महाराष्ट्र के मंत्री ने 'गिग वर्कर्स' की सुरक्षा और सत्यापन पर जोर दिया
मुंबई, 7 अप्रैल (आईएएनएस)। ग्राहकों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, गिग वर्करों और डिलीवरी वर्करों के माध्यम से सुरक्षित सेवाएं मिलें, यह सुनिश्चित करने के लिए महाराष्ट्र के श्रम मंत्री आकाश फुंडकर ने मंगलवार को एक व्यापक ढांचा तैयार करने का निर्देश दिया।
सेवाओं की त्रुटिहीनता, सुरक्षा और कानूनी दायरे को सुनिश्चित करने के लिए वर्करों के सत्यापन पर विशेष जोर दिया जाएगा। ये निर्देश श्रम और गृह विभागों की संयुक्त बैठक के दौरान जारी किए गए।
विभिन्न डिलीवरी और सेवा प्रदाता कंपनियां घर-घर जाकर सेवाएं प्रदान करने के लिए डिलीवरी पार्टनर नियुक्त करती हैं। वर्तमान में, ये कंपनियां ऑनलाइन, बिना पहचान बताए पंजीकरण करती हैं और डेटा को तृतीय-पक्ष सत्यापन एजेंसियों को भेजती हैं।
हालांकि, सरकार ने बताया कि बैठक में इन एजेंसियों के कानूनी अधिकार, उनकी प्रक्रियाओं के कानूनी आधार और उपभोक्ताओं एवं श्रमिकों दोनों की समग्र सुरक्षा के संबंध में विस्तृत चर्चा हुई।
मंत्री फुंडकर ने कहा कि गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों को भागीदार के रूप में पंजीकृत करने वाली कंपनियों को उनकी पृष्ठभूमि जांच और सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी लेनी होगी।
उन्होंने निर्देश दिया कि डिलीवरी के लिए उपयोग किए जाने वाले वाहनों के वाणिज्यिक पंजीकरण जैसे पहलुओं का अध्ययन करने के लिए सभी संबंधित विभागों के साथ समन्वय करके एक व्यापक योजना विकसित की जाए।
बैठक में ऑनलाइन खाद्य एवं खाद्य वितरण कंपनियों में कार्यरत गिग और प्लेटफॉर्म कर्मचारियों को विनियमित करने के लिए कड़े उपायों की आवश्यकता पर बल दिया गया। राज्य की अधिकांश एग्रीगेटर कंपनियां ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से संचालित होती हैं और कर्मचारियों की नियुक्ति प्रत्यक्ष भर्ती के बजाय तृतीय-पक्ष एजेंसियों के माध्यम से करती हैं।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि इससे नियोक्ता-कर्मचारी संबंध का अभाव होता है और जिम्मेदारियों में अस्पष्टता उत्पन्न होती है।
मंत्री ने कहा कि वर्तमान में आधार कार्ड, स्थायी खाता संख्या, बैंक विवरण, ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन के कागजात, बीमा और ई-श्रम पंजीकरण जैसे दस्तावेज आवश्यक हैं, लेकिन बैठक में एक समान नियामक संहिता की आवश्यकता पर बल दिया गया।
--आईएएनएस
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