नई सरकार नेपाल के विदेश संबंधों को मजबूत करने पर केंद्रित: बालेंद्र शाह
काठमांडू, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने बुधवार को कहा कि उनके नेतृत्व में बनी नई सरकार आपसी फायदे के आधार पर मित्र देशों के साथ काठमांडू के रिश्तों को और मजबूत करना चाहती है।
प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद कार्यालय में विभिन्न देशों के राजदूतों और कूटनीतिक मिशनों के प्रमुखों के साथ सामूहिक शिष्टाचार बैठक में शाह ने कहा कि नई सरकार विकास, व्यापार, निवेश, जलवायु कार्रवाई और लोगों के बीच संबंध जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना चाहती है। 27 मार्च को पद संभालने के बाद यह पहली बार था जब उन्होंने विदेश नीति से जुड़े प्रतिनिधियों से मुलाकात की।
प्रधानमंत्री के सचिवालय की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, उन्होंने नेपाल की लंबे समय से अपनाई गई संतुलित विदेश नीति को भी रेखांकित किया।
बालेंद्र शाह ने कहा, नेपाल हमेशा संतुलित और व्यावहारिक विदेश नीति अपनाता रहा है। हमारे बाहरी संबंध साझा समृद्धि के लक्ष्य से निर्देशित हैं।
उन्होंने हिमालयी देश के विकास के लिए मित्र देशों और विकास साझेदारों के सतत सहयोग और सद्भाव के लिए आभार भी व्यक्त किया।
नीति की निरंतरता पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि नेपाल में नई सरकार बनने का मतलब पिछले वादों को छोड़ देना नहीं है।
उन्होंने कहा, हम राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने और यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि हमारी नीतियों का रुख स्थिर रहे। चूंकि शाह नेपाल की राष्ट्रीय राजनीति में एक नए नेता हैं और उनकी पार्टी भी नई है, इसलिए यह सवाल उठाया गया है कि नई सरकार विदेश नीति को कैसे चलाएगी।
प्रधानमंत्री ने निवेश के अनुकूल माहौल बनाने, उद्यमिता को बढ़ावा देने और सतत विकास का समर्थन करने के अपने सरकार के वचन को भी दोहराया। उन्होंने कहा कि नेपाल अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार क्षेत्रीय और वैश्विक आर्थिक ढांचे में और अधिक प्रभावी ढंग से शामिल होना चाहता है।
वैश्विक हालात को देखते हुए, प्रधानमंत्री ने शांति की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि दुनिया भर में चल रहे संघर्ष आम लोगों पर बहुत ज्यादा असर डाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि शांति हमारी साझा प्राथमिकता होनी चाहिए, और इस दिशा में सामूहिक प्रयासों में विश्वास व्यक्त किया।
उन्होंने यह भी कहा कि विदेशों में रह रहे नेपाली नागरिकों की सुरक्षा और भलाई सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
भारत-फिलीपींस ने रणनीतिक साझेदारी और आसियान सहयोग पर की चर्चा
मनीला, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत के विदेश मंत्रालय (एमईए) के ईस्टर्न सेक्रेटरी पेरियासामी कुमारन ने गुरुवार को मनीला में फिलीपींस की विदेश सचिव मारिया थेरेसा पी. लजारो से मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के रणनीतिक साझेदारी और भारत के दक्षिणपूर्व एशियाई राष्ट्र संघ (आसियान) के समर्थन पर बातचीत हुई।
फिलीपींस की विदेश सचिव लजारो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पोस्ट में लिखा, “मनीला में 28वें आसियान-भारत वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक के लिए आए भारत के विदेश मंत्रालय (ईस्ट) के सेक्रेटरी पेरियासामी कुमारन से मिलकर खुशी हुई। हमने फिलीपींस-भारत रणनीतिक साझेदारी और भारत के आसियान के सक्रिय समर्थन पर संक्षिप्त लेकिन उत्पादक बातचीत की।”
भारत और फिलीपींस ने नवंबर 1949 में औपचारिक कूटनीतिक संबंध स्थापित किए थे, जब दोनों ही देश स्वतंत्र हुए थे। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, दोनों देशों के बीच संबंध दोस्ताना हैं और कई समान मूल्यों पर आधारित हैं, जैसे कि लोकतंत्र, बहुलतावादी समाज, कानून का शासन, स्वतंत्र न्यायपालिका, मुक्त प्रेस और अंग्रेजी भाषा का व्यापक उपयोग।
इस बीच, मनीला में हुई आसियान सीनियर ऑफिशियल्स की मीटिंग (एसओएम) में फिलीपींस की चेयरशिप प्रायोरिटीज और आसियान कम्युनिटी-बिल्डिंग को आगे बढ़ाने के लिए डिलिवरेबल्स पर चर्चा जारी रही, जिसमें आसियान के बाहरी रिश्तों को मजबूत करने के तरीके और मई 2026 में 48वें आसियान समिट की तैयारी शामिल है। इसमें आसियान सदस्य देशों के एसओएम नेता या उनके प्रतिनिधि और आसियान राजनीतिक-सुरक्षा समुदाय के डिप्टी सेक्रेटरी-जनरल ने भाग लिया।
ऑफिशियल बयान के मुताबिक, आसियान की स्थापना 1967 में थाईलैंड में हुई थी, जब आसियान के फाउंडिंग फादर्स: इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर और थाईलैंड ने आसियान डिक्लेरेशन (बैंकॉक डिक्लेरेशन) पर साइन किए थे। ब्रुनेई दारुस्सलाम जनवरी 1984 में आसियान में शामिल हुआ, उसके बाद जुलाई 1995 में वियतनाम, जुलाई 1997 में लाओस और म्यांमार, अप्रैल 1999 में कंबोडिया और अक्टूबर 2025 में तिमोर-लेस्ते शामिल हुए, जिससे आज आसियान के 11 मेंबर देश बन गए हैं।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
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