में आज मोदी की 3 रैली:टीएमसी के गढ़ बीरभूम भी जाएंगे, असम चुनाव से एक दिन पहले कांग्रेस उम्मीदवार ने पार्टी छोड़ी
पीएम मोदी गुरुवार को पश्चिम बंगाल में तीन रैलियां करेंगे। भाजपा उन इलाकों में अपना समर्थन मजबूत करने की कोशिश कर रही है, जहां उसे बड़ी सफलता मिली है। इसके अलावा वहां भी पैठ बनाने की कोशिश है जिसे सत्ताधारी TMC का गढ़ माना जाता है। मोदी अपनी पहली रैली सुबह 9.30 बजे पूर्वी मेदिनीपुर जिले के हल्दिया टाउनशिप में करेंगे। इसके बाद, दोपहर में आसनसोल के पोलो ग्राउंड स्थित आउटडोर स्टेडियम जाएंगे। तीसरी जनसभा दोपहर 2 बजे बीरभूम जिले के सिउड़ी में होगी। हल्दिया को नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी का गृह क्षेत्र माना जाता है और यह राज्य में BJP के सबसे मजबूत गढ़ों में से एक है। पार्टी ने 2021 के विधानसभा चुनावों में पूर्वी मेदिनीपुर जिले की 16 में से 8 विधानसभा सीटें जीती थीं और 2024 के आम चुनावों में इस जिले की दोनों लोकसभा सीटों पर जीत हासिल की थी। बीरभूम जिले को TMC का गढ़ माना जाता है। बीरभूम में सत्ताधारी पार्टी का प्रभाव रहा है हालांकि जिले के कुछ हिस्सों में लंबे समय से आरएसएस का संगठनात्मक नेटवर्क मौजूद है। भाजपा यहां एंटी इनकम्बेंसी का फायदा उठाना चाहती है। असम चुनाव से एक दिन पहले कांग्रेस उम्मीदवार ने पार्टी छोड़ी असम में वोटिंग से एक दिन पहले उदलगुरी सीट से कांग्रेस उम्मीदवार सुरेन दैमारी ने पार्टी छोड़ दी। हालांकि कांग्रेस ने कहा कि उन्होंने अभी तक पार्टी को अपना इस्तीफा नहीं सौंपा है। चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने बताया कि दैमारी का नाम EVM में बना रहेगा और लोग अभी भी उन्हें वोट दे सकते हैं क्योंकि नामांकन वापस लेने की समय सीमा काफी पहले ही खत्म हो चुकी है। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चुनाव के पल-पल अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाएं…
भास्कर अपडेट्स:भागवत बोले- RSS इतिहास की किताबों में अपना नाम नहीं चाहती, इसका काम स्वयंसेवकों की मेहनत पर आधारित, किसी की कृपा से नहीं
राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत बुधवार को कहा कि RSS अपना नाम इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखवाना नहीं चाहती, बल्कि पिछले 100 सालों के अपने काम का पूरा श्रेय समाज को देना चाहती है। उन्होंने कहा कि RSS का पूरा काम स्वयंसेवकों की मेहनत पर आधारित है, किसी की कृपा से नहीं। किसी की कृपा न होने के बावजूद संगठन के काम में कोई बाधा नहीं आई। भागवत नागपुर में ‘राष्ट्र स्वराधना’ नाम की किताब के विमोचन के अवसर पर बोल रहे थे। यह किताब RSS के घोष पथक (बैंड दल) के इतिहास पर आधारित है। उन्होंने कहा कि सभी स्वयंसेवकों ने संघ की विचारधारा के अनुसार राष्ट्र निर्माण के लिए अपनी पूरी ताकत लगाई है। घोष पथक की यात्रा और इस पुस्तक की सराहना करते हुए भागवत ने कहा कि यह किताब स्वयंसेवकों के लिए बहुत उपयोगी है, जिससे उन्हें 1925 में स्थापना के बाद से अब तक आरएसएस ने क्या किया और आगे क्या करना है, इसकी जानकारी मिलेगी। आज की अन्य बड़ी खबरें… पुणे में 75 साल के डॉक्टर से 12.31 करोड़ की ठगी, फर्जी शेयर ऐप, व्हाट्सएप ग्रुप से फंसाया पुणे में एक 75 साल के डॉक्टर ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग के नाम पर 12.31 करोड़ रुपए की ठगी का शिकार हो गया। पुलिस के अनुसार, डॉक्टर को जनवरी में एक मैसेज मिला, जिसमें शेयरों की लिस्ट और एक लिंक था। इस लिंक के जरिए उन्हें एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया, जहां खुद को बड़ी फाइनेंशियल कंपनी के अधिकारी बताने वाले लोग सक्रिय थे। इसके बाद डॉक्टर को एक फर्जी ट्रेडिंग ऐप पर रजिस्टर कराया गया और निवेश के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर कराए गए। 7 मार्च से 18 मार्च के बीच डॉक्टर ने कुल 8 बार में 12.31 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए। ऐप में उन्हें 54 करोड़ रुपए तक का नकली मुनाफा भी दिखाया गया। जब उन्होंने पैसे निकालने की कोशिश की, तो ठगों ने उन्हें धमकाया। इसके बाद उन्हें ठगी का एहसास हुआ। पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और आरोपियों की पहचान व पैसे के ट्रेल का पता लगाया जा रहा है। भारत ने जलवायु सम्मेलन की मेजबानी के लिए अपनी दावेदारी वापस ली, मोदी ने दुबई में समिट होस्ट करने का प्रस्ताव दिया था भारत ने 2028 में होने वाले संयुक्त राष्ट्र के जलवायु सम्मेलन COP33 की मेजबानी के लिए अपनी दावेदारी वापस ले ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2023 में दुबई में आयोजित COP28 सम्मेलन के दौरान भारत को COP33 का मेजबान बनाने का प्रस्ताव दिया था। हालांकि अब सूत्रों के मुताबिक, भारत ने इस सप्ताह आधिकारिक रूप से अपना प्रस्ताव वापस ले लिया है। इस फैसले के पीछे कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है। पर्यावरण मंत्रालय और COP मुख्यालय दोनों की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। पूर्व नीति आयोग CEO अमिताभ कांत ने इस फैसले को सही कदम बताते हुए कहा कि विकसित देश पेरिस समझौते के तहत किए गए वादों को पूरा नहीं कर पाए हैं और COP प्रक्रिया पर फॉसिल फ्यूल लॉबी का प्रभाव बढ़ गया है। COP सम्मेलन की मेजबानी UN के क्षेत्रीय समूहों के रोटेशन के आधार पर तय होती है। भारत ने इसके लिए 2025 में एक विशेष सेल भी बनाई थी, लेकिन अब उसने आयोजन से पीछे हटने का फैसला किया है।
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