कैबिनेट ने खरीफ सीजन 2026 के लिए फॉस्फेट और पोटेशियम उर्वरकों पर 41,533 करोड़ रुपए की सब्सिडी को मंजूरी दी
नई दिल्ली, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को खरीफ सीजन 2026 (01 अप्रैल, 2026 से 30 सितंबर, 2026 तक) के लिए फॉस्फेट और पोटेशियम (पीएंडके) उर्वरकों पर पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (एनबीएस) दरें निर्धारित करने के उर्वरक विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
कैबिनेट नोट के मुताबिक, खरीफ सीजन 2026 के लिए अनुमानित बजटीय आवश्यकता लगभग 41,533.81 करोड़ रुपए होगी, जो खरीफ सीजन 2025 के बजटीय आवश्यकता से लगभग 4,317 करोड़ रुपए अधिक है। खरीफ सीजन 2025 का बजट 37,216.15 करोड़ रुपए था।
इस मंजूरी से किसानों को रियायती, किफायती और उचित कीमतों पर उर्वरक उपलब्धता सुनिश्चित होगी। साथ ही, उर्वरकों और अन्य सामग्रियों की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में हाल के रुझानों को देखते हुए फॉस्फेट और पोटेशियम उर्वरकों पर दी जाने वाली सब्सिडी तर्कसंगत हो सकेगी।
डीएपी और एनपीकेएस ग्रेड सहित फॉस्फेट और पोटेशियम उर्वरकों पर सब्सिडी खरीफ सीजन 2026 के लिए अनुमोदित दरों के आधार पर प्रदान की जाएगी ताकि किसानों को ये उर्वरक किफायती कीमतों पर आसानी से उपलब्ध हो सकें।
कैबिनेट ने बयान में कहा कि सरकार उर्वरक निर्माताओं/आयातकों के माध्यम से किसानों को रियायती दरों पर डीएपी सहित 28 श्रेणियों के फॉस्फेट और पोटेशियम उर्वरक उपलब्ध करा रही है। फॉस्फेट और पोटेशियम उर्वरकों पर सब्सिडी 1 अप्रैल, 2010 से राष्ट्रीय उपज नीति (एनबीएस) योजना के अंतर्गत आती है। किसान हितैषी दृष्टिकोण के अनुरूप सरकार किसानों को किफायती कीमतों पर फॉस्फेट और पोटेशियम उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
यूरिया, डीएपी, एमओपी और सल्फर जैसे उर्वरकों और अन्य सामग्रियों की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में हालिया रुझानों को देखते हुए सरकार ने खरीफ वर्ष 2026 के लिए फॉस्फेट और पोटेशियम (पी एंड के) उर्वरकों (डीएपी और एनपीकेएस ग्रेड सहित) पर 01 अप्रैल, 2026 से 30 सितंबर, 2026 तक प्रभावी राष्ट्रीय सब्सिडी दरों को मंजूरी देने का निर्णय लिया है। अनुमोदित और अधिसूचित दरों के अनुसार उर्वरक कंपनियों को सब्सिडी प्रदान की जाएगी ताकि किसानों को उर्वरक किफायती कीमतों पर उपलब्ध हो सकें।
--आईएएनएस
एबीएस/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
अमेरिका-ईरान युद्धविराम का इंडोनेशिया ने किया स्वागत, शांति की दिशा में सकारात्मक कदम बताया
जकार्ता, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। इंडोनेशिया ने बुधवार को अमेरिका और ईरान के बीच घोषित युद्धविराम का स्वागत करते हुए इसे तनाव कम करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया।
इंडोनेशिया के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता इवोन मेवेंगकांग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह एक सकारात्मक शुरुआत है और सभी पक्षों को इस मौके का उपयोग करते हुए स्थायी शांति समाधान की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने कहा कि संवाद और कूटनीति ही इस संघर्ष का एकमात्र समाधान है। साथ ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता के सम्मान की आवश्यकता पर भी जोर दिया। इंडोनेशिया नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए रचनात्मक कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन जारी रखेगा।
इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की थी कि अमेरिका ने ईरान पर प्रस्तावित सैन्य हमलों को दो सप्ताह के लिए स्थगित करने पर सहमति जताई है। यह फैसला तेहरान द्वारा हॉर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने और व्यापक शांति समझौते की दिशा में चल रही बातचीत से जुड़ा है।
यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब खाड़ी क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ रहा था। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका अपने सैन्य उद्देश्यों को पहले ही हासिल कर चुका है।
इजरायल ने भी अमेरिका के इस फैसले का समर्थन किया, हालांकि यह स्पष्ट किया कि प्रस्तावित दो सप्ताह का युद्धविराम लेबनान पर लागू नहीं होगा।
वहीं, इंडिया ने भी युद्धविराम का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि इससे पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापित होगी। भारत के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि यह संघर्ष लोगों के लिए पीड़ा का कारण बना है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को भी प्रभावित किया है।
विदेश मंत्रालय ने कहा, “हम युद्धविराम का स्वागत करते हैं और उम्मीद करते हैं कि इससे पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापित होगी। जैसा कि हम पहले भी कहते रहे हैं, तनाव में कमी, संवाद और कूटनीति ही इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए आवश्यक हैं।”
--आईएएनएस
डीएससी
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