Assembly Polls 2026: 9 अप्रैल को केरल समेत इन राज्यों में चुनाव, जानिए यहां स्कूल-कॉलेज खुले रहेंगे या बंद?
Assembly Polls 2026: भारत के तीन राज्यों में 9 अप्रैल 2026 को विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं. चुनाव को ध्यान में रखते हुए कई जगहों पर स्कूल, कॉलेज और अन्य शिक्षण संस्थानों को बंद रखने का फैसला लिया गया है. हालांकि, यह बंदी सभी राज्यों में एक जैसी नहीं होगी. कुछ राज्यों में पूरी तरह छुट्टी रहेगी, जबकि कुछ जगहों पर केवल उन संस्थानों को बंद किया जाएगा, जहां मतदान केंद्र बनाए गए हैं.
केरल में स्कूल खुले रहेंगे या बंद?
सबसे पहले बात करें केरल की, जहां सभी 140 विधानसभा सीटों पर एक ही चरण में मतदान होना है. यहां सरकार ने सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों व कॉलेजों को पूरी तरह बंद रखने का आदेश दिया है. इसका मुख्य कारण यह है कि बड़ी संख्या में शिक्षण संस्थानों को मतदान केंद्र के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है. ऐसे में छात्रों और कर्मचारियों की सुरक्षा और व्यवस्था को देखते हुए यह फैसला लिया गया है.
पुडुचेरी में भी रहेगा अवकाश
इसी तरह, पुडुचेरी में भी 30 सदस्यीय विधानसभा के लिए मतदान होना है. यहां भी पूर्ण अवकाश घोषित किया गया है. इस दौरान केवल स्कूल-कॉलेज ही नहीं, बल्कि कई सरकारी कार्यालय, निजी दफ्तर और व्यवसायिक प्रतिष्ठान भी बंद रह सकते हैं. इस वजह से यह दिन एक तरह से सार्वजनिक अवकाश जैसा रहेगा.
असम
असम में 126 सीटों पर मतदान होना है, लेकिन वहां पूरे राज्य में छुट्टी जरूरी नहीं है. स्थानीय प्रशासन यह तय करेगा कि किन जिलों या इलाकों में स्कूल बंद रहेंगे. आमतौर पर वही स्कूल बंद किए जाते हैं, जिन्हें मतदान केंद्र बनाया गया है.
अन्य राज्यों का हाल
कर्नाटक में कुछ सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं, इसलिए वहां भी स्कूल बंद करने का फैसला स्थानीय अधिकारियों पर निर्भर करेगा. इसी तरह नागालैंड और त्रिपुरा जैसे राज्यों में भी केवल उन्हीं संस्थानों को बंद किया जाता है, जहां मतदान की व्यवस्था होती है. कुल मिलाकर, केरल और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को पूरी तरह छुट्टी रहेगी, जबकि बाकी राज्यों में स्थिति स्थान के अनुसार अलग-अलग हो सकती है. इसलिए छात्रों और अभिभावकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने स्कूल या स्थानीय प्रशासन की ताजा जानकारी जरूर जांच लें.
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व्हाइट हाउस: अमेरिका-ईरान समझौता वार्ता के लिए उपराष्ट्रपति जेडी वेंस जाएंगे इस्लामाबाद
नई दिल्ली, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। व्हाइट हाउस प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कहा कि दो-सप्ताह के संघर्ष-विराम पर अमेरिका की जीत हुई है, जिसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी सेना ने संभव बनाया। अब आगे इस्लामाबाद में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस समझौता वर्ता में अमेरिका का नेतृत्व करेंगे।
अमेरिका-ईरान संघर्ष-विराम की घोषणा के बाद पत्रकारों से बात करते हुए व्हाइट हाउस प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी की सफलता का श्रेय राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी सेना को दिया। कहा कि यह संयुक्त राज्य अमेरिका की एक जीत है, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और हमारी अद्भुत सेना ने संभव कर दिखाया है।
संघर्ष-विराम की घोषणा के बाद समझौते के लिए पाकिस्तान में होने वाली बैठक की जानकारी देते हुए सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट बताया कि इस बैठक के लिए राष्ट्रपति ने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को इस्लामाबाद भेजा है, ताकि वे ईरान के साथ बातचीत में अमेरिका का नेतृत्व कर सकें।
दो-सप्ताह के संघर्ष-विराम पर व्हाइट हाउस प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने रणनीतिक सैन्य उद्देश्यों के साथ ऑपरेशन एपिक फ्यूरी शुरू किया था, और संयुक्त राज्य अमेरिका ने स्पष्ट रूप से उन उद्देश्यों को हासिल कर लिया है।
इस दौरान लेविट ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी में शहीद हुए 13 अमेरिकी सैनिकों के बलिदान को याद करते हुए उनका सम्मान किया।
उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे हम इस प्रगति को देख रहे हैं, हम उन 13 अमेरिकी नायकों को भी याद करते हैं और उन्हें सम्मान देते हैं, जिन्होंने इस नेक काम में अपनी जान कुर्बान कर दी। मुझे पता है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और हमारा कृतज्ञ राष्ट्र उनके इस सर्वोच्च बलिदान का सम्मान करता है, और हम उन्हें कभी नहीं भूलेंगे। ईश्वर उनके परिवारों पर कृपा करे।
पेंटागन की ओर से बुधवार को एक बयान जारी करते हुए बताया कि अमेरिका ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के दौरान 13,000 से ज्यादा ठिकानों पर हमला किया। यह एक बड़ा सैन्य अभियान रहा, जिसमें अमेरिका ने अपने 13 सैनिकों को खो दिया।
जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन, एयर फोर्स जनरल डैन केन ने कहा कि इस ऑपरेशन का पैमाना इसकी तीव्रता और पहुंच को दिखाता है।
उन्होंने कहा, “युद्ध कार्रवाई शुरू होने के बाद से, अमेरिकी संयुक्त बलों ने 13,000 से ज्यादा लक्ष्यों को निशाना बनाया।”
इनमें से 4,000 से ज्यादा ऐसे लक्ष्य थे जो युद्ध के दौरान अचानक सामने आए और उन्हें तुरंत तेज कमांड-एंड-कंट्रोल सिस्टम के जरिए निशाना बनाया गया।
इस ऑपरेशन में 10,000 से ज्यादा मिशन शामिल थे, जिनमें 62 बॉम्बर उड़ानें भी थीं। इनमें से कुछ उड़ानें अमेरिका से ईरान तक जाकर और वापस आने में 30 घंटे से भी ज्यादा चलीं।
केन ने कहा कि दुनिया में कोई और सेना ऐसा नहीं कर सकती, और इसे अमेरिका की लॉजिस्टिक क्षमता का उदाहरण बताया।
--आईएएनएस
एवाई/डीएससी
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