सरिता विहार में नाले में बहा 18 वर्षीय अंकित, 22 घंटे बाद भी नहीं मिला शव
दिल्ली के सरिता विहार इलाके के आली विहार स्थित प्रिंका कैंप से एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है. यहां 18 वर्षीय युवक अंकित नाले में गिरकर लापता हो गया. बताया जा रहा है कि अंकित ऑफिस से अपने घर लौट रहा था, तभी नाले के पास बनी पुलिया से गुजरते वक्त वह तेज बहाव वाले पानी में गिर गया.
गोताखोरों के लिए बड़ी चुनौती
स्थानीय लोगों के मुताबिक, लगातार बारिश के बाद नाले में पानी का स्तर काफी बढ़ गया था. नाले का बहाव भी इतना तेज था कि हादसे के बाद युवक को तलाशना बचाव दल और गोताखोरों के लिए बड़ी चुनौती बन गया.
अंकित का शव बरामद नहीं
हादसे को करीब 22 घंटे बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक अंकित का शव बरामद नहीं हो पाया है. गोताखोरों और बचाव दल की टीमें लगातार नाले में तलाशी अभियान चला रही हैं और युवक को ढूंढने की हर संभव कोशिश की जा रही है.
गोताखोरों को बुलाकर तलाश शुरू
अंकित के पिता के मुताबिक, हादसे के बाद परिवार ने भी अपने स्तर पर बेटे को काफी तलाशने की कोशिश की. मौके के आसपास उसका बैग मिला, लेकिन अंकित का कोई सुराग नहीं मिला. इसके बाद बचाव दल और गोताखोरों को बुलाकर तलाश शुरू की गई.
बचाव दल लगातार ऑपरेशन में जुटा
सबसे बड़ी चुनौती नाले का तेज बहाव है. तेज पानी के कारण गोताखोरों को नाले के अंदर उतरने और लगातार आगे बढ़कर तलाश करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. बावजूद इसके बचाव दल लगातार ऑपरेशन में जुटा हुआ है.
बारिश के दौरान नाले का जलस्तर बढ़ा
जिस पुलिया के पास यह हादसा हुआ, वहां से स्थानीय लोगों की अक्सर आवाजाही होती है. स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के दौरान नाले का जलस्तर बढ़ जाता है और ऐसे में यह रास्ता बेहद खतरनाक हो जाता है.
अब सवाल सिर्फ अंकित को तलाशने का नहीं, बल्कि इस तरह की जगहों पर सुरक्षा इंतजामों का भी है. आखिर ऐसी पुलिया के आसपास सुरक्षा के इंतजाम क्यों नहीं हैं? क्या लोगों को खतरे से आगाह करने के लिए कोई व्यवस्था की गई थी? और क्या बारिश के दौरान बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने यहां कोई वैकल्पिक रास्ता या सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की?
परिवार की नजरें बचाव दल पर टिकी
फिलहाल परिवार की नजरें बचाव दल पर टिकी हैं. 22 घंटे से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन अंकित का अभी तक कोई पता नहीं चला है. गोताखोर लगातार कोशिश कर रहे हैं कि जल्द से जल्द युवक को तलाशकर उसके परिवार तक पहुंचाया जा सके.
महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर NDA को मिला इस दल का समर्थन, क्या फिर बढ़ने वाली है ताकत?
Women Reservation and Delimitation Bill:पंजाब की राजनीति में एक बार फिर पुराने सियासी समीकरणों के लौटने की चर्चा तेज हो गई है. शिरोमणि अकाली दल ने महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े प्रस्तावित विधेयकों के समर्थन का ऐलान किया है. यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है, जब पार्टी प्रमुख सुखबीर सिंह बादल की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अहम मुलाकात हुई. बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इसकी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन इसके बाद पंजाब के राजनीतिक गलियारों में संभावित गठबंधन को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं.
महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को अकाली दल का समर्थन
अकाली दल का महिला आरक्षण और परिसीमन बिल के समर्थन का फैसला राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. पार्टी के इस रुख को पंजाब की आगामी राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है.
खास बात यह है कि यह घोषणा सुखबीर सिंह बादल की प्रधानमंत्री से मुलाकात के तुरंत बाद हुई. हालांकि, दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत के एजेंडे को लेकर कोई आधिकारिक विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है. ऐसे में राजनीतिक विश्लेषक इस मुलाकात को पंजाब के आगामी चुनावी समीकरणों से जोड़कर देख रहे हैं.
The Shiromani Akali Dal, at a meeting of its senior leaders in Chandigarh today, demanded the immediate implementation of the Women’s Reservation Bill in the country.
— Sukhbir Singh Badal (@officeofssbadal) August 8, 2026
The Shiromani Akali Dal draws inspiration from the teachings of the Sikh Gurus, who championed the dignity,… pic.twitter.com/y7VP39zdyk
क्या फिर साथ आएंगे अकाली दल और बीजेपी?
अकाली दल और बीजेपी लंबे समय तक पंजाब की राजनीति में सहयोगी रहे हैं. दोनों दलों का गठबंधन करीब ढाई दशक तक चला. हालांकि, वर्ष 2020 में तीन कृषि कानूनों को लेकर दोनों पार्टियों के बीच मतभेद बढ़ गए और अकाली दल ने एनडीए से अलग होने का फैसला किया.
इसके बाद दोनों पार्टियों ने अलग-अलग चुनावी रास्ता अपनाया. अब पंजाब की राजनीति में बदले समीकरणों के बीच एक बार फिर दोनों दलों के करीब आने की संभावनाएं जताई जा रही हैं.
हालांकि, अभी तक न तो अकाली दल और न ही बीजेपी ने किसी नए गठबंधन की आधिकारिक घोषणा की है. इसलिए फिलहाल इसे संभावित राजनीतिक समझौते के संकेत के तौर पर ही देखा जा रहा है.
AAP और कांग्रेस के सामने चुनौती बनने की कोशिश
पंजाब में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस प्रमुख राजनीतिक ताकतों में शामिल हैं. ऐसे में अकाली दल और बीजेपी के संभावित साथ आने की स्थिति में राज्य की चुनावी लड़ाई और दिलचस्प हो सकती है.
अकाली दल का पारंपरिक प्रभाव ग्रामीण क्षेत्रों और सिख मतदाताओं के बीच माना जाता है, जबकि बीजेपी को शहरी क्षेत्रों में समर्थन हासिल है. दोनों दलों के समर्थक आधार एक-दूसरे के पूरक साबित होते हैं तो गठबंधन को चुनाव में इसका फायदा मिल सकता है.
लोकसभा में अकाली दल की स्थिति
वर्तमान में लोकसभा में अकाली दल की संख्या काफी सीमित है और पार्टी के पास केवल एक सांसद है. इसलिए राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी का संख्याबल बहुत बड़ा नहीं है. यही वजह है कि सुखबीर बादल और प्रधानमंत्री की मुलाकात को पंजाब की राजनीति के संदर्भ में ज्यादा महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनाव दोनों दलों के लिए अहम हैं. ऐसे में सीटों के बंटवारे, वोट बैंक और चुनावी रणनीति को लेकर पर्दे के पीछे बातचीत की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता.
पहले भी सफल रहा है गठबंधन
अकाली दल और बीजेपी की जोड़ी पंजाब में पहले काफी प्रभावी रही है. दोनों दलों के गठबंधन ने 1997, 2007 और 2012 में राज्य में सरकार बनाई थी. लंबे समय तक सत्ता में रहने के कारण दोनों दलों के बीच संगठनात्मक और चुनावी तालमेल भी मजबूत रहा.
लेकिन 2020 में गठबंधन टूटने के बाद दोनों पार्टियों को अलग-अलग चुनावी मैदान में अपेक्षित सफलता नहीं मिली. ऐसे में अब पुराने सहयोगी फिर साथ आते हैं या नहीं, इस पर सबकी नजर है.
आगे क्या होगा?
फिलहाल गठबंधन को लेकर आधिकारिक तस्वीर साफ नहीं है, लेकिन अकाली दल का नए विधेयकों पर समर्थन और शीर्ष नेतृत्व की मुलाकात ने पंजाब की राजनीति में चर्चाओं को जरूर हवा दे दी है. यदि दोनों पार्टियां दोबारा साथ आती हैं, तो इसका सीधा असर पंजाब के चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है. आने वाले दिनों में सीटों के बंटवारे, साझा रणनीति और नेतृत्व स्तर की बैठकों से इस संभावित गठजोड़ की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है.
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