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NPS क्या है, क्या यह रिटायरमेंट सेविंग में कर सकता है मदद? जानें फायदे

क्या आप रिटायरमेंट की उम्र के करीब हैं, लेकिन भविष्य के लिए रोजाना बचत नहीं कर पाए हैं? अगर आप रिटायरमेंट के बाद की बचत की कमी को लेकर परेशान हैं और सोच रहे हैं कि रिटायरमेंट के लिए फंड कैसे जमा किया जाए, तो अब इस पर ध्यान देने का समय आ गया है. यहां आप जानेंगे कि कैसे छोटी रकम से शुरुआत करके भी ऐसे फंड जमा किए जा सकते हैं जो रिटायरमेंट के बाद आपके काम आएंगे. इसके लिए आप NPS (नेशनल पेंशन सिस्टम) का इस्तेमाल कर सकते हैं. अगर आप सोच रहे हैं कि यह क्या है, तो नीचे पूरी जानकारी दी गई है कि यह लंबे समय में रिटायरमेंट के लिए एक बड़ा फंड बनाने में आपकी कैसे मदद कर सकता है.

NPS क्या है?

NPS, यानी National Pension System, एक Defined Contribution Pension System है जो रिटायरमेंट सेविंग स्कीम के तौर पर काम करता है. इस सिस्टम के तहत, नौकरी के दौरान अलग-अलग एसेट क्लास में रेगुलर तौर पर पैसे इन्वेस्ट किए जाते हैं. NPS को पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) रेगुलेट करती है. आसान शब्दों में कहें तो, NPS का मकसद समय के साथ आपकी कमाई का कुछ हिस्सा अलग रखकर रिटायरमेंट के लिए एक बड़ा फंड बनाना है. यह ध्यान रखना जरूरी है कि इससे मिलने वाला रिटर्न शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव से जुड़ा होता है इसलिए यह फिक्स्ड-इंटरेस्ट वाली स्कीम नहीं है. 

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NPS में कौन निवेश कर सकता है?

रिटायरमेंट के लिए बचत करने का चाहने वाला कोई भी व्यक्ति NPS में शामिल हो सकता है. PFRDA के अनुसार कुछ खास शर्तों के साथ निवासी, अनिवासी और विदेशी नागरिक भी इसमें शामिल हो सकते हैं. मौजूदा नियमों के तहत, 'ऑल सिटिजन मॉडल' में शामिल होने की उम्र 18 से 85 साल के बीच है. इसके अलावा आप अपनी पसंद के आधार पर अलग-अलग एसेट क्लास चुन सकते हैं. इनमें इक्विटी (E), कॉर्पोरेट डेट (C) और सरकारी सिक्योरिटीज (G) शामिल हैं. इक्विटी (E) में स्टॉक मार्केट से जुड़े निवेश होते हैं, कॉर्पोरेट डेट (C) में कॉर्पोरेट डेट इंस्ट्रूमेंट्स होते हैं और सरकारी सिक्योरिटीज (G) में सरकारी सिक्योरिटीज शामिल होती हैं.

NPS के Tier-I और Tier-II Account क्या हैं?

NPS में मुख्य रूप से दो तरह के अकाउंट होते हैं: Tier-I और Tier-II, टियर-I एक पेंशन अकाउंट है जिसमें पैसे निकालने के लिए कुछ खास नियम होते हैं और इससे जुड़े टैक्स फायदे भी मिल सकते हैं.

टियर-II एक ऑप्शनल इन्वेस्टमेंट अकाउंट है जिसे कोई सब्सक्राइबर खोल सकता है, जिसके पास पहले से ही एक एक्टिव टियर-I अकाउंट हो. आमतौर पर, इसमें पैसे निकालने पर टियर-I जैसी पाबंदियां नहीं होतीं, हालांकि इससे जुड़े टैक्स फायदे अलग होते हैं.

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NPS के क्या फायदे हैं?

NPS कई तरह के फायदे देता है जैसे रिटायरमेंट की प्लानिंग में मदद और कम लागत वाली पेंशन स्कीम. इसमें निवेश के अच्छे विकल्प और टैक्स में काफी फायदे मिलते हैं. साथ ही, अगर आप नौकरी बदलते हैं, तो आप आसानी से अपने रिटायरमेंट अकाउंट को अपनी नई नौकरी वाली जगह पर ट्रांसफर कर सकते हैं. 

डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन है. किसी भी शेयर में पैसा लगाने से पहले अपने सर्टिफाइड फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह जरूर लें.

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इस प्राइवेट बैंक ने दी ग्राहकों को राहत, घटाया लोन पर ब्याज, MCLR में 5 बीपीएस की कटौती

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया इंडिया के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 5 अगस्त को एमपीसी बैठक में लिये गए फैसलों की घोषणा कर दी है। रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसके बाद भी देश के सबसे बड़े प्राइवेट सेक्टर बैंक ने लोन के ब्याज दरों (Loan Rates) में बदलाव किया है। कई टेन्योर के लिए मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट्स में 5 आधार अंकों की कटौती की है।

नई MCLR दरें 7 अगस्त से लागू हो चुकी हैं। बैंक ने जुलाई में भी लेंडिंग रेट्स में बदलाव किया था। आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक संशोधन के बाद दरें 8% से लेकर 8.65% के बीच है, जो पहले 8.05% से लेकर 8.70% तक थी। केवल 2 साल के टेन्योर के लिए एमसीएलआर में बदलाव नहीं किया है, रेट्स 8.55% पर बरकरार हैं।

नई MCLR दरें जानें 

ओवरनाइट टेन्योर के लिए एमसीएलआर में 0.05% की कटौती की गई है, दरें 8.05% से घटकर 8% हो चुकी हैं। 1 महीने की अवधि के लिए एमसीएलआर 8.05% से घटकर 8% हो चुका है। 3 महीने के लिए दरें 8.20% से घटकर 8.15% हो गई हैं। 3 महीने के लिए दरें 8.30% है , जो पहले 8.35% थी। 1 साल के लिए एमसीएलआर 8.45% से घटकर 8.40% हो चुका है। वहीं 3 साल की अवधि के लिए दरें 8.70% से घटकर 8.65% हो चुकी हैं।

मार्जिनल मार्जिनल कॉस्ट ऑफ़ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट्स वे न्यूनतम दरें होती हैं, जिसके आधार पर बैंक विभिन्न प्रकार के लोन के लिए ब्याज दरों को निर्धारित करते हैं। इसका सीधा असर में ईएमआई पर पड़ता है। बेस रेट 8.70% पर बरकरार है। बेंचमार्क पीएलआर 17.20% है। आखिरी बार बेस रेट और बेंचमार्क पीएलआर में 24 जून 2026 को बदलाव किया गया था।

 फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिल रहा कितना ब्याज?

बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट के ब्याज दरों में भी कोई बदलाव नहीं किया है। 3 करोड़ रुपये से कम के डिपॉजिट पर सामान्य नागरिकों को 2.75% से लेकर 6.50% तक ब्याज ऑफर कर रहा है। जबकि वरिष्ठ नागरिकों को 6 .25% से लेकर 7% तक ब्याज मिल रहा है। 7 दिन से लेकर 10 साल तक का निवेश ग्राहक कर सकते हैं।

यहाँ चेक करें लोन और एफडी के लिए ब्याज दरें 

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गॉल गैलेंट्स को इससे पहले 3 अलग-अलग फाइनल में हार का सामना करना पड़ा था, जिसमें से जाफना किंग्स ने भी उसका दिल तोड़ा था. मगर इस बार गॉल ने पुराने सारे हिसाब बराबर करते हुए ट्रॉफी पर कब्जा कर लिया. Sat, 08 Aug 2026 23:48:03 +0530

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