सीजफायर के बाद भारत के लिए आई बड़ी खुशखबरी, शुरू हुई ये तैयारी
ईरान और अमेरिका के बीच घोषित संघर्ष-विराम से न सिर्फ शेयर बाजार में रोनक लौटी है बल्कि ये संघर्ष विराम भारत के लिए बड़ी खुशखबरी भी लेकर आया है. सीजफायर के बाद भारत ने तेजी से कूटनीतिक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं. लंबे समय से जारी तनाव के कारण पश्चिम एशिया में व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई थी. ऐसे में सीजफायर को भारत ने राहत की एक बड़ी उम्मीद के तौर पर देखा है. दरअसल इस सीजफायर के बाद भारत ने अपनी बड़ी तैयारी शुरू की है जिसके तहत भारत में भरपूर तेल और गैस की आपूर्ति होगी.
भारत ने किया सीजफायर का स्वागत
भारत सरकार ने आधिकारिक रूप से संघर्ष-विराम का स्वागत करते हुए कहा है कि यह कदम क्षेत्र में स्थायी शांति की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है. विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि संवाद और कूटनीति ही ऐसे संघर्षों का स्थायी समाधान हैं.
भारत ने यह भी रेखांकित किया कि इस संघर्ष के कारण आम लोगों को भारी नुकसान हुआ है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के साथ-साथ व्यापारिक नेटवर्क भी प्रभावित हुए हैं.
होर्मुज में फंसे जहाजों को निकालने की कोशिश
सीजफायर के तुरंत बाद भारत ने Strait of Hormuz के पश्चिमी हिस्से में फंसे अपने जहाजों को निकालने के लिए ईरान से संपर्क साधा है. वर्तमान में भारत के 16 जहाज इस क्षेत्र में रुके हुए हैं, जिनमें अधिकतर तेल और गैस से जुड़े हैं.
इन जहाजों में करीब दो लाख टन से ज्यादा एलपीजी मौजूद है, जो भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. सरकार इन जहाजों को जल्द से जल्द सुरक्षित निकालने के लिए लगातार प्रयास कर रही है.
ऊर्जा सुरक्षा पर बड़ा असर
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत आयात करता है, जिसमें से करीब 60 प्रतिशत पश्चिम एशिया से आता है. ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी तरह की अस्थिरता सीधे तौर पर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती है.
हाल के तनाव के कारण देश में गैस और एलपीजी की आपूर्ति पर भी असर पड़ा है, जिससे उद्योगों और आम उपभोक्ताओं दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ा.
कूटनीतिक स्तर पर तेज हलचल
इस संकट के बीच भारत ने कूटनीतिक मोर्चे पर भी सक्रियता बढ़ा दी है. विदेश सचिव विक्रम मिसरी अमेरिका दौरे पर हैं, जहां वे अमेरिकी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा करेंगे.
वहीं विदेश मंत्री एस जयशंकर भी संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की यात्रा पर जाने वाले हैं. यह यात्रा भारत की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए लगातार संवाद जारी रखा जा रहा है.
व्यापार और वैश्विक बाजार पर नजर
सीजफायर के बाद उम्मीद की जा रही है कि व्यापारिक जहाजों की आवाजाही सामान्य होगी और वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता आएगी. इससे भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों को राहत मिलने की संभावना है.
संतुलित रणनीति की जरूरत
मौजूदा हालात में भारत संतुलित और सक्रिय कूटनीति के जरिए अपने हितों की रक्षा करने में जुटा है. ऊर्जा सुरक्षा, व्यापारिक स्थिरता और क्षेत्रीय शांति इन तीनों मोर्चों पर भारत की रणनीति स्पष्ट नजर आ रही है. आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि यह प्रयास कितनी जल्दी ठोस परिणाम में बदलते हैं.
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गर्मियों में बदबूदार पसीने से डियोड्रेंट नहीं, यह आयुर्वेदिक उपचार दिलाएंगे राहत
नई दिल्ली, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। गर्मियों के आते ही त्वचा की देखभाल करना बहुत जरूरी हो जाता है। सर्दियों की तुलना में गर्मियों के मौसम में त्वचा ज्यादा देखभाल मांगती है, लेकिन त्वचा सुरक्षा से लेकर पसीने की दुर्गंध तक गर्मियों में एक आम समस्या बन जाती है।
लोग पसीने से बचने के लिए डियोड्रेंट और परफ्यूम का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन यह अस्थायी परिणाम देते हैं, सही संतुलन नहीं। गर्मियों में आने वाले बदबूदार पसीने से निजात पाने के लिए आयुर्वेद शरीर के अंदर संतुलन पर जोर देता है, न कि बाहरी उपाय पर।
आयुर्वेद पसीने की दुर्गंध को कफ और वात का असंतुलन मानता है। कफ और वात के असंतुलन से पसीना ज्यादा निकलता है और बैक्टीरिया पनपने का वातावरण गर्मी की वजह से बन जाता है। ऐसे में शरीर से तेज दुर्गंध आती है, जिससे बाहर निकलने में भी शर्मिंदगी होती है। ऐसे में पहले शरीर को अंदर से स्वच्छ करना ज्यादा जरूरी है। पहले जानते हैं कि ऐसा होता क्यों है।
आयुर्वेद में इसे खान-पान से जोड़ा गया है। गर्मियों के समय ज्यादा तला-भुना, तीखा, मसालेदार और कम पानी पीना इसके पीछे का मुख्य कारण है। इससे हार्मोन असंतुलन पैदा होता है। इसके साथ ही लोग गर्मियों में सूती कपड़े पहनने के बजाय सिंथेटिक कपड़ों का इस्तेमाल ज्यादा करते हैं, जो धूप के संपर्क में आते ही शरीर में गर्मी पैदा करते हैं और न सिर्फ पसीने में वृद्धि करते हैं, बल्कि इससे मुंहासे और घमौरी की संभावना भी बढ़ जाती है।
अब सवाल है कि क्या करें। इसके लिए दिन की शुरुआत गुनगुने पानी से करें। हो सके तो सुबह सौंफ का पानी पीएं। इसकी तासीर ठंडी होती है और यह पेट साफ करने में भी मदद करती है। इसके साथ ही दिन में एक बार गुलाब जल का सेवन जरूर करें। इससे तन और मन में शीतलता मिलती है। शरीर को ठंडा रखने के लिए नारियल पानी जरूर पीएं। नारियल पानी शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और पेट को भी ठंडा रखने में मदद करता है। इसके साथ भुना जीरा मिलाकर दोपहर के वक्त छाछ जरूर लें। इससे गर्मियों में लू नहीं लगती और शरीर ठंडा महसूस करता है।
भीतरी शीतलता के अलावा शरीर को बाहर से भी स्वच्छ रखना जरूरी है। इसके लिए गर्मियों में नीम के पत्ते के साथ स्नान करे। यह बैक्टीरिया को कम करने में मदद करता है। अगर नीम का पेड़ आस-पास उपलब्ध नहीं है, तो फिटकरी को मिलाकर नहाने से भी बैक्टीरिया कम होगा। धूप और दुर्गंध से बचने के लिए शरीर पर चंदन और गुलाबजल का लेप लगाएं। यह शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ सुगंधित बनाने में भी मदद करेगा।
--आईएएनएस
पीएस/एबीएम
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