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Strait of Hormuz: ईरान की 'किलेबंदी' में भी नहीं रुके भारतीय जहाज, 8 वेसेल्स ने पार किया सबसे खतरनाक समुद्री रास्ता

Strait of Hormuz: ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी भीषण तनाव के कारण दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग 'स्ट्रैट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) लगभग ठप पड़ा है। इस वैश्विक संकट के बावजूद भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण इस गलियारे से अब तक कम से कम आठ भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से गुजर चुके हैं।

वैश्विक तेल बाजार में मची उथल-पुथल के बीच भारतीय जहाजों का यह पारगमन देश की ऊर्जा सुरक्षा और आम जनता के लिए निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

ईरान ने 'मित्र देशों' के लिए खोला रास्ता
तेहरान ने अमेरिका और इजरायल के साथ जारी संघर्ष के जवाब में इस जलडमरूमध्य की घेराबंदी कर दी है। हालांकि, ईरान ने स्पष्ट किया है कि यह समुद्री रास्ता भारत, रूस, चीन और पाकिस्तान जैसे 'मित्र देशों' के लिए खुला रहेगा। ताजा घटनाक्रम में एलपीजी टैंकर 'ग्रीन सांवी' (Green Sanvi) ने सफलतापूर्वक इस क्षेत्र को पार कर लिया है और अब वह भारत की ओर बढ़ रहा है। वह इस संकट काल में होर्मुज को पार करने वाला आठवां भारतीय जहाज बन गया है। आने वाले दिनों में 'ग्रीन आशा' और 'जग विक्रम' जैसे दो और जहाजों के भारत पहुंचने की उम्मीद है।

इन भारतीय जहाजों ने पार किया 'होर्मुज का चक्रव्यूह'
भारत अब उन देशों में शामिल हो गया है जिनके सबसे ज्यादा जहाजों ने युद्धग्रस्त होर्मुज जलडमरूमध्य को पार किया है। अब तक सुरक्षित निकलने वाले जहाजों की सूची इस प्रकार है:

  1. शिवालिक (Shivalik)
  2. नंदा देवी (Nanda Devi)
  3. जग लाड़की (Jag Laadki)
  4. पाइन गैस (Pine Gas)
  5. जग वसंत (Jag Vasant)
  6. बीडब्ल्यू टायर (BW Tyr)
  7. बीडब्ल्यू एल्म (BW Elm)
  8. ग्रीन सांवी (Green Sanvi)

भारतीय नौसेना और MEA की पैनी नजर
विदेश मंत्रालय (MEA) ने पुष्टि की है कि भारतीय नौसेना पिछले कई वर्षों से ओमान की खाड़ी और अरब सागर में तैनात है ताकि भारतीय और अन्य वाणिज्यिक जहाजों के लिए सुरक्षित समुद्री गलियारा सुनिश्चित किया जा सके। वर्तमान में, लगभग 485 भारतीय नाविकों के साथ 15 से अधिक भारतीय झंडे वाले जहाज खाड़ी क्षेत्र में मौजूद हैं।

इस्लामी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इस जलमार्ग पर अपने 'पूर्ण और निर्णायक नियंत्रण' का दावा किया है, जबकि ईरान की संसद ने इस मार्ग के प्रबंधन के लिए एक नई योजना को मंजूरी दी है, जिसमें अमेरिका और इजरायल के जहाजों पर पूर्ण प्रतिबंध का प्रस्ताव है।

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Bab-el-Mandeb Crisis: लाल सागर की चाबी अब ईरान के पास? होर्मुज के बाद दूसरे सबसे बड़े समुद्री रास्ते पर मंडराया खतरा

Bab-el-Mandeb Crisis: ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा युद्ध अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर आ गया है। ईरान ने पहले ही होर्मुज को बंद कर वैश्विक तेल आपूर्ति का गला घोंट दिया है, और अब उसकी नजर 'बाब-अल-मंदेब' पर है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान अपने समर्थित हूती विद्रोहियों के जरिए लाल सागर के इस मुहाने को बंद करने की योजना बना रहा है।

यदि ऐसा होता है, तो स्वेज नहर से होने वाला व्यापार पूरी तरह ठप हो जाएगा। यह अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए एक 'चेकमेट' जैसी स्थिति होगी, क्योंकि दुनिया का लगभग 12 से 15 प्रतिशत व्यापार इसी पतले समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है।

​क्या है बाब-अल-मंदेब? इसे 'दुखों का द्वार' क्यों कहते हैं? 
बाब-अल-मंदेब एक रणनीतिक जलडमरूमध्य है जो अरब प्रायद्वीप पर यमन और अफ्रीका के सींग (Horn of Africa) पर जिबूती और इरिट्रिया के बीच स्थित है। अरबी भाषा में इसका अर्थ होता है "दुखों का द्वार" (Gate of Tears), इसके नाम के पीछे कई प्राचीन कथाएं हैं, जिनमें से एक यह है कि पुराने समय में यहां आने वाले भीषण तूफानों और समुद्री डाकुओं के कारण कई जहाज डूब जाते थे।

यह जलमार्ग लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है। इसकी चौड़ाई महज 26 से 30 किलोमीटर है, जिससे यहां से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाना बेहद आसान हो जाता है।

​ईरान के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह रास्ता? 
ईरान सीधे तौर पर बाब-अल-मंदेब की सीमा पर नहीं है, लेकिन यमन में सक्रिय हूती विद्रोही ईरान के इशारे पर काम करते हैं। बाब-अल-मंदेब पर नियंत्रण का मतलब है स्वेज नहर के प्रवेश द्वार पर नियंत्रण। अगर ईरान इसे बंद करने में सफल रहता है, तो भारत, चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया से यूरोप जाने वाले जहाजों को पूरे अफ्रीका महाद्वीप का चक्कर लगाकर 'केप ऑफ गुड होप' के रास्ते जाना होगा।

इससे न केवल यात्रा का समय 15 से 20 दिन बढ़ जाएगा, बल्कि शिपिंग लागत और ईंधन की कीमतों में भी जबरदस्त उछाल आएगा, जो वैश्विक महंगाई को बेकाबू कर देगा।

​भारत और दुनिया पर पड़ने वाला असर 
भारत का यूरोप के साथ होने वाला अधिकांश व्यापार इसी रास्ते से होता है। अगर ईरान इसे बंद करता है, तो भारत में कच्चा तेल, एलपीजी और अन्य आयातित वस्तुओं की कीमतें आसमान छूने लगेंगी। ट्रंप प्रशासन ने पहले ही चेतावनी दी है कि वे बाब-अल-मंदेब को 'इंटरनेशनल वाटर्स' के रूप में सुरक्षित रखने के लिए किसी भी हद तक जाएंगे।

पेंटागन इस क्षेत्र में अपनी नौसैनिक उपस्थिति बढ़ा रहा है, लेकिन हूतियों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे 'ड्रोन और एंटी-शिप मिसाइलें' अमेरिकी युद्धपोतों के लिए भी बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।

बाब-अल-मंदेब की भौगोलिक स्थिति: तीन महाद्वीपों का संगम 
बाब-अल-मंदेब एक संकरा जलमार्ग है, इसकी कुल चौड़ाई मात्र 30 किलोमीटर है, जबकि इसका मुख्य शिपिंग चैनल केवल 3 किलोमीटर चौड़ा है। यही कारण है कि यहां से गुजरने वाले विशालकाय जहाजों को जमीन से दागी जाने वाली मिसाइलों या ड्रोनों से निशाना बनाना बेहद आसान है।

यह जलमार्ग उत्तर में लाल सागर और स्वेज नहर को दक्षिण में अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है। इसकी इसी स्थिति के कारण इसे एशिया, यूरोप और अफ्रीका के बीच का 'जंक्शन' माना जाता है।

वैश्विक व्यापार का 'गला': क्यों अहम है यह रास्ता? 
दुनिया का लगभग 12% से 15% वैश्विक व्यापार इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। स्वेज नहर से होकर गुजरने वाला हर जहाज अनिवार्य रूप से बाब-अल-मंदेब से गुजरता है।

तेल और गैस की सप्लाई: प्रतिदिन लगभग 45 से 50 लाख बैरल कच्चा तेल और भारी मात्रा में एलएनजी (LNG) यहां से गुजरती है। खाड़ी देशों से यूरोप और अमेरिका जाने वाला तेल इसी रास्ते पर निर्भर है।

उपभोक्ता सामान: चीन, भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया से यूरोप जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक सामान, कपड़े और मशीनरी का अधिकांश हिस्सा इसी रूट से जाता है।

वैकल्पिक मार्ग का अभाव: यदि यह रास्ता बंद होता है, तो जहाजों को पूरे अफ्रीका महाद्वीप का चक्कर लगाकर 'केप ऑफ गुड होप' से जाना होगा। इससे यात्रा में 10 से 15 दिन की देरी और ईंधन लागत में लाखों डॉलर की बढ़ोतरी होती है।

बाब-अल-मंदेब: सामरिक तथ्य

  • लंबाई: लगभग 110 किलोमीटर।
  • सबसे संकरा बिंदु: पेरिम द्वीप (Perim Island) के पास, जहाँ से रास्ता दो हिस्सों में बंट जाता है।
  • प्रमुख तटवर्ती देश: यमन, जिबूती, इरिट्रिया और सोमालिया (निकटवर्ती)।
  • वैश्विक हिस्सेदारी: दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 10% इसी जलमार्ग से।

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  Sports

PSL 2026 में बड़ा बवाल, Daryl Mitchell ने Usman Tariq के एक्शन पर उठाए सवाल, खेलने से किया इनकार

मौजूदा पीएसएल (पाकिस्तान सुपर लीग) के 18वें मैच में क्वेटा ग्लैडिएटर्स का मुकाबला रावलपिंडीज़ से हुआ। ग्लैडिएटर्स ने शानदार जीत दर्ज की, लेकिन डैरिल मिशेल और उस्मान तारिक के बीच की एक घटना सुर्खियों में छा गई। 183 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए, डैरिल मिशेल उस समय वायरल हो गए जब उन्होंने क्वेटा ग्लैडिएटर्स के उस्मान तारिक के विवादास्पद गेंदबाजी एक्शन के कारण उनका सामना करने से इनकार कर दिया। गौरतलब है कि तारिक अक्सर अपने गेंदबाजी एक्शन को लेकर चर्चा में रहते हैं और कई लोग उन पर गेंद को चक करने का आरोप लगाते हैं।
 

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हालाँकि, यह घटना दूसरी पारी के मध्य ओवरों में घटी; डैरिल मिशेल तारिक का सामना करने के लिए तैयार थे। लेकिन जैसे ही पाकिस्तानी गेंदबाज ने अपने ट्रेडमार्क रन-अप की तैयारी की, मिशेल, जो स्पष्ट रूप से निराश थे, कई बार क्रीज से उठकर चले गए। मैच की बात करें तो, क्वेटा ग्लैडिएटर्स ने पहले बल्लेबाजी करते हुए शुरुआत की और पहली पारी में 182 रन बनाए। सऊद शकील ने 42 रनों के साथ पारी की शुरुआत की, वहीं रिले रोसौव ने 53 रन और हसन नवाज ने 39 रन बनाकर टीम में अपना योगदान दिया।
 

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लक्ष्य का पीछा करते हुए रावलपिंडीज की टीम लय में नहीं आ पाई और लक्ष्य हासिल करने में नाकाम रही, जिसके चलते उसे हार का सामना करना पड़ा। मोहम्मद रिजवान शून्य पर आउट हुए और उस्मान ख्वाजा ने सात रन बनाकर पारी की शुरुआत की। डेरिल मिशेल और शान मसूद ने क्रमशः 30 और 31 रन बनाकर सबसे ज्यादा रन बनाए। क्वेटा ग्लैडिएटर्स ने विपक्षी टीम को 121 रनों पर रोक दिया और 61 रनों से जीत हासिल की। ​​दूसरी पारी में सऊद शकील, उस्मान तारिक और जहांदाद खान ने दो-दो विकेट लेकर सबसे ज्यादा विकेट लिए। अबरार अहमद और काशिफ भट्टी ने भी एक-एक विकेट लिया।
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