ईरान को लेकर बढ़ते तनाव के बीच जब अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई पर अस्थायी रोक की घोषणा की, तो इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिला।
मौजूद जानकारी के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल अचानक गिरकर करीब 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया, जो इससे पहले 109 डॉलर से ऊपर चल रहा था। इसी तरह दूसरे प्रमुख कच्चे तेल सूचक में भी लगभग 20 डॉलर प्रति बैरल तक की गिरावट दर्ज की गई।
बता दें कि यह गिरावट उस समय आई जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ हमलों पर दो सप्ताह के लिए रोक लगाने की बात कही हैं। इस फैसले के साथ ही फारस की खाड़ी का अहम समुद्री मार्ग, होरमुज जलडमरूमध्य, फिर से खोलने की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद जताई गई।
गौरतलब है कि होरमुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है, जहां से रोजाना वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। ऐसे में इस मार्ग के बंद होने या बाधित होने से पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होती है।
मौजूद जानकारी के अनुसार पिछले कुछ हफ्तों से अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई थी। इसके चलते ईरान ने इस समुद्री मार्ग को प्रभावी रूप से बंद कर दिया था, जिससे तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई और बीमा लागत भी तेजी से बढ़ गई।
बता दें कि इसी वजह से मार्च महीने में कच्चे तेल की कीमतों में 50 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई थी, जो अब तक की सबसे बड़ी मासिक बढ़ोतरी में से एक मानी जा रही हैं। इस तेजी ने दुनिया भर में महंगाई को लेकर चिंताएं भी बढ़ा दी थीं और कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ने लगा था।
गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच अब एक संभावित दीर्घकालिक समझौते की भी चर्चा हो रही है। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि शांति के लिए बातचीत जारी है, जबकि ईरान ने संकेत दिया है कि अगर हमले रुकते हैं तो वह दो सप्ताह तक इस मार्ग से सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित कर सकता है।
मौजूद जानकारी के अनुसार जैसे ही इन संकेतों की खबर बाजार में पहुंची, निवेशकों ने अपने जोखिम वाले सौदों को कम करना शुरू कर दिया। इसका असर यह हुआ कि तेल की कीमतें गिर गईं, जबकि शेयर बाजार में तेजी और बांड बाजार में मजबूती देखने को मिली है।
बता दें कि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संघर्ष पूरी तरह शांत होता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता लौट सकती है। हालांकि, स्थिति अभी भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है और आगे के घटनाक्रम पर बाजार की नजर बनी हुई है।
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